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कौन हैं पंकजा मुंडे, जिनके बागी तेवरों से BJP को हो सकती है दिक्कत

पंकजा मुंडे ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर समर्थकों को बुलाया है

पंकजा मुंडे ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर समर्थकों को बुलाया है

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता पंकजा मुंडे (Pankaja Munde) ने अपने ट्विटर (Twitter) हैंडल से बीजेपी (BJP) शब्द हटा लिया है. पहले उनकी प्रोफाइल का यूजरनेम पंकजा मुंडे बीजेपी था, लेकिन अब सिर्फ @Pankajamunde ही लिखा दिख रहा है. कयास है कि ये पार्टी से दूरी बनाए जाने का संकेत है. पिता की बरसी पर वे कुछ बड़ा एलान कर सकती हैं.

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    बीजेपी की फायरब्रांड लीडर और महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे राज्य में पार्टी की हार के बाद से देवेंद्र फडनवीस के खिलाफ लगातार अपना गुस्सा जाहिर कर रही हैं. पंकजा मराठावाड़ा सीट पर धनंजय मुंडे से 30000 वोटों से विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं. धनंजय मुंडे पंकजा के चचेरे भाई हैं, जो उद्धव सरकार के साथ हैं. हार के बाद शनिवार, 30 नवंबर को पंकजा ने एक फेसबुक पोस्ट किया, जो एक तरह से संकेत है कि वो अब चुप नहीं रहेंगी. पंकजा का आरोप है कि फडनवीस सरकार ने अपने शासन के दौरान पार्टी से ओबीसी नेताओं का लगभग खात्मा कर दिया. जानिए, कौन हैं पंकजा मुंडे जो इतना खुलकर पूर्व सीएम पर आरोप लगा रही हैं.

    बीजेपी की फायरब्रांड नेता पंकजा राजनैतिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती हैं. 26 जुलाई 1979 को महाराष्ट्र के परली में जन्मी पंकजा स्व गोपीनाथ मुंडे की पुत्री और स्व प्रमोद महाजन की भतीजी हैं. महज 40 साल की उम्र में पंकजा ने समाजसेवा से लेकर राजनीति का अहम पड़ाव तय किया. राजनीति में आने से पहले वे गैर सरकारी संगठनों के साथ काम किया करती थीं. राजनीति में आने के बाद वे पिता की वजह से जल्दी ही काफी लोकप्रिय हो गईं और बीजेपी के युवा विंग, भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष के तौर पर काम करने लगीं.

    अक्टूबर 2014 में पंकजा ने महाराष्ट्र कैबिनेट मंत्री के रूप में तौर पर नामित किया गया. हालांकि बाद के वक्त में खुद उनके चुनावी क्षेत्र में उनके खिलाफ गुस्सा उमड़ने लगा. मराठवाड़ा में पानी की भीषण तंगी के बीच पंकजा जातीं और तीन तलाक जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करतीं. माना जा रहा है कि स्थानीय दिक्कतों पर ध्यान न देना ही पंकजा की हार की वजह बना. वहीं पंकजा इसका दोष फडनवीस को दे रही हैं कि किस तरह से उन्होंने ओबीसी नेताओं को मुख्यधारा से अलग कर दिया.


     

    अपनी सीट पर शिकस्त झेल चुकी पंकजा ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने 12 दिसंबर को अपने समर्थकों से बीड पहुंचने की अपील की. बता दें कि इस दिन गोपीनाथ मुंडे की जयंती है. इस पोस्ट के बाद से पार्टी में खलबलाहट है कि पंकजा उस दिन क्या कहने या करने वाली हैं. पोस्ट से पहले ही पंकजा ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और उन्होंने बताया कि उन्हें चुनाव हरवाया गया है. बताया जा रहा है कि पंकजा ने नेताओं को इस बात का सबूत देने की बात भी कही. अब ये कयास भी लग रहे हैं कि क्या बंद कमरे में कही गई बात पंकजा अब खुलकर कहने वाली हैं.

    पोस्ट मराठी में लिखी गई है, जिसके मायने ये हैं कि राज्य में बदलते हुए हालातों को देखते हुए फैसला लेने की जरूरत है. मुझे आत्ममंथन के लिए 8-10 दिन चाहिए. मौजूदा बदलावों को देखना और आगे के लिए सोचना होगा. अब क्या करना है, कौन सा रास्ता चुनना है? हम लोगों को क्या दे सकते हैं? लोगों को क्या चाहिए? हमारी ताकत क्या है? मैं ये सबकुछ सोचूंगी और 12 दिसंबर को आऊंगी. मुझे उम्मीद है कि मेरे 'जवान' रैली में जरूर पहुंचेंगे.

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