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क्या आइंस्टीन को गलत साबित कर जीता है वैज्ञानिकों ने भौतिकी का नोबल पुरस्कार

क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) में क्वांटम संलिप्तता एक बहुत प्रमुख अवधारणा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) में क्वांटम संलिप्तता एक बहुत प्रमुख अवधारणा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

भौतिकी (Physics) में इस साल के नोबोल पुरस्कार विजेताओं ने क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) के प्रमुख विषय क्वांटम ...अधिक पढ़ें

    हाइलाइट्स

    इस साल का भौतिकी में नोबेल पुरस्कार क्वांटम भौतिकी के लिए दिया गया है.
    विजेताओं ने क्वांटम संलिप्तताओं के बारे में कुछ पुरानी धारणाओं को खारिज किया है.
    उनकी खोज से अल्बर्ट आइंस्टीन की कुछ अवधारणाएं भी गलत साबित हुई हैं.

    साल 2022 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Physics) तीन वैज्ञानिकों को क्वांटम भौतिकी में बड़े और अहम प्रयोगों के लिए दिया गया है. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के मुताबिक एलेन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लॉजर और एंटोन जिलिंगर को “उनके संलिप्त फोटोन (Experiments on Entangled Photons) पर किए गए प्रयोगों के लिए दिया जा रहा है जिससे क्वांटम विज्ञान की अहम जानकारी और बेल असमानताओं का उल्लंघन स्थापित किया जा सका”. इन प्रयोगों के जरिए इन वैज्ञानिकों ने महान भौतिकविद अल्बर्ट आइंस्टीन की कुछ धारणाओं को भी गलत साबित किया है. क्वांटम यांत्रिकी भौतिकी में शास्त्रीय यांत्रिकी से हटकर एक अलग उभरता हुए क्षेत्र है जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह दुनिया में अलग तरह की क्रांति लाने वाली है.

    क्या है क्वांटम भौतिकी
    क्वांटम भौतिकी का सिद्धांत परमाणु और उससे भी छोटे कणों के संसार की व्याख्या करता है जिसमें भौतिकी के सामान्य शास्त्रीय सिद्धांत लागू नहीं होते हैं बल्कि उससे काफी अलग ही तरह से कणों की व्याख्या होती है. शास्त्रीय भौतिकी में समीकरणों के जरिए वस्तुओं के व्यवहार का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है. जैसे अगर किसी भार वाली वस्तु को पृथ्वी पर कुछ ऊंचाई से छोड़ा जाएगा तो वह त्वरण के साथ नीचे गिरेगी.

    स्थिति की संभावना
    क्वांटम भौतिकी कणों को अलग ही नजरिए से देखती है. किसी निश्चित नतीजे के पूर्वानुमान लगाने की जगह क्वांटम भौतिकी हमें किसी स्थान विशेष में उपपरमाणु कणों के पाए जाने की संभावना को बताती है. किसी भी एक यादृच्छिक या बेतरतीब स्थान से मापन करने से पहले कोई कण वास्तव में एक ही समय पर कई जगह पर हो सकता है.

    क्या था आइंस्टीन का मानना
    अल्बर्ट आइंस्टीन इस सिद्धांत केबा रे में शुरु में काफी असहज थे. वे मानते थे कि यह एक गलत सिद्धांत हैं. उनका मानना था कि परिणाम बेतरतीब होने की जगह जरूर कुछ ऐसे छिपे हुए बल या नियम होने चाहिए जिन्हें हम तो नहीं देख या समझ पा रहे हैं, लेकिन वे हमारे मानप के पूर्वानुमान लगाने की क्षमता को जरूर प्रभावित कर रहे हैं.

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    क्वांटम भौतिकी अलबर्ट आइंस्टीन (Albert Einstein) के इस विचार को खारिज करती है कि किसी कण की अधिकतम गति प्रकाश की गति से ज्यादा नहीं हो सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    जॉन बेल के परीक्षण
    लेकिन कई भौतिकविदों ने क्वांटम यांत्रिकी को अपनाया जिनमें उत्तरी आयरलैंड के जॉन बेल भी शामिल थे. उन्होंने 1964 में एक महत्वपूर्ण सैद्धांतिक परीक्षण निर्मित किया जो यह दर्शाता सकता था कि आइंस्टीन जिस तरह के छिपी हुई राशियों (बल या नियमों) की बात कर रहे हैं उनका कोई अस्तित्व नहीं हैं. क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों के अनुसार कण आपस में संलिप्त या उलझे हुए या असामान्य रूप से जुड़े हुए हो सकते हैं जिससे हम अगर एक का आंकलन करते हैं तो हम स्वतः और फौरन ही दूसरे के  बारे में पता लगा सकते हैं.

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    आइंस्टीन के सिद्धांत के उल्लंघन की संभावना
    यदि दूर स्थित कण रहस्यमयी तरह से एक दूसरे को तुरंत प्रभावित कर सकते हैं, और इसकी कणों के एक दूसरे से छिपे हुए कारकों के जरिए हो रहे संचार की व्याख्या की जा सके तो इससे दोनों के बीच में प्रकाश से भी तेज गति से संचार होता होगा. और यह खुद आइंस्टीन के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा जिसके मुताबिक कोई भी कण प्रकाश की गति से तेज नहीं जा सकता है.

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    क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) आने वाले समय में दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    एक चुनौतीपूर्ण अवधारणा
    क्वांटम संलिप्तता एक चुनौतीपूर्ण अवधारणा है  जिसे समझना आसान नहीं है. खासतौर से यह पहलू जिसमें कण कितनी भी दूरी पर हों उनमें आपस में एक संबंध होता है या वे एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं. अगर एक बल्ब विपरीत दिशा में दो फोटोन फेंकता है. और ये दोनों फोटोन कण आपने में संलिप्त हैं तो आपस में कुछ गुण जैसे कि ध्रुवीकरण जैसे गुण साझा कर सकते हैं, भले ही उनके बीच कितनी ही दूरी क्यों ना हो. बेल ने अपने प्रयोगों के दौरान इन दो फोटोन के बारे में अलग अलग कल्पना की और उनकी संलिप्तता को सिद्ध करने के लिए उनके नतीजों की तुलना की.

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    संलिप्तता की अनिश्चितता
    क्लॉजर ने बेल के प्रयोग के आठ साल बाद दर्शाया कि प्रकाश वास्तव में संलिप्त हो सकता है. लेकिन उनके कई नतीजों की बिना संलिप्तता के भी व्याख्या की संभावना कायम था जिन्हें बेल के परीक्षणओं के लूपहोल (खामियां) कहा गया. यहां आस्पेक्ट एक प्रयोग लेकर आए जिससे बेल परीक्षण का सबसे प्रमुख लूपहोल खारिज हो गया. उन्होंने दर्शाया कि प्रयोग में संलिप्त फोटोन वास्तव में एक दूसरे से छिपे हुए कारकों के जरिए संचार नहीं करते हैं जिससे बेल के परीक्षण के नतीजे मिल सकें. इसके मतलब यही था कि वे वाकई अजीब तरह से संलिप्त थे.

    जिलिंगर के काम ने दर्शाया कि संलिप्त तंत्रों को एक दूसरे से जोड़ना कैसे संभव है, जिससे क्वांटम के समकक्ष नेटवर्क बनाया जा सकता है. इसी के जरिए हमारे पास पहले क्वाटम कम्प्यूटर हैं. क्वांटम सेंसर्स मेडिकल इमेजिंग और पनडुब्बियों की पहचान करने में उपयोग लाए जा रहे हैं. वास्तव में क्वांटम भौतिकी अब अपना आकार ले रही है और आइंस्टीन की कुछ अवधारणाओं को भी बेकार साबित करती दिख रही है. हम नए भविष्य में कदम रखने की ओर हैं.

    Tags: Nobel Prize, Research, Science, Space

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