जानें अब फिर क्यों चर्चाओं में आया पवन जल्लाद, क्या है वजह

मेरठ का पवन जल्लाद

मेरठ का पवन जल्लाद

मेरठ का पवन जल्लाद फिर चर्चाओं में है. वजह है कि वो जल्दी ही फिर एक महिला को फांसी देने जा रहा है. ये फांसी मथुरा जेल में होगी. जिस महिला को वो फांसी देगा, उसने अपने ही परिवार के 7 सदस्यों को कुल्हाड़ी से काट दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 17, 2021, 10:05 AM IST
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पवन जल्लाद पिछले साल खासी चर्चाओं में आया था. अब वो फिर एक और फांसी देने जा रहा है. अबकी बार वो जिसे फांसी के फंदे पर कसेगा, वो एक महिला है, जिसका नाम शबनम है. ये फांसी मथुरा में दी जाएगी. पिछले साल पवन जल्लाद ने निर्भया मामले में चारों गुनाहगारों को दिल्ली जेल में फांसी दी थी. जानते हैं कौन है पवन जल्लाद.

पवन जल्लाद पिछले साल के शुरू में तब खासी चर्चाओं में था, जब निर्भया मामले में चारों गुनाहगारों को एक साथ दिल्ली की जेल में फांसी की सजा होने वाली थी. अब मथुरा में पहली बार इस काम को अंजाम देंगे, जिस महिला को अब वो फांसी पर चढ़ाने वाले हैं, उसके जघन्य अपराध पर हर कोई हिल गया था. शबनम नाम की इस महिला ने 2008 में अमरोहा में अपने परिवार के 07 लोगों को कुल्हाड़ी से काटकर मौत की नींद सुला दिया था. ये काम उसने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर किया था.

उसे फांसी की सजा हो चुकी है. पवन जल्लाद उसे ये फांसी मथुरा जेल में ही देगा. जेल में तैयारियां हो रही हैं. दो बार पवन जल्लाद वहां जाकर फांसी की तैयारी से संबंधित जरूरी काम कर चुका है.

पवन जल्लाद मेरठ का रहने वाला है. कई पीढ़ियों से वो इसी शहर में रह रहा है. निर्भया मामले में चारों गुनाहगारों को फांसी देने के बाद इस शहर के लोग शायद उसे पहचानने लगे हैं. वैसे आमतौर पर वो पार्ट टाइम तौर पर कपड़ा बेचने का काम करता है.
भारत में इस समय इक्का-दुक्का अधिकृत जल्लाद ही बचे हैं, जो ये काम कर रहे हैं. पवन की उम्र 57 साल है. फांसी देने के काम को वो महज एक पेशे के तौर पर देखते हैं. उनका कहना है कि कोई व्यक्ति न्यायपालिका से दंडित हुआ होगा और उसने वैसा काम किया होगा, तभी उसे फांसी की सजा दी जा रही होगी, लिहाजा वो केवल अपने पेशे को ईमानदारी से निभाने का काम करते हैं.

बाप और दादा भी देते रहे हैं फांसी

हालांकि इस काम से जुड़े हुए उसे चार दशक से कहीं ज्यादा हो चुके हैं. जब वो किशोरवय में था तब अपने दादा कालू जल्लाद के साथ फांसी के काम में उन्हें मदद करता था. कालू जल्लाद ने अपने पिता लक्ष्मण सिंह के निधन के बाद 1989 में ये काम संभाला था.



कालू ने अपने करियर में 60 से ज्यादा लोगों को फांसी दी. इसमें इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को दी गई फांसी शामिल है. उन्हें फांसी देने के लिए कालू को विशेष तौर पर मेरठ से बुलाया गया था. इससे पहले रंगा और बिल्ला को भी फांसी देने का काम उसी ने किया था.

कैसे सीखी फांसी की टैक्निक

पवन ने पहले अपने दादा और फिर पिता से फांसी टेक्निक सीखी. रस्सी में गांठ कैसे लगनी है. कैसे फांसी देते समय रस्सी को आसानी से गर्दन के इर्द-गिर्द सरकाना है. कैसे रस्सी में लूप लगाए जाने हैं. कैसे फांसी का लीवर सही तरीके से काम करेगा. फांसी देने के पहले कई दिन ड्राई रन होता है, जिसमें फांसी देने की प्रक्रिया को रेत भरे बैग के साथ पूरा करते हैं. कोशिश ये होती है कि जिसे फांसी दी जा रही हो, उसे कम से कम कष्ट हो.

किस तरह की प्रैक्टिस होती है फांसी से पहले

वैसे पवन फांसी देने की ट्रेनिंग के तौर पर एक बैग में रेत भरते हैं और उसका वजन मानव के वजन के बराबर होता है. इसी को रस्सी के फंदे में कसकर वो ट्रेनिंग को अंजाम देते हैं. बार-बार प्रैक्टिस इसलिए होती है कि जिस दिन फांसी देनी हो, तब कोई चूक नहीं हो.

वो फांसी देने से पहले बार-बार इसकी प्रैक्टिस करते हैं ताकि जिस दिन फांसी देनी हो, तब कोई चूक नहीं हो.

ये मेरे लिए एक ड्यूटी है

कुछ समय पहले पवन जल्लाद ने न्यूज 18 के साथ बात करते हुए कहा था, "जल्लाद का जिक्र सबको डराता है. बहुतों के लिए ये गाली है. मेरे नाम के साथ 'जल्लाद' लगा है. यही मेरी पहचान है. मैं बुरा नहीं मानता. जल्लाद होना सबके बस की बात नहीं. हर कोई कर सकता तो आज देश में सैकड़ों जल्लाद होते." वो कहते हैं, "उन्हें अपने काम पर गर्व है. ये मेरे लिए एक ड्यूटी है. फांसी देते समय मैं कुछ नहीं सोचता."

80 से ज्यादा फांसी में शामिल 

पवन ने अपने दादा और पिता के साथ मदद देने के दौरान करीब 80 फांसी देखीं. उसके पिता मम्मू सिंह ने कालू जल्लाद के मरने के बाद जल्लाद का काम शुरू किया. पहले मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को पुणे की जेल में फांसी देने के लिए मम्मू सिंह को ही मुकर्रर किया गया था. लेकिन इसी दौरान मम्मू का निधन हो गया. तब बाबू जल्लाद ने ये फांसी दी.

पवन का परिवार चार पीढ़ियों से जल्लाद का काम कर रहा है. उनके पिता ने इंदिरा गांधी के हत्यारों को भी फांसी दी थी

पवन का दावा है कि उसके बाबा लक्ष्मण सिंह ने अंग्रेजों के जमाने में लाहौर जेल में जाकर भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दी थी. बल्कि जब लक्ष्मण सिंह ने अपने बेटे कालू को जल्लाद बनाने के मेरठ जेल में पेश किया तो उनके बड़े बेटे जगदीश को ये बात बहुत बुरी लगी थी. तब लक्ष्मण सिंह ने कहा था कि फांसी देने का शराबियों और कबाबियों का नहीं होता.

बेटा नहीं बनेगा जल्लाद 

पवन का परिवार सात लोगों का है. हालांकि ये तय है कि उनका बेटा जल्लाद नहीं बनने वाला, क्योंकि वो ये काम नहीं करना चाहता.

कितनी मिलती है पगार 

मेरठ जेल से उसे हर महीने 5000 रुपए पगार के रूप में मिलते हैं. उसका घर मेरठ शहर के बाहर बसे उपनगरीय इलाकों में है. ये मामूली घर है. उसका ये वेतन भी कुछ समय पहले ही बढ़ा है. हालांकि कम पैसे के कारण उसके सामने घर का खर्च सही तरीके से चलाने के लिए हमेशा चुनौती रहती है.

वैसे तो पवन मेरठ जेल से जुड़े हुए जल्लाद हैं लेकिन रोजाना वो मेंरठ में साइकल पर कपड़े की फेरी लगाते हैं

निर्भया मामले में चारों गुनाहगारों को फांसी देने के पहले तो कपड़ों का गट्ठर साइकिल के पीछे रखकर आवाज लगाते हुए मेरठ के मोहल्लों में निकलता था. अब उसने इसकी बजाए कपड़े की छोटी दुकान खोल ली है.

फांसी देने के पहली किसकी पूजा

आमतौर पर फांसी देने से पहले जल्लाद अलग तरह की पूजा करते हैं. पवन हर बार फांसी से पहले मां काली की पूजा करते हैं.

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