US Election Result: 50 सालों की कोशिश के बाद अब अपनी मंजिल के काफी करीब हैं बाइडन

डेमोकेट्स के उम्मीदवार जो बाइडन जीत के काफी करीब पहुंच चुके हैं
डेमोकेट्स के उम्मीदवार जो बाइडन जीत के काफी करीब पहुंच चुके हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति की रेस (American presidential race) में काफी आगे खड़े जो बाइडन (Joe Biden) स्कूली समय में हकलाया करते थे. लेकिन उन्होंने कोशिश नहीं छोड़ी और बोलने की प्रैक्टिस करते रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 12:37 PM IST
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के विपक्ष में खड़े डेमोकेट्स के उम्मीदवार जो बाइडन अब जीत के काफी करीब पहुंच चुके हैं. केवल 6 इलेक्टोरल वोट बटोरने के साथ ही वो वाइट हाउस में सत्ता के दावेदार हो जाएंगे. हालांकि ट्रंप लगातार इसे धांधली बताते हुए कोर्ट की मदद की बात कर रहे हैं. जो भी हो, बहरहाल इतना तय है कि जो बाइडन ने यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 5 दशकों का सफर तय किया.

उम्र का उड़ाया मजाक
चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप अपने विपक्षी को लगातार 'स्लीपी जो' बताया करते थे. ये एक तरह से मतदाताओं को चेतावनी थी कि 77 साल के नेता के हाथ में अमेरिका की डोर जाना खतरनाक हो सकता है. बता दें कि बाइडन राजनीति में काफी सालों से सक्रिय होने के बाद भी आक्रामक नहीं हो सके, ये भी शायद उनकी छवि के खिलाफ जाता था. लेकिन अब 264 इलेक्टोरल वोटों के साथ यही स्लीपी जो अमेरिका का दिल जीतते दिख रहे हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप अपने विपक्षी को लगातार 'स्लीपी जो' बताया करते थे (Photo- cnbc)

स्कूल में हकलाहट की समस्या थी


एसोसिएटेड प्रेस को दिए अपने एक इंटरव्यू में बाइडन के बचपन के दोस्त जिम कैनेडी याद करते हैं कि वे छुटपन में कितने अलग हुआ करते थे. टाइम्स ऑफ इंडिया में इस बारे में विस्तार से खबर छपी है. बकौल कैनेडी बाइडन स्कूल के दिनों में काफी हकलाया करते थे. हकलाते हुए बोलने की उनकी ये समस्या इतनी ज्यादा थी कि खुद एक स्कूल टीचर ने उन्हें बी-बी ब्लैकबर्ड बुलाना शुरू कर दिया था. बाइडन ने तब भी हार नहीं मानी. वे हकलाते हुए ही बोलने की प्रैक्टिस करते रहे और तब जाकर रुके, जब दुनिया ने उन्हें शानदार वक्ता मान लिया.

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यहां से शुरू हुई कहानी 
सियासत में जो बाइडन के नाम से मशहूर बाइडन का पूरा नाम कम लोग जानते हैं. दरअसल, जो बाइडन का पूरा नाम जोसेफ रॉबिनेट बाइडन जूनियर है. उनका जन्म पेनसिल्वेनिया के स्‍कैंटन में हुआ था लेकिन जल्दी ही पिता के साथ उन्हें डेलावेयर जाना पड़ा. यहां से उनके जीवन ने नया मोड़ लिया. वे युवाकाल में ही राजनीति में आ गए. छह बार सीनेट के लिए चुने गए और बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान उप-राष्ट्रपति पद संभाला.

बाडइन की निजी जिंदगी काफी उतार-चढ़ाव से भरी रही


निजी जीवन काफी ट्रैजिक
सुनने में ये काफी आसान सफर लगता है लेकिन असल में है नहीं. बाडइन की निजी जिंदगी काफी उतार-चढ़ाव से भरी रही. साल 1972 में बाइडन की पहली पत्नी नीलिया और उनकी एक साल की बेटी नाओमी एक कार एक्सिडेंट में मारे गए. तब बाइडन काफी टूट गए थे. उनके साथ दो छोटे बेटे भी थे, जिनकी देखभाल के लिए बाइडन ने सीनेट से इस्तीफा देना चाहा लेकिन मित्रों ने उन्हें किसी तरह से रोक लिया. तब जो बाइडन नामक ये पिता रोज रात वॉशिंगटन से डेलावेयर की लंबी दूरी तय करता था ताकि अपने बेटों को गुडनाइट कह सके.

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खुदकुशी का खयाल रहता था
उबरने के बाद घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वे हर समय खुदकुशी के बारे में सोचा करते थे. जैसे-तैसे वे संभले ही थे कि साल 2015 में दोबारा एक हादसा हुआ. बाइडन के सबसे बड़े बेटे ब्यू को ब्रेन कैंसर की पुष्टि हुई. कैंसर एडवांस स्टेज में था और जल्द ही वे भी नहीं रहे. सिलसिला तब भी नहीं रुका. छोटे बेटे हंटर को कोकीन लेने के आरोप में अमेरिकी नेवी से बर्खास्त कर दिया गया.

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किताब में माता-पिता से प्रेरणा का जिक्र 
संभावित राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक किताब लिखी है- Promises to Keep. इसमें उनके जीवन के हर उतार-चढ़ाव का जिक्र है. वे लिखते हैं कि अपनी आइरिश मां से उन्हें मुश्किल से लेकर नाजुक काम करना तक आया. वहीं पिता को रोज सुबह बिना छुट्टी लिए ऐसे काम पर जाते देखा, जो उन्हें कतई पसंद नहीं था. वे मानते हैं कि पिता को रोज उठना और चल पड़ना ही उन्हें लगातार उठने के लिए प्रेरित करता रहा.

जो बाइडन चुनाव प्रचार के दौरान अपनी पत्नी जिल बाइडन के साथ


बड़े बेटे की मौत के दौरान वे ओबामा के कार्यकाल में उप-राष्ट्रपति थे. ये उनका दूसरा टर्म था. लोग अनुमान लगाते थे कि बाइडन अब राष्ट्रपति पद की दावेदारी के लिए तैयार हैं. हालांकि तब परिवार के दर्द में साथ देने के लिए बाइडन ने साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं लिया. वैसे अमेरिका का राष्ट्रपति बनना दशकों से जो बाइडन की ख्वाहिश रही. साल 1980 में उन्होंने इस ओर पहला कदम बढ़ाया. लगातार कोशिशों के बीच बाइडन साल 2008 में ओबामा मंत्रिमंडल में उप-राष्ट्रपति बने और दो टर्म तक रहे.

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राजनीतिक पंडितों ने उम्रदराज कहा
साल 2015 में राष्ट्रपति चुनाव से लगभग सालभर पहले जब बाइडन ने चुनाव न लड़ने का फैसला लिया जो राजनीति के जानकारों ने उनका मजाक बनाया. लिखा गया कि अंकल जो शायद काफी उम्रदराज हो चुके हैं. लेकिन अब बाइडन दोबारा लौटे हैं और काफी संभावना है कि वाइट हाउस इस बार उनका घर बन जाए.
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