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क्या वाकई किसी घोर अनिष्ट का संकेत है पुच्छल तारे का पृथ्वी के पास से गुजरना?

प्रचलित मत है कि हमारी पृथ्वी पर पानी पुच्छल तारे  से आया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर))

प्रचलित मत है कि हमारी पृथ्वी पर पानी पुच्छल तारे से आया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर))

मई के महीने में पुच्छल तारा (Comet) पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है. ऐसे में कुछ लोग इस कोरोना संकट (Corona virus) से जोड़ कर देख रहे हैं. इसमें कितनी सच्चाई है.

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नई दिल्ली:  जीवन में किसी अनिष्ट के होने का दोष सितारों के सर मढ़ देने कोई नई बात नहीं हैं. रात में आकाश में होने वाली असामान्य गतिविधि को धरती पर किसी होने वाली दुर्घटना की आशंका से जोड़ शायद सभ्यता के जन्म से भी पहले की बात है. इसमें शामिल है पृथ्वी की पास धूमकेतु या पुच्छल तारे (Comet) का गुजरना. हाल ही में धरती के पास गुजरने वाले पुच्छल तारे का कोरोना संबंध जोड़ा जा रहा है.

कोरोना संकट और पुच्छल तारे का गुजरना कितना संयोग
इन दिनों पूरी पृथ्वी कोरोना संकट का सामना कर रही है. इसी दौरान अंतरिक्ष में पुच्छल तारे के पास से गुजरने की भी खबरें हैं. ऐसे में कई लोगों का यह सोचना है कि कोरोना संकट का पुच्छल तारे के गुजरने से संबंध है. कई लोगों का लगने लगा है कि पुच्छल तारे ही इस तरह की आपदा लाते हैं.

किस तरह लेते हैं पुच्छल तारे के आगमन को लोग
क्या वाकई धूमकेतु का पृथ्वी के पास से गुजरने से पृथ्वी पर कोई असर होता है. यह वैज्ञानिकों तक के लिए शोध का विषय रहा है. लेकिन ज्यादातर लोग आज भी इस खगोलीय घटना को धरती पर होने वाले किसी अनिष्ट की आशंका से जोड़ते हैं.

कई तरह से देखा जाता है प्रभाव
एक पुच्छल तारे का पृथ्वी के पास से गुजरने का प्रभाव कई तरह से देखा जाता है. कुछ अंधविश्वास, कुछ ज्योतिषीय विश्लेषण, कुछ प्राकृतिक घटनाओं का पुच्छल तारे से वैज्ञानिक विश्लेषण, और वैज्ञानिक शोध, सभी कुछ इसमें शामिल किए जा सकते हैं.

Comet
पिछले महीने ही पृथ्वी के पास आने से पहले ही एक पुच्छल तारा बिखर गया था.


क्यों डराते हैं पुच्छल तारे
हम यहां उस स्थिति की बात नहीं कर रहे हैं जब कोई पुच्छल तारा पृथ्वी से टकराएगा. लेकिन यह सच है कि जब भी पुच्छल तारा पृथ्वी के नजदीक आता है तो लोगों में स्वाभाविक तौर पर यह डर बैठ जाता है कि कि वह पुच्छल तारा पृथ्वी से टकरा जाएगा. इसका एक कारण यह भी होता है कि उस पुच्छल तारे पर सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव  बढ़ने लगता है क्योंकि वह पृथ्वी ही नहीं बल्कि सूर्य के भी निकट आ रहा होता है. सूर्य के पास आने से उसकी पूंछ लंबी होने लगती है और पास आने के कारण उसका आकार बढ़ता दिखने लगता है जो लोगों में डर पैदा करता है.

तो क्या होता है पृथ्वी के पास से निकलने पर
जब पुच्छल तारा पृथ्वी के पास से गुजरता है तो अपने पीछे वह एक गैस और धूल का गुबार छोड़ कर जा सकता है. लेकिन यह जरूरी नहीं है क्योंकि यह पुच्छल तारे के आकार, उससे पृथ्वी की दूरी और पृथ्वी की तुलना में उसकी पूंछ की दिशा जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है. गैस और धूल के कणों का गुबार उल्का पिंड का रूप लेकर पृथ्वी की ओर गिर सकते हैं और उल्कापिंड की धरती की सतह तक पहुंचने पर संभावना बहुत ही ज्यादा कम होती है. हां उल्कापिंड या उल्कावर्षा को देखकर लोग फिर कोई धारणा जरूर बना लेते हैं.  यह उल्कावर्षा क्षुद्रग्रह के पृथ्वी का पास से निकलने से भी हो सकती है. विज्ञान फंतासी में हमेशा ही पुच्छल तारे को किसी न किसी अनिष्ट से जोड़कर दिखाया गया है.

क्या अनिष्ट घटनाएं हुई हैं पुच्छल तारे के गुजरने पर
साल 684 में जब हेली पुच्छल तारा पृथ्वी के पास गुजरा था तब तीन महीने की बारिश हुई थी और ब्लैकडेथ नाम की महामारी हुई थी.  इसके बाद 1066 में हेली पुच्छल तारे के गुजरने का इंग्लैंड के सम्राट होराल्ड द्वितीय की हास्टिंग युद्ध में मौत से संबंध जोड़ा गया था. यहां तक कि 1910 में भी अफवाह उड़ी कि हेली पुच्छल तारा धरती पर जहरीली गैस छोड़ कर जाएगा , लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

तो क्या वाकई अनिष्ट होता है ऐसे में
बेशक नहीं. कम से कम इतिहास तो यही कहता है. अनचाही घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन पुच्छल तारे के पास से भी गुजरने से ही कोई निश्चित तरह की घटना होती ही हो ऐसा नहीं पाया गया. लेकिन फिर भी कई बार इसे बाढ़, ओलावृष्टि, भूकंप, तूफान आदि जैसी घटनों से भी जोड़ने की कोशिश की गई लेकिन इनमें कोई नियमित और निश्चित संबंध नहीं पाया गया. इस समय का कोरोना संकट वाकई बहुत बड़ा है इस लिहाज से तो बहुत ही बड़ा पुच्छल तारा पृथ्वी के पहुत ही पास से गुजरना चाहिए, लेकिन ऐसा तो हो नहीं रहा.

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