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Explained: जानिए, आखिर कितना कर्ज है पाकिस्तान पर

Explained: जानिए, आखिर कितना कर्ज है पाकिस्तान पर

कुल कर्ज में इमरान सरकार का योगदान लगभग 46 फीसदी है- सांकेतिक फोटो (flickr)

कुल कर्ज में इमरान सरकार का योगदान लगभग 46 फीसदी है- सांकेतिक फोटो (flickr)

कुल कर्ज को पाकिस्तान (Pakistan total debt) की 21.66 करोड़ की आबादी में बराबर बांटा जाए तो वहां के हरेक नागरिक पर कुल 1 लाख 75 हजार रुपयों का कर्ज है.

    आर्थिक बदहाली झेल रहे पाकिस्तान पर अब एक और तलवार लटक रही है. दरअसल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान से कर्ज के 1 अरब डॉलर तुरंत लौटाने की मांग की है. इससे पहले सऊदी अरब ने भी पाकिस्तान से अपने पैसे लौटाने को कहा था, तब चीन ने पाकिस्तान की मदद की थी. पाकिस्तान के साथ इमरान सरकार के समय में ये सामान्य बात हो गई है कि वो एक देश का कर्ज चुकाने के लिए दूसरे देश की मदद ले रहा है.

    पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह से नाकाम
    साल 2019 के 31 दिसंबर तक पाकिस्तान पर लगभग 40.94 ट्रिलियन रुपयों का कर्ज हो चुका था. ये बढ़ते हुए अब लगभग 45 ट्रिलियन रुपए हो चुका. ये खुलासा सेंट्रल बैंक ऑफ पाकिस्तान ने किया था. खुद पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट इसका संकेत देती है. हाल ही में संसद में सरकार ने इस बात की जानकारी दी कि देश पर कुल कर्ज की जानकारी दी. इसे अगर पाकिस्तान की 21.66 करोड़ की आबादी में बराबर बांटा जाए तो हरेक पाकिस्तानी नागरिक पर कुल 1 लाख 75 हजार रुपयों का कर्ज है.

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    हरेक पाकिस्तानी नागरिक पर कुल 1 लाख 75 हजार रुपयों का कर्ज है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    इमरान सरकार के दौरान कितना बढ़ा कर्ज 
    पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस कर्ज में इमरान सरकार का योगदान 46 फीसदी है, यानी कुल कर्ज में 46 फीसदी कर्ज केवल इसी सरकार के कार्यकाल में बढ़ा. इससे पहले भी पाकिस्तान के हालात खास बेहतर नहीं थे लेकिन बीते सालों में ये और खस्ता हो गया. इसकी एक वजह कोरोना संक्रमण को भी माना जा रहा है. हालांकि पाकिस्तान में गरीबी का हवाला देते हुए और देशों की तुलना में बहुत कम समय के लिए लॉकडाउन लगा लेकिन तब भी इसका असर अर्थव्यवस्था पर हुआ.

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    अब सरकार अपने ही देश में घिर रही है
    खुद वहां के वित्त मंत्रालय ने ये स्वीकार किया कि सरकार ने राजकोषीय जिम्मेदारी और ऋण सीमा (FRDL) अधिनियम का उल्लंघन किया है. ये अधिनियम साल 2005 में पारित किया गया था. इस कानून के तहत सरकार का राजकोषीय घाटा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का 4 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए. जबकि इमरान सरकार के दौरान ये घाटा जीडीपी का 8.6 फीसदी रहा जो कि दोगुने से भी अधिक है.

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    आर्थिक बदहाली की एक वजह कोरोना संक्रमण को भी माना जा रहा है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    नहीं दी जा रही पूरी जानकारी 
    राजकोषीय पॉलिसी के तहत अधिकारियों को ये आदेश रहता है कि अगर कर्ज सिर से ऊपर जाने लगे तो तुरंत जनता को भी इसकी जानकारी दी जाए ताकि वे इकनॉमी में सुधार के लिए अपने स्तर पर कोशिश कर सकें. हालांकि मौजूदा सरकार ने इस बात की जानकारी देने से भी परहेज किया और काफी संक्षिप्त रिपोर्ट संसद में पेश की गई. द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक रिपोर्ट में से ज्यादातर आंकड़े गायब थे कि कर्ज क्यों लिया गया और अब तक वो चुकाया क्यों नहीं गया.

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    बीते सालों में कर्ज कितना बढ़ा
    अब एक बार ये भी समझ लेते हैं कि इमरान सरकार से पहले पाकिस्तान पर कुल कितना कर्ज था. साल 2018 के मध्य में पाकिस्तान का कुल कर्ज 24.9 ट्रिलियन रुपए था. इसे आबादी में प्रति व्यक्ति बांटें तो ये लगभग 1 लाख 20 हजार रुपए होता है. ये कर्ज बीते दो सालों में बढ़कर प्रति व्यक्ति 1 लाख 75 हजार रुपए हो चुका.

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    कर्जदाता देश लगातार कर्ज वापसी की मांग करने लगे हैं - सांकेतिक फोटो (pixabay)


    नीलामी तक जा चुकी है हालत
    हालात ये हैं कि देश लगातार अपने कर्ज का तगादा करने लगे हैं और दबाव बढ़ने पर उनका कर्ज चुकाने को पाक सरकार किसी और देश या संस्था से ऋण ले रही है. हाल ही में बात विदेशों में मौजूद पाकिस्तानी प्रॉपर्टी की नीलामी तक पहुंच गई थी. दरअसल पाकिस्तान ने अपने यहां की सोने की खदानों में खनन के लिए दूसरे देशों की खनन कंपनियों से एग्रीमेंट किया था लेकिन बाद में पाकिस्तान का मन बदल गया और उसने मियाद पूरी होने से पहले ही समझौता रद्द कर दिया. इसपर कंपनियों ने कोर्ट केस कर दिया. पाकिस्तान वो केस हार चुका है.

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    लटक रही है तलवार
    कोर्ट खनन कंपनियों के नुकसान को भरने के लिए पाकिस्तान को पैसे चुकाने को कह रहे हैं. ये हर्जाना 8.5 अरब डॉलर का है. अगर पाकिस्तान ये नहीं कर सका तो विदेशों में मौजूद उसके आलीशान होटल आदि नीलाम हो सकते हैं. नीलामी को रोकने के लिए इमरान सरकार को काफी जोर लगाना होगा या फिर अदालत की तय की हुई जुर्माना राशि देनी होगी. फिलहाल इमरान सरकार की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब है. इसपर जुर्माना राशि भी पाकिस्तान की कुल GDP का लगभग 2 प्रतिशत है.

    Tags: Debt investments, Imran khan, Imran Khan Government, Pakistan

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