कितनी ताकतवर है ‘गजनवी’, भारत के सामने कहां ठहरती हैं पाकिस्तान की मिसाइल

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Updated: August 30, 2019, 1:24 PM IST
कितनी ताकतवर है ‘गजनवी’, भारत के सामने कहां ठहरती हैं पाकिस्तान की मिसाइल
गजनवी मिसाइल परीक्षण कराची के पास सोनमियानी उड़ान परीक्षण रेंज से किया गया.

पाकिस्तान (Pakistan) पूरी दुनिया का ध्यान कश्मीर (Kashmir) की तरफ खींचने के लिए अपनी बैलेस्टिक मिसाइल गजनवी (Ballistic Missile Ghazanavi) का परीक्षण किया है. वो जानबूझकर तनाव के हालात पैदा कर रहा है...

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पाकिस्तान (Pakistan) ने पूरी दुनिया का ध्यान कश्मीर (Kashmir) की तरफ खींचने के लिए एक नया पैंतरा चला है. पाकिस्तान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल गजनवी (Ballistic Missile Ghazanavi) का परीक्षण किया है. पाकिस्तान की ये मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) परमाणु हमले की धमकी भी दे चुके हैं. पाकिस्तान की पूरी कोशिश है कि किसी भी तरह से दुनिया के पटल पर वो कश्मीर मसले को जिंदा रख सके. इसलिए वो तनाव पैदा करने वाले ऐसे कदम उठा रहा है.

कितना ताकतवर है पाकिस्तान का गजनवी
पाकिस्तान की गजनवी मिसाइल सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है. गजनवी मिसाइल 290 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है. पाकिस्तान इसके पहले भी गजनवी मिसाइल का परीक्षण कर चुका है.



इसे गजनवी या हत्फ-3 मिसाइल के नाम से जाना जाता है. ये 700 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम है. इसे पाकिस्तान की कम या मध्यम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल के तौर पर जाना जाता है. इसे बनाने की शुरुआत 1987 में हुई थी. कई परीक्षण से गुजरने के बाद 2007 में इसे पाकिस्तानी सेना में शामिल किया गया.

पाकिस्तान की इस बैलिस्टिक मिसाइल की लंबाई 8.5 मीटर है. इसका व्यास करीब 0.8 मीटर है. पाकिस्तान का दावा है कि गजनवी परंपरागत हथियार के साथ परमाणु हथियार भी ले जाने में सक्षम है.


पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्लेप्क्स ने इस मिसाइल को डिजाइन और डेवलप किया है. इसका पहला वर्जन 2004 से ही पाकिस्तानी सेना के पास है.
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पाकिस्तान का गजनवी बैलेस्टिक मिसाइल


कैसे पड़ा गजनवी नाम
पाकिस्तान ने बैलिस्टिक मिसाइल का नाम तुर्की के मुस्लिम हमलावर महमूद गजनवी के नाम पर रखा है. विशेषज्ञों की राय है कि इस मिसाइल का नाम रखने के पीछे पाकिस्तान की भारत के प्रति घृणा ही झलकती है. महमूद गजनवी ने 17 बार भारत पर आक्रमण किया था और वो यहां से अपार धन संपदा लूटकर गजनी ले गया था. उसने ग्यारहवीं सदी में भारत में जमकर लूट मचाई.

महमूद गजवनी ने सबसे बड़ा आक्रमण 1026 में काठियावाड़ के सोमनाथ मंदिर पर किया था. उसने सोमनाथ मंदिर का शिवलिंग तोड़ डाला, कीमती मूर्तियां लूट लीं और हजारों पुजारियों को मौत के घाट उतार दिया. 1027 में उसने आखिरी बार भारत पर आक्रमण किया था. ऐसे खूंखार लुटेरे के नाम पर पाकिस्तान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल का नाम रखा है.

गजनवी मिसाइल का एक और नाम हत्फ 3 है. अरबी में हत्फ का मतलब खतरनाक होता है.

पाकिस्तान ने कैसे हासिल की गजनवी की टेक्नोलॉजी
पाकिस्तान पहले चीन से एम-11 मिसाइल टेक्नोलॉजी हासिल करना चाहता था. पाकिस्तान की प्रधानमंत्री रहते हुए बेनजीर भुट्टो ने चीन की एम-11 मिसाइल की टेक्नोलॉजी हासिल करने के लिए खूब लॉबिंग की, लेकिन अमेरिका के विरोध की वजह से उसे ये टेक्नोलॉजी हासिल नहीं हो पाई. जब पाकिस्तान चीन से एम-11 हासिल नहीं कर सका तो नब्बे के दशक में उसने गजनवी पर काम करना शुरू किया.

पाकिस्तान के गजनवी और अब्दाली मिसाइल की टेक्नोलॉजी चीन की एम-11 मिसाइल की टेक्नोलॉजी की तरह ही है. दरअसल चीन ने ही चोरी छिपे पाकिस्तान को बैलिस्टिक मिसाइल टेक्नोलॉजी दी. हालांकि पाकिस्तान दावा करता है कि उसने स्वदेशी तौर पर ये मिसाइल विकसित की है. 1995 में पाकिस्तान ने इसके इंजन को बनाने में कामयाबी हासिल की और उसका सफल परीक्षण किया.

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पाकिस्तान का बैलेस्टिक मिसाइल शाहीन


पाकिस्तान ने कई बार किया गजनवी का परीक्षण
पाकिस्तान ने सबसे पहले 26 मई 2002 को अपने मिलिट्री बेस से इसका परीक्षण किया. पाकिस्तान ने इसके सफल रहने का दावा किया. इसके बाद 3 अक्टूबर 2003 को पाकिस्तान ने फिर से इस मिसाइल का परीक्षण किया. कहां से परीक्षण किया गया इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई. लेकिन पाकिस्तान ने दावा किया कि बैलिस्टिक मिसाइल ने करीब 290 किलोमीटर दूर के अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदने में कामयाब रही.

इसके बाद मार्च 2004 में इसे पाकिस्तानी सेना में शामिल कर लिया गया. इस बैलिस्टिक मिसाइल को खास तौर से भारत के लिए खतरा बताया जाता है.

8 दिसंबर 2004 को पाकिस्तान ने इसका तीसरा परीक्षण किया. इसके बाद दिसबंर 2006, फरवरी 2008 और मई 2010 में भी इसका परीक्षण किया. मई 2012 में पाकिस्तानी सेना की ट्रेनिंग एक्सरसाइज के दौरान इस मिसाइल का परीक्षण हुआ.

भारत के सामने कहां ठहरती हैं पाकिस्तान की मिसाइल
भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइल हैं. दोनों देशों के बैलिस्टिक मिसाइल न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम हैं. भारत के पास नौ तरह की बैलिस्टिक मिसाइल हैं. इसमें अग्नि-3 की क्षमता सबसे अधिक है. अग्नि-3 मिसाइल की रेंज 3 हजार किलोमीटर से लेकर 5 हजार किलोमीटर तक की है.

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भारत का लंबी दूरी वाला बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-3


वहीं पाकिस्तान की मिसाइल टेक्नोलॉजी पूरी तरह से चीन की मदद पर आधारित है. पाकिस्तान के पास मध्यम दूरी तक मार करने वाले बैलिस्टिक मिसाइल हैं. शाहीन-2 पाकिस्तान की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है. इसकी रेंज करीब 2 हजार किलोमीटर है.

एक आंकड़े के मुताबिक भारत के 130 से 140 न्यूक्लियर वॉर हेड की तुलना में पाकिस्तान के पास 140 से 150 न्यूक्लियर वॉर हेड हैं.

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First published: August 29, 2019, 12:06 PM IST
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