क्या रूस में वैज्ञानिक समय को पीछे लौटाने में सफल हो गए हैं?

क्या रूस में वैज्ञानिक समय को पीछे लौटाने में सफल हो गए हैं?
इस प्रयोग से साबित हुआ है कि समय के बहुत महीन हिस्से से ही सही उसे पीछे लाया जा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रूस में वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रोन (Electron) को समय के विपरीत अपनी पूर्व अवस्था में लाने में सफलता पाई है.

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नई दिल्ली: क्या समय (Time) के पीछे जाया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जो बरसों से वैज्ञानिकों के लिए एक कल्पना का ही विषय साबित हुआ है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इसका उम्मीद कभी नहीं छोड़ी. हाल ही में शोधकर्ताओं ने समय के पीछे जाने में सफलता हासिल की है. उनका यह प्रयोग भौतिक विज्ञान (Physics) के उन नियमों को तोड़ता दिख रहा है जो कहते हैं कि समय के विपरीत जाया नहीं जा सकता है.

कहां हुआ है यह प्रयोग
मॉस्को इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स एंड टेक्नोलॉजी ने अमेरिकी और स्विटजरलैंड के सहयोगियों का साथियों के साथ क्वांटम कम्प्यूटर की एक अवस्था को सेकेंड के कुछ हिस्से पीछे वापस लाने में सफलता पाई है. उन्होंने यह गणना करने में भी सफलता हासिल की कि एक इलेक्ट्रॉन के अंतरिक्ष में खाली जगह पर कुछ समय पीछे की ओर अचनाक यात्रा करने की क्या संभावना है.

इस तरह के कई प्रयोगों में से एक है यह
MIPT के फिजिक्स ऑफ क्वांटम इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी लैब प्रमुख और इस अध्ययन केप्रमुख लेकर गॉर्डी लेसोविक ने कहा,”यह उन पत्रों की सीरीज में से एक है जो ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के दूसरे नियम के उल्लंघन पर हैं. इस नियम का उस धारणा से नजदीकी संबंध है जिसमें समय का तीर एक ही दिशा की ओर होता है यानि भूत से भविष्य की ओर. हमने पहले सतत गति वाली मशीन की व्याख्या से शुरुआत की. उसके बाद दिसंबर में हने एक उपकरण मैक्सेवेल के राक्षस (Maxwell’s demon) की चर्चा की जो इस दूसरे नियम का उल्लंघन करता है.  हाल ही में हमने इस मामले में एक नया कोण मिला है. हमने उस अवस्था को बनाया है जो तब बनती है जब थर्मोडायनामिक समय का तीर उल्टी दिशा में चलता है.



Atom
वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रॉन केस्तर पर जाकर यह प्रयोग किया.


 

समय के पीछे जाने में समस्या
भौतिकी के ज्यादातर नियम भूत और भविष्य में अंतर नहीं करते. कई लोगों को हैरानी की बात लग सकती है कि ज्यादातर भैतिकी के नियम बिलियर्ड्स की गेंदों को छितरने के बाद वापस पिरामिड में जमने की स्थिति में आने को नहीं रोकते हैं. या फिर घुली हुई चाय को टीबैग में वापस आने या फिर फूट चुके ज्वालामुखी की विपरीत वापस पहले की स्थिति में आ जाने की घटना. इस तरह की घटनाओं के लिए बहुत ज्यादा व्यवस्थित स्थितियों की जरूरत होती है जिसमें बाहरी दखलंदाजी न हो और यह दूसरे नियम के खिलाफ है.

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इलेक्ट्रॉन की अवस्था का अलोकन
एमआईपीटी के भौतिकविदों ने यह जांचने के लिए एक इलेक्ट्रॉन का खाली अंतरिक्ष में अवलोकन करने का निर्णय लिया. अध्ययन के सह लेखक आंद्रे लेबेदेब ने कहा, “मान लीजिए कि इलेक्ट्रॉन को अवलोकित करते समय उसकी स्थिति ज्ञात है. क्वांटम नियम उसकी स्थिति सटीकता से नहीं बताते, लेकिन हम उस क्षेत्र के बारे को निश्चित कर सकते हैं. इलेक्ट्रॉन की स्थिति एक श्रोडिंगर समीकरण से निर्धारित होती है. इसके तहत इलेक्ट्रॉन जहां है वह क्षेत्र तेजी से फैलेगा. इससे इलेक्ट्रॉन की स्थिति अनिश्चित होती जाएगा. बड़े स्तर पर यह थर्मोडायनामिक्स के दूसरे नियम के तहत काम करेगा.

Clock
प्राकृतिक रूप से अब तक इस तरह की घटन नहीं देखी गई है.


मुमकिन है यह
लेकिन श्रोडिंगर का नियम विपरीत दिशा में जा सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि कुछ समय बाद इलेक्ट्रॉन की छोटे क्षेत्र में अवस्था में लाया जा सकता है. ऐसा प्राकृतिक अवस्थाओं में नहीं देखा गया है. लेकिन यह नामुमकिन नहीं है. टीम ने यह गणना करने का निर्णय लिया कि एक अवलोकित इलेक्ट्रॉन, जिसकी स्थिति फैल रही है, की वापस अपने अवस्था में पहुंचने की संभावना क्या है. वह भी एक सेकेंड के दस अरबवें  हिस्से में.

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इस प्रयोग से पता चला है कि प्राकृतिक रूप से यह काफी जटिल हो, लेकिन ऐसा क्वांटम एल्गॉरिदम डिजाइन किया जा सकता है जिससे क्वांटम अवस्था में विपरीत स्थिति वापस आ सकती है. शोधकर्ताओं को लगता है कि इससे क्वांटम कम्प्यूटर को और सटीक बनाने में मदद मिल सकती है.
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