पाकिस्तान मूल के जाहिद कुरैशी, जो अमेरिका में पहले मुस्लिम फेडरल जज होंगे

जाहिद कुरैशी और जो बाइडेन

जाहिद कुरैशी और जो बाइडेन

पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने 'अमेरिका फर्स्ट' के नारे के साथ अश्वेतों और गैर अमेरिकी मूल के लोगों को तवज्जो नहीं दी, तो अब बाइडेन प्रशासन (Joe Biden Administration) इस पॉलिटिक्स को तोड़ने के लिए भरपूर कोशिश कर रहा है.

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अमेरिका के कोर्ट सिस्टम (US Court System) में फेडरल जजशिप (Federal Judgeship) के लिए राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने जिन 11 चेहरों को नामांकित किया है, उनमें से एक नाम ज़ाहिद कुरैशी का है, जो पाकिस्तान मूल के हैं. अगर उनके नाम पर मुहर लगती है तो अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा कि कोई मुस्लिम फेडरल जज के ओहदे पर पहुंचेगा. पाकिस्तान के लिए भी यह गर्व का मौका है, तो एशिया के लिए भी. यह भी उल्लेखनीय बात रही है कि बाइडेन की टीम (Team Biden) में एशियाई और अश्वेतों को खासा प्रतिनिधित्व मिला है. इस बीच आपको बताते हैं कि कुरैशी यहां तक कैसे पहुंचे.

सीनेटर कोरी बुकर ने कहा कि जज कुरैशी अमेरिका के लिए कई भूमिकाएं कुशलता से निभाते रहे हैं और अगर उनका नाम फाइनल हो जाता है, तो अमेरिका में वो इतिहास रच देंगे. इन तमाम भूमिकाओं के बारे में आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले जानिए कि इस नॉमिनेशन का अर्थ क्या है.

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क्या है बाइडेन के नामांकन में खास?
वास्तव में फेडरल जजशिप के लिए जो 11 नामांकन किए गए हैं, उनमें से 9 महिलाएं हैं और सिर्फ दो पुरुष. इसमें भी दिलचस्प बात यह है कि किसी भी 'व्हाइट' यानी श्वेत नस्ल के जज को नामांकित नहीं किया गया है. कहा जा रहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चार साल के कार्यकाल के दौरान पुरुषवादी और कंज़र्वेटिव तबके को कोर्ट सिस्टम में बढ़ावा दिया था. इस प्रवृत्ति को बदलने के लिए बाइडेन ने आक्रामक रवैया अपनाया.

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रटगर्स से डिग्री लेने वाले कुरैशी के बारे में जानकारी इस संस्था के पोर्टल पर मौजूद है.


इससे पहले भी कई एशियाई और अफ्रीकी या अश्वेत चेहरों को अपनी टीम में जगह देने के लिए चर्चित रह चुके बाइडेन ने इन नामांकनों को लेकर भी विविधता को बढ़ावा देकर देश की एकता को मज़बूत करने की बात कही.



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कौन हैं ज़ाहिद कुरैशी?

पाकिस्तान मूल से ताल्लुक रखने वाले कुरैशी का जन्म न्यूयॉर्क में ही हुआ था और उनकी परवरिश न्यूजर्सी में हुई. उनके माता पिता शाहिदा और डॉ. निसार कुरैशी पाकिस्तान से अमेरिका जाकर बसे थे और तबसे वहीं रहे. कुरैशी ने 1997 में ग्रैजुएशन करने के बाद ज्यूरी में डॉक्टर की डिग्री रटगर लॉ स्कूल से 2000 में हासिल की थी.

कैसा रहा कुरैशी का करियर?

उल्टे क्रम में देखें तो साल 2019 में न्यूजर्सी में कुरैशी को मजिस्ट्रेट जज के तौर पर नियुक्ति मिली थी. इस ओहदे को फेडरल जज के तौर पर समझा ज़रूर जाता है और कह भी दिया जाता है लेकिन यह तकनीकी तौर पर पेचीदा मसला है. अव्वल तो यह नियुक्ति अमेरिकी प्रेसिडेंट नहीं करता इसलिए फेडरल जजशिप से यह पद अलग होता है.

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दूसरी खास बात यह है कि अमेरिका के संविधान में इस पद का उल्लेख नहीं है इसलिए जिला कोर्ट या सर्किट जज की तरह फेडरल बेंच के मेम्बर के तौर पर बताए जाने वाले इस पद को नहीं माना जा सकता. खबरों की मानें तो अमेरिकी सिस्टम के मुताबिक मजिस्ट्रेट जजों को कुछ मामले असाइन किए जाते हैं.

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अमेरिका के फेडरल न्यायिक सेंटर की इमारत की तस्वीर विकिकॉमन्स से साभार.


मिलिट्री से भी रहा है नाता

कुरैशी के करियर में मिलिट्री के भीतर सेवाएं देना एक खास अनुभव रहा है. आर्मी में जेएजी कॉर्प्स के लिए वो मिलिट्री प्रॉसिक्यूटर रहे थे. और करियर के शुरूआती सालों 2004 व 2006 में उन्हें इराक में भी नियुक्ति मिली थी. रटगर के पोर्टल पर दी गई सूचनाओं के मुताबिक इसके बाद कुरैशी ने होमलैंड सुरक्षा विभाग में काम किया और फिर फेडरल प्रॉसीक्यूटर के तौर पर सेवाएं दीं.

अवॉर्ड्स और कीर्तिमान

खबरों के मुताबिक कुछ ही साल पहले बाइडेन ने ही कुरैशी को सेवाओं के लिए सम्मानित किया था. मिलिट्री में खास सेवा के लिए ब्रॉंज़ मेडल भी कुरैशी हासिल कर चुके थे. इसके अलावा, 2019 में कुरैशी पहले एशियाई मूल के अमेरिकी थे, जिन्हें फेडरल बेंच में पद मिला था. प्रोफेशनल अचीवमेंट और स्टैंडिंग ओवेशन जैसे अवॉर्ड भी उन्हें मिल चुके हैं.

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न्यूजर्सी की फेडरल बार एसोसिएशन के सलाहकार मंडल में भी कुरैशी शामिल हैं और कानून के स्टूडेंट्स के लिए कभी कभी लेक्चर भी दिया करते हैं. यह भी गौरतलब है कि व्हाइट कॉलर क्रिमिनल डिफेंस और जांच संबंधी मामलों में कुरैशी खास भूमिका निभा चुके हैं.
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