जानें कोरोना के दौर में बगैर घर से निकले कैसे ले सकते हैं ई-डॉक्टर्स की मदद

जानें कोरोना के दौर में बगैर घर से निकले कैसे ले सकते हैं ई-डॉक्टर्स की मदद
कोरोना के साथ-साथ लोगों के डॉक्टरों से मिलने के तरीके में भी बदलाव हुआ है (Photo-pixabay)

कोरोना (coronavirus) के साथ-साथ लोगों के डॉक्टरों से मिलने के तरीके में भी बदलाव हुआ है. अब अस्पताल या क्लिनिक जाने की बजाए लोग वर्चुअल-विजिट (virtual visit with doctors) पसंद कर रहे हैं.

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तीन हफ्तों के भीतर देश में कोरोना मामलों में तेजी आई और हम छठवें से सीधे तीसरे पायदान पर पहुंच गए. अब यहां साढ़े 8 लाख से ज्यादा मरीज हैं, जबकि 23 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. इसके साथ ही कोरोना का डर लोगों के जीवन जीने के तरीके पर दिखा है. लोग वे तरीके खोज रहे हैं, जिससे घर से निकलने की जरूरत कम से कम पड़े. यहां तक कि इसके लिए डॉक्टरों से भी वर्चुअल मीटिंग हो रही है. इसके लिए हाल के दिनों में कई ऑनलाइन हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म शुरू हुए हैं.

27 मार्च को यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने अपील की कि लोग सेहत की जांच के लिए क्लिनिक या अस्पताल जाना टालें. इसकी बजाए वे ऑनलाइन कंसल्टेशन लें. इसके कई फायदे हैं. जैसे एक तो अस्पतालों पर लोड कम होगा और वे कोरोना के मरीजों पर ज्यादा बेहतर ढंग से ध्यान दे सकेंगे. दूसरा फायदा ये है कि सामान्य मरीजों में संक्रमण का खतरा कम होगा. इस अपील के तुरंत बाद ही डॉक्टरों से वर्चुअल मीटिंग के तरीकों में तेजी से उछाल आया. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे ही एक हेल्थकेयर एप लिबरेट पर तेजी से यूजर बढ़े. कुछ ही दिनों में इसमें 60 प्रतिशत तक तेजी देखी गई. इसी तरह से एक और टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म एमफाइन में भी काफी सारे मरीज आए, जो डॉक्टरों से ई-मीटिंग करना चाहते थे.

कोरोना की वजह से टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म में इजाफा हुआ (Photo-pixabay)




कोरोना के कारण आए डर को देखते हुए कई टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म्स ने निःशुल्क फोन कंसल्टेशन की शुरुआत भी की है. फ्री हेल्पलाइन नंबरों पर लगातार फोन आते हैं. अधिकतर लोग कोरोना के लक्षणों की बात पूछते हैं. कई लोग ये भी जानना चाहते हैं कि क्या सोशल मीडिया पर कोरोना के उपचार के जो तरीके बताए जा रहे हैं, वे सेफ हैं. प्रिंट की खबर में ऐसी ही एक ऑनलाइन फार्मेसी के फाउंडर धर्मिल सेठ कहते हैं कि इनमें से अधिकतर पैनिक कॉल होते हैं. लोग कोरोना के संकेतों पर बात करते हैं. तब हमारे डॉक्टर उन्हें कोरोना और फ्लू दोनों के बारे में बताते हैं. एक और ई-फार्मेसी ने 10 दिन में 10 हजार से ज्यादा फ्री कंसल्टेशन दिए.
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डॉक्टरों से मिलने की बजाए वर्जुअल मीटिंग को पसंद करने वाले लोग सारे एज-ग्रुप से हैं लेकिन इनमें भी 20 से 30 साल के लोगों की संख्या ज्यादा है. एक ऑनलाइन हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म ने इसपर आंतरिक रिसर्च की और पाया कि सुबह 9 से 12 के बीच और शाम को 7 से 9 के बीच सबसे ज्यादा क्वैरीज आती हैं. कस्बों और छोटे शहरों की बजाए महानगरों में सबसे ज्यादा क्वैरीज आ रही हैं, जैसे दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, मुंबई, चैन्नई और पुणे. इसी तरह से tier 2 शहरों में अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, भुवनेश्वर और इंदौर से लोग टेलीमेडिसिन का सहारा ले रहे हैं.

डॉक्टरों से मिलने की बजाए वर्जुअल मीटिंग को पसंद करने वाले लोग सारे एज-ग्रुप से हैं (Photo-pixabay)


वैसे भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में टेलीमेडिसिन का चलन बढ़ा है. टाइम मैग्जीन के मुताबिक कोरोना से ठीक पहले तक लोग डॉक्टर से मिलकर बीमारी की सलाह लेना पसंद करते थे. केवल 10 प्रतिशत लोग ही वर्चुअल मीटिंग करते थे. कोरोना के साथ ही हालात बदल गए. इसी तरह से द इकनॉमिस्ट की खबर में बताया गया कि कैसे चीन में भी लोग अस्पतालों या क्लिनिक की विजिट टालने लगे हैं. माना जा रहा है कि कोरोना खत्म होने के बाद भी अगर लोगों के अनुभव ठीक रहे तो वे टेलीमेडिसिन को ही प्राथमिकता देंगे.

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पहले-पहले मरीज टेलीमेडिसिन की मदद लेने से बचते रहे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान इसमें बढ़त हुई. इसमें डॉक्टर और मरीज आमने-सामने नहीं होते हैं, बल्कि इंटरनेट की मदद से बात होती है. इसी के जरिए डॉक्टर लक्षणों के आधार पर कुछ जांचें कहता है. टेस्ट रिपोर्ट इंटरनेट की मदद से भेजी जाती हैं और फिर डॉक्टर उन्हें देखकर बीमारी की पहचान और इलाज सुझाता है.

इसमें डॉक्टर और मरीज आमने-सामने नहीं होते हैं, बल्कि इंटरनेट की मदद से बात होती है (Photo-pixabay)


ऐसे ही ई-फार्मेसी का चलन भी बढ़ा है. ई-फार्मेसी वो नई तरह की दुकान है, जिसकी साइट या एप पर जाकर जब आप दवा बुक करेंगे तो आपको सस्ते में, सप्ताह के सातों दिन और किसी भी समय घर पर दवा पहुंचा देंगे. अभी ये अपने शुरुआती दिनों में है. कई नियमों के लिए इन्हें रेगुलेट किया जा रहा है. इसमें ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स रुल्स 1945 के साथ द ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट 1940 भी शामिल है. फिलहाल कोरोना के दौर में ई फार्मेसी के बिजनेस में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है.

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इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में एक ऑनलाइन फार्मेसी के संचालक धर्मिल सेठ बताते हैं कि दवाओं की बिक्री 100% हो चुकी है. इसमें सर्दी-खांसी, बुखार की दवाएं सबसे ऊपर हैं. यही वजह है कि बहुत सी इंटरनेट फार्मेसी स्टार्टअप अपने नई नियुक्तियां तक कर रहे हैं, जबकि लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर जगहों पर नौकरी में कटौती दिख रही है.
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