तानाशाह Kim Jong अकेले नहीं, इन देशों में भी पढ़ाए जाते है लीडरों की बहादुरी के झूठे किस्से

चीन में माओ जेडांग के अलावा कन्फ्यूशियस के बारे में भी पढ़ना अनिवार्य है (Photo-needpix)
चीन में माओ जेडांग के अलावा कन्फ्यूशियस के बारे में भी पढ़ना अनिवार्य है (Photo-needpix)

सिलेबस में बताया जाएगा कि किम जोंग (Kim Jong Un) महज 5 साल की उम्र में जहाज चलाने लगे थे. यही नहीं, वे इसी उम्र से अचूक निशानेबाज थे और आमने-सामने की लड़ाई में बड़े योद्धा को हरा सकते थे.

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  • Last Updated: September 19, 2020, 10:53 AM IST
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नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग (Kim Jong Un in North Korea) उन लगातार अपने सनकी फरमानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने आदेश दिया कि प्री-स्कूल के बच्चों को पूरे डेढ़ घंटे तक किम के जांबाज कारनामे ही पढ़ने होंगे ताकि वे आगे चलकर देश और किम परिवार के वफादार बन सकें. वैसे कम्युनिस्ट देशों में लीडर को भगवान मानने और स्कूल-कॉलेजों में उनका गुणगान पढ़ाया जाना कोई नई बात नहीं. चीन के स्कूलों में भी यही होता है. वहां तो कोर्स के साथ-साथ नाटकों और गीतों के जरिए माओ जेडांग और दूसरे नेताओं के गुणगान होते हैं. जानिए, किस तरह से कम्युनिस्ट देश के नेता खुद को भगवान बनाने के लिए कोर्स डिजाइन करा रहे हैं.

सबसे पहले तो ताजा मामला देखते हैं
दरअसल अगस्त में ही नॉर्थ कोरिया में एक कानून बना, जिसके तहत प्री-स्कूल यानी नर्सरी और किंडर गार्टन के बच्चों को किम जोंग उन की बहादुरी के बारे में पढ़ना अनिवार्य होगा. कोर्स में सिलेबस के इस हिस्से को ग्रेटनेस एजुकेशन कहा जा रहा है. इसके तहत न सिर्फ किम जोंग उन, बल्कि उनके पिता और दादा की महानता के पाठ भी पढ़ाए जाएंगे.

नॉर्थ कोरिया में बच्चों को किम जोंग उन की बहादुरी के बारे में पढ़ना होगा (Photo-needpix)

झूठे किस्सों की भरमार


तीनों के बारे में लगभग 30-30 मिनट तक चर्चा होगी. इसमें पढ़ाई जाने वाली बातें कितनी हवा-हवाई होंगी, इसका अंदाजा लगाना आसान है, अगर आप ये जानें कि किम जोंग उन महज 5 साल की उम्र में बड़ा जहाज चलाने लगे थे. यही नहीं, वे इसी उम्र से अचूक निशानेबाज थे और आमने-सामने की लड़ाई में बड़े योद्धा को हरा सकते थे.

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पहले आधे घंटे होता था गुणगान
बता दें कि इससे पहले भी सिलेबस में ये सब शुमार था लेकिन तब इसे केवल 30 मिनट पढ़ाया जाना था. अब यही समय डेढ़ घंटे हो गया. अब इसके साथ मुश्किल ये आ रही है कि प्री-स्कूल के बच्चों की पढ़ाई का कुल समय ही तीन घंटे होता है. ऐसे में अगर डेढ़ घंटे सिर्फ ग्रेटनेस एजुकेशन को दिए जाएं तो बचे हुए समय में बाकी विषय नहीं पढ़े जा सकेंगे.

कम्युनिस्ट मुल्कों में रही परंपरा
किम जोंग उन को इससे शायद ही फर्क पड़ता हो क्योंकि ऐसा कम्युनिस्ट देशों में अक्सर होता है. मिसाल के तौर पर चीन में भी यही परिपाटी चली आ रही है. वहां स्कूल के साथ कॉलेज तक में लीडरों की पूजा होती है और इसी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं, जिनमें हिस्सा लेना जरूरी है. चीन के किंडरगार्टन से लेकर यूनिवर्सिटी तक में इस तरह के नाटक और प्रोग्राम करवाए जाते हैं जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना और माओ जेडांग के गुण गाएं. साल के तीन हफ्तों तक हर जगह देशभक्ति के ही प्रोग्राम होते हैं. ये शी जिनपिंग के निर्देश पर चला कार्यक्रम है, जिसका मकसद देश के लिए वफादार पीढ़ियां तैयार करना है. ये हर स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई का अनिवार्य हिस्सा है.

चीन में स्कूल के साथ कॉलेज तक में लीडरों की पूजा होती है (Photo-pikist)


वफादार बनने की ट्रेनिंग
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक खुद पेरेंट्स मानते हैं कि बच्चे अगर देशप्रेम सीखेंगे तो ही वे अपने पेरेंट्स से भी प्यार कर सकेंगे. इसके लिए 5 साल की उम्र में ही बच्चों से एक प्ले करवाया जाता है- My Country Is a Garden. इस तरह के कई नाटक होते हैं. साथ ही बच्चों को उन जगहों का टूर करवाया जाता है, जहां जाकर उनमें देशभक्ति जागे. हाई स्कूल में किताबों में ही चीन का दर्शन सिखाए जाने की अनिवार्यता हो चुकी है. सरकार रिसर्च इंस्टीट्यूट को फंड करती है ताकि वे सोशलिज्म का सबक सिखा सकें. 30 यूनिवर्सिटीज में ये प्रोग्राम पूरे जोरों पर है.

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चीन, हांगकांग में भी लागू करेगा सिलेबस
हद तो ये है कि अब हांगकांग में भी चीन यही पाठ्यक्रम लागू करने जा रहा है. बता दें कि हाल के महीनों में हांगकांग में काफी बवाल हुआ था. दरअसल चीन ने जबर्दस्ती वहां विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया. इसपर हांगकांग में काफी प्रदर्शन भी हुए लेकिन आखिरकार चीन को अपने मकसद में कामयाबी मिली. अब चीन हांगकांग को भी वफादार बनाने के लिए उसे अपने तरीके से पढ़ाएगा. इसके तहत नेशनल सिक्योरिटी एजुकेशन (national security education) शुरू हो रहा है. चीन के सरकारी मीडिया शिन्हुआ समाचार एजेंसी में इस हवाले से खबर आई है.

चीन की सरकार को लगता है कि दशकों तक चले एजुकेशन के कारण अब जाकर देश के लिए वफादार पीढ़ी तैयार हुई (Photo-pikist)


प्रशासनिक पदों के लिए भी हो सकती है शुरुआत
इस नए सिलेबस के बारे में शी जिनपिंग के तहत काम करने वाले शिक्षा अधिकारी शेन चु्न्याओ ने कहा कि युवाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए ये जरूरी होगा. इसके तहत ये भी सिखाया जाएगा कि कैसे पश्चिमी देशों और खासकर अमेरिका ने चीन को हमेशा परेशान किया और आगे बढ़ने से रोका. वॉशिंगटन पोस्ट की एक खबर के मुताबिक चीन की सरकार को लगता है कि दशकों तक चले एजुकेशन के कारण अब जाकर देश के लिए वफादार पीढ़ी तैयार हुई है. अब यही तरीका वो अपने प्रशासनिक क्षेत्रों में भी आजमाएगी.

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रूस भी अलग नहीं
इसी तरह से रूस में भी देशभक्ति के पाठ के साथ व्लादिमीर लेनिन के बारे में पढ़ना अनिवार्य है. फिलहाल पुतिन ने इस सिलेबस में ज्यादा ही दखल दिया है. द मॉस्को टाइम्स के मुताबिक उन्होंने किशोर उम्र के लोगों को पेट्रिओटिक कैंप के जरिए री-एजुकेट करने का प्रस्ताव दिया. इसमें आर्मी के लोग ऐसे बच्चों को री-एजुकेट करेंगे, जिनका कथित तौर पर ब्रेनवॉश हो चुका है और जो रूस के नियम-कायदों पर सवाल उठाते हैं.
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