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पॉल एलन नहीं होते तो न माइक्रोसॉफ्ट होता और न कोई बिल गेट्स को जानता

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 16, 2018, 12:20 PM IST
पॉल एलन नहीं होते तो न माइक्रोसॉफ्ट होता और न कोई बिल गेट्स को जानता
पाल एलन (फाइल फोटो)

दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी खड़ी करने वाले एलन का 65 साल की उम्र में कैंसर से निधन हो गया,

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  • Last Updated: October 16, 2018, 12:20 PM IST
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पॉल एलन नहीं रहे. ये वही शख्स थे जिन्होंने बिल गेट्स के साथ मिलकर माइक्रोसॉफ्ट की नींव रखी थी. माइक्रोसॉफ्ट से अलग होने के बाद वो नई नई चीजों से जुड़े और कल्याणकारी कामों के साथ तकनीक और उद्यमिता में कदम बढ़ाते रहे. आज हम जिस माइक्रोसॉफ्ट को जानते हैं, उसके बारे में पॉल एलन के बगैर सोचा भी नहीं जा सकता है. दरअसल दुनिया के इस महान ब्रांड को गेट्स और एलन की महान दोस्ती की मिसाल कहा जाना चाहिए. ये जब ये दोस्ती टूटी तो कभी जुड़ नहीं सकी.

पॉल एलन 65 साल के थे. उन्हें लिंफोमा कैंसर की जटिलताओं के बाद बचाया नहीं सका. उनके निधन के बाद माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने कहा, अपने सबसे पुराने और प्रिय दोस्त के बिछुड़ने से मैं दुखी हूं. मेरा दिल टूट गया है. वहीं माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने कहा, पॉल सच्चे पार्टनर थे और बगैर उनके पर्सनल कंप्युटिंग की बात सोची भी नहीं जा सकती. उन्होंने गजब के प्रोडक्ट और संस्थान बनाए.

गेट्स और एलन की दोस्ती अगर नहीं होती तो माइक्रोसॉफ्ट इतना महान ब्रांड नहीं बन पाता. लेकिन समय की धारा ने दोनों को यूं दूर किया कि दोनों ने अलग रास्ते बना लिये. फिर कभी साथ मिलकर काम नहीं किया.



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एलन को भरोसा था कि पुराने दिन लौटेंगे
बिल गेट्स ने तो इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा लेकिन एलन हमेशा कहते थे कि उन्हें भरोसा है कि पुराने दिन लौटेंगे और उनका पुराना दोस्त भी उन्हें वापस मिल जाएगा. हालांकि समय की धारा में जो रेत फिसलती है वो फिर कहां वापस आ पाती है.

कुछ साल पहले माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक पॉल एलन ने एक संस्मरणानुमा किताब लिखी-आइडिया मैनः ए मोमोयर बाइ द को-फाउंडर ऑफ माइक्रोसाफ्ट. इस किताब में उन्होंने अपनी दोस्ती का जिंदगीनामा भी लिखा, शिकवे-शिकायतें भी जाहिर कीं और उम्मीदों का वो रास्ता भी देखने का प्रयास किया, जो उनकी पुरानी दोस्ती को फिर लौटा सकेगा.

माइक्रोसॉफ्ट से अलग होने के बाद पॉल एलेन ने कई वेंचर्स में धन निवेश किया


बचपन में जब मिले
एलन और गेट्स दोनों की पहली मुलाकात सिएटल के नामीगिरामी प्रेप स्कूल में हुई. फिर दोनों साथ साथ पढ़ते रहे. दोनों की कई बातें एक जैसी थीं. दोनों सपनों की दुनिया में रहते थे. दोनों का पढाई में कुछ खास मन नहीं लगता था.
दोनों के लिए स्कूल किसी सजा से कम नहीं थी. दोनों की दिलचस्पी पढाई से ज्यादा कंप्युटर में बढ़ रही थी, जो उस जमाने में धीरे धीरे जगह बना रहा था. दोनों ने चूंकि लंबे समय तक स्कूल में पढाई की थी, लिहाजा दोनों की बांडिंग भी बनी..साथ साथ घूमना फिरना .और भविष्य की योजनाएं बनाना.

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फिर कॉलेज से ड्रापआउट
एलन ने आगे की पढाई के लिए वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया तो गेट्स हार्वर्ड चले गए. लेकिन संपर्क बना हुआ था. अपनी किताब में एलन लिखते हैं कि मेरा इरादा कंप्युटर प्रोग्रामिंग में कुछ करने का पक्का होता जा रहा था जबकि गेट्स 13 साल की उम्र से ही बिजनेस के बारे में सोचने लगा था. एलन को यूनिवर्सिटी की दो साल की पढाई के बाद लगा कि वो समय बर्बाद कर रहे हैं. उन्होंने पढाई छोड़ी और कंप्युटर प्रोग्रामिंग लेंग्वेज पर काम में जुट गए. दोनों को लग रहा था कि कंप्युटर प्रोग्रामिंग में बिजनेस शुरू करने का ये सही समय है.

वर्ष 1981 में पर्सनल कंप्युटर को पेश करते हुए पॉल एलन और बिल गेट्स की तस्वीर


रातभर जागकर काम
आइडिया मैन में एलन लिखते हैं कि वो उन दिनों कंप्युटर लेंग्वेज बेसिक पर काम कर रहे थे. इसे पहली बार प्रदर्शित करना था. तब कई रात दोनों घंटों इस पर काम करते रहते थे. जब सारी तैयारियां हो गईं तो आखिरी रात गेट्स सारी रात एलन के साथ जागते रहे. दोनों कुछ कुछ रोमांचित थे. ये सुनिश्चित कर रहे थे कि कोई गलती कहीं भी नहीं रहे. दोस्ती अब अगले दौर में प्रवेश करने वाली थी.

दोस्त बन गए बिजनेस पार्टनर
दोनों बचपन के जिगरी दोस्त थे. एलन के अनुसार उनके पास ढेर सारे आइडिया थे. जब भी गेट्स उनसे एक आइडिया के बारे में पूछते वो दसियों नए आइडिया पेश कर देते. वहीं गेट्स परफेक्ट सेल्स मैन थे, जिसे मार्केटिंग रणनीति में गजब की पकड़ थी.

माइक्रोसॉफ्ट के शुरुआती दिनों में एलन और बिल गेट्स, ये दोस्ती बाद में टूट गई


फिर सामने आया माइक्रोसॉफ्ट का नाम
पहले कामर्शियल प्रोजेक्ट को प्रदर्शित करने के बाद दोनों को मिलकर नई कंपनी बनाने का फैसला किया. इसका नाम एलन ने सोचा- माइक्रो-सॉफ्ट. बस कंपनी का नाम यही हो गया. 1975 में जब इसकी शुरुआत हुई तो इसमें दो ही लोग थे-एलन और गेट्स. फिर जब आर्डर मिलने लगे तो लोग भी धीरे धीरे बढ़ने लगे.

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गेट्स ने जो कहा वो माना
आइडिया मैन में एलन लिखते हैं कि गेट्स जबरदस्त सौदेबाज हैं. उसमें वह कहीं नहीं चूकते, चाहे सामने कोई भी क्यों न हो. जब गेट्स ने कंपनी में अपने लिए 60 फीसदी और उनके लिए 40 फीसदी हिस्से की बात की तो मैने मान ली, क्योंकि गेट्स का तर्क था कि वह ज्यादा काम कर रहे हैं. दूसरे मैं 15 हजार डॉलर की सेलरी ले रहा था. जब कंपनी को आर्डर मिलने लगे तो उन्होंने गेट्स ने रेवन्यू में 64-36 फीसदी की बात की. एलन ने फिर मान लिया.
हर बार गेट्स का तर्क यही होता था कि वह ज्यादा काम कर रहे हैं और कंपनी के लिए बिजनेस भी ला रहे हैं. दरार तब पड़नी शुरू हुई जब 80 के दशक की शुरुआत में बामर को कंपनी में सीईओ बनाकर लाया गया. उन्हें कंपनी के पांच फीसदी शेयर देने की बात हुई लेकिन गेट्स ने खुद ब खुद 8.75 फीसदी शेयर देने की घोषणा कर दी.यही से दोनों के बीच दरार पड़ने लगी.

टूटने लगी दोस्ती
अब तक गेट्स और एलन में तकरीबन रोज ही घंटों बातचीत होती थी. कंपनी के मसलों पर, बिजनेस पर, बिल उनके घर भी आ जाते थे. लेकिन बामर के आने के बाद हालात बदलने लगे. बिल और उनके बीच दूरियां बढने लगीं. बातचीत कम हो गई. तकरार होने लगी. 1982 में एलन बीमार पड़े. कैंसर से जूझ रहे थे. तब आफिस को कम समय दे पाते थे.

पॉल एलन की फाइल फोटो


उनका मानना है कि ऐसे खराब समय में गेट्स उनका साथ देने की बजाए ये बातें करने में लग गए कि मैं कंपनी को समय नहीं देता. एलन को इसका मलाल भी रहा कि जिस समय उन्हें अपनी बीमारी की हालत में जिस दोस्त की जरूरत थी, वह गेट्स ने कभी नहीं दिखाई बल्कि उल्टा ही किया.

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माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के शुरुआती साल
माइक्रोसॉफ्ट कंपनी की शुरुआत 1975 में हुई थी. एलन ने किताब में लिखा, शुरुआती साल किसी नई कंपनी के लिए कैसे होते हैं, आप समझ सकते हैं लेकिन हम तब भी तेजी से आगे बढ़ रहे थे. हम दोनों ने अपने अपने मोर्चे बखूबी संभाले हुए थे. लेकिन ये कहना चाहिए कि पहले आठ सालों में कंपनी में काफी इनोवेशन हुए. इन सालों में कंपनी उनके आइडियाज पर ज्यादा चली.

एलन ने खुद को समेटना शुरू किया
माइक्रोसॉफ्ट में बामर के आने औऱ कैंसर जैसी बीमारी से उबरने के बाद एलन को लगा कि कंपनी में उनकी बातों को नहीं माना जा रहा है. लिहाजा उन्होंने खुद को समेटना शुरू कर दिया. वर्ष 1983 के बाद उन्होंने गेट्स से कह दिया-वह खुद अलग कर रहे हैं. अब ये कंपनी तुम्हारी है. मैं अपने रास्ते-तुम अपने रास्ते. सच में ऐसा ही हुआ.


रास्ते अलग
2011 में एलन की संस्मरणात्मक किताब जब बाजार में आई. हालांकि उससे कई साल पहले बहुत कुछ हो चुका था. वर्ष 2000 में एलन माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक मंडल से इस्तीफा दे चुके थे. बिल दुनिया के सबसे धनी शख्स बन चुके थे. माइक्रोसॉफ्ट दुनिया में हर किसी की जिंदगी में शुमार हो चुकी थी. लेकिन दो दोस्त अलग राहों पर चल चुके थे. बातचीत कमोवेश खत्म हो चुकी थी. कहीं मिल गए तो बस हाय-हैलो.

किताब प्रकाशित होने से दो तीन साल पहले जब एलन की मां का निधन हुआ तब कई सालों बाद गेट्स ने उनसे फोन पर बात की. सांत्वना दी. फिर मिलने की बात की. एलन को बहुत अच्छा लगा, क्योंकि वह भी दुनिया के जिस शख्स की आवाज सुनने का इंतजार कर रहे थे वह बिल ही थे. दोनों का गला रूंध गया.

फिर लौटेगा याराना का वो दौर
कम से कम एलन को तो ये उम्मीद थी ही. उन्होंने किताब के प्रकाशन के बाद टीवी इंटरव्यू में कहा-मुझे अब भी उनसे दोस्ती का भरोसा है. हम फिर दोस्त बनेंगे. हमने जो समय साथ में गुजारा,कहीं ज्यादा मजबूत था. हमारी दोस्ती तकनीक के इतिहास का खास हिस्सा भी है, मुझे इसे वैसे ही कहना चाहिए औऱ जो भी लोग इसे समझेंगे वो मेरा सम्मान जरूर करेंगे. हम दोनों ने मिलकर बहुत बड़ी बड़ी चुनौतियों का सामना किया और इसे पार करते गए.

पॉल एलेन ने कई कंपनियां खड़ीं कीं. इसमें स्पेस से जुड़ी एक कंपनी भी थी


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एलन क्या करते थे
पॉल एलन के पास माइक्रोसाफ्ट के 100 मिलियन शेयर थे. इसके अलावा वह कई क्षेत्रों की कंपनियों में निवेश करते थे. उनकी अपनी खुद की कई कंपनियां थीं. अमेरिका में रग्बी, बेसबाल और बास्केटबाल से जुड़ी तीन शीर्ष टीमों के वह मालिक थे. काफी धन कल्याणकारी कामों में खर्च करते थे. उन्होंने शादी नहीं की थी. उनकी फिलास्फी थी -बिजनेस जरूर करो लेकिन जिंदगी ज्यादा बड़ी चीज है, इसे भी समय दो.
First published: October 16, 2018, 11:10 AM IST
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