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विलासिता-प्रिय वो राजा, जिसके महल में सैकड़ों रानियों के नाम पर जलती थीं सैकड़ों लालटेन

पटियाला रियासत के महाराज भूपिंदर सिंह

पटियाला रियासत के महाराज भूपिंदर सिंह

पटियाला महाराज भूपिंदर सिंह (Bhupinder Singh, Patiyala) पर लिखी किताब महाराजा (Maharaja) में बताया गया है कि उनके महल म ...अधिक पढ़ें

    देश-दुनिया में राजे-महाराजे की सनक और रंगीनमिजाजी के किस्से भरे पड़े हैं. हमारे यहां भी विलासिता-पसंद ऐसे शासक रहे हैं. मिसाल के तौर पर एक नाम है पटियाला रियासत के महाराज का. भूपिंदर सिंह (Bhupinder Singh) पर उनके दीवान जरमनी दास (Jarmani Dass) ने एक किताब लिखी. महाराजा (Maharaja) नाम की इस किताब में उनकी रंगीनमिजाजी और सनक दोनों का ही जिक्र है.

    लगभग 4 दशक तक किया राज 
    महाराज रजिंदर सिंह की मौत के बाद महज 9 साल की उम्र में ही भूपिंदर सिंह के पास पटियाला रियासत की बागडोर आ गई. हालांकि औपचारिक तौर पर उन्होंने राज्य की कमान 18 साल की उम्र में ली और अगले 38 सालों तक राज्य किया. इस दौरान महाराज की रंगीन मिजाजी के किस्से लगातार सामने आते रहे. उनकी रियासत के दीवान जरमनी दास ने ये वक्त करीब से देखा और महाराज भूपिंदर सिंह के जीवन पर एक किताब भी लिखी. वैसे इस किताब पर काफी विवाद रहे हैं लेकिन इसमें लगभग सारे ही लोग एकमत रहे कि महाराज भव्य और विलासिता-भरा जीवन जीते रहे.

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    सैकड़ों महिलाओं से जुड़े थे 
    स्कूपवूप में महाराजा किताब के हवाले से कहा गया है कि राजा की 5 पत्नियां थीं, जिनके अलावा 300 से ज्यादा दूसरी महिलाएं भी रानी की हैसियत से महाराज से मिला करती थीं. इन 5 पत्नियों के उन्हें कुल 82 बच्चे हुए, जिनमें के 53 बच्चे जीवित रहे. वैसे रानियों की कुल संख्या पर भी विवाद है. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि राजा की 10 ऑफिशियल रानियां थी.

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    महाराजा भूपिंदर सिंह पर उनके दीवान जरमनी दास ने एक किताब लिखी


    रानियों की सुंदरता बनाए रखने के जतन 
    महाराज ने रानियों के लिए पटियाला में एक से बढ़कर एक भव्य महल बनवाए थे. इन महलों में भोग-विलास की सारी सुविधा होती. यहां तक कि उस जमाने में भी, जब सेहत के लिए लोग खास जागरुक नहीं थे, महाराज ने रानियों की रुटीन जांच और सेहत के दूसरे मामलों पर नजर रखने के लिए भी देशी-विदेशी डॉक्टरों की एक टीम तैनात कर रखी थी. ये टीम लगातार देखती रहती कि रानियां स्वस्थ रहें. इसके साथ ही रानियों की हेयर स्टाइल से लेकर नाक-नक्श तक आधुनिक और खूबसूरत रहें, इसके लिए महाराज विदेशी हेयर ड्रेसरों और यहां तक कि प्लास्टिक सर्जनों की भी मदद लिया करते.

    इसलिए जलती थी लालटेन
    जिस राजा की इतनी सारी रानियां हों, वो अपनी शामें किसके साथ गुजारेगा, इसपर शुरुआत में रानियों के बीच हल्की तकरार हुई. लेकिन जल्दी ही महाराज भूपिंदर सिंह ने इसका रास्ता निकाल लिया. जरमनी दास के मुताबिक राजा के महल में रोज 365 लालटेन जला करतीं और हरेक पर एक रानी का नाम होता. जो लालटेन सबसे पहले बुझ जाए, राजा अगली शाम और रात उसी रानी के साथ बिताता था. लालटेन को देखने के लिए भी लोगों की तैनाती हुई थी ताकि वे बता सकें कि कौन सी लालटेन सबसे पहले बुझी है.

    पूल पार्टी का भी उल्लेख 
    महाराजा किताब में जरमनी दास ने भूपिंदर सिंह की एक खास पार्टी का जिक्र किया है. महल में एक पूल के चारों ओर पार्टी हुआ करती, जिसमें राजा के खास लोगों और उनकी रानियों को आने दिया जाता. इस दौरान राजा अपनी रानियों के साथ पूल में वक्त बिताया करता. किताब के मुताबिक खुद दीवान जरमनी दास ऐसी पार्टी का हिस्सा रहे थे. महल का एक कमरा प्रेम मंदिर कहलाता था, जहां राजा की इजाजत के बगैर कोई भीतर नहीं जा सकता था.

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    महाराजा किताब में जरमनी दास ने भूपिंदर सिंह की एक खास पार्टी का जिक्र किया है


    हीरों का हार पहन राजा करते थे परेड
    राजा के बारे में अजीबोगरीब चीजों से कई किताबें भरी पड़ी हैं, हालांकि इन बातों की सत्यता की जांच नहीं हो सकी. ऐसी ही एक किताब Freedom at Midnight में भी राजा का जिक्र है. लेखक Dominique Lapierre और Larry Collins ने इसमें एक वार्षिक परंपरा के बारे में लिखा है कि कैसे राजा साल में एक बार बिना कपड़ों के सिर्फ हीरों का एक हार पहनकर परेड करते. लोग इस दौरान उनकी जय-जयकार करते और मानते थे कि महाराज की ताकत ही लोगों को बुरी ताकतों से बचाए रख सकती है.

    राजा का ऐश्वर्य भी काफी रहा
    साल 1926 में उन्होंने दुनियाभर के कीमती हीरे-जवाहरात से भरी पेटी कार्टियर (Cartier) ज्वेलर्स को भेजी, जिसने पटियाला हार बनाया. ये दुनिया के सबसे कीमती आभूषणों में से एक था, जिसकी कीमत 25 मिलियन डॉलर मानी जाती है. इस हार में दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हीरा जड़ा हुआ था. राजा उसे खूब शान से पहना करते. बाद में हार गायब हो गया और फिर अलग-अलग हिस्सों में मिलता रहा. उसे गायब करने वाले का कभी पता नहीं लग सका.

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    हिटलर-कनेक्शन के बारे में कम ही लोग जानते हैं
    चेंबर ऑफ प्रिंसेज के सदस्य होने के कारण उनका भारत के अलावा यूरोप में भी काफी दबदबा था और कई यूरोपियन देशों के राजाओं से दोस्ती भी थी. जब महाराज साल 1935 में जर्मनी गए तब हिटलर ने उन्हें Maybach कार तोहफे में दी. The Automobiles of the Maharajas नामक किताब में इस आलीशान कार का भी जिक्र है जो अब किसी अज्ञात शख्स को नीलामी में बेची जा चुकी है.

    Tags: Art and Culture, Patiala, Punjab and haryana, Research

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