क्या है Places Of Worship Act, जिसके तहत ज्ञानवापी मस्जिद मामले को चुनौती देंगे जिलानी

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट  विभिन्न धर्मों के बीच संघर्ष की स्थिति को टालने के लिए बना था- सांकेतिक फोटो (pixabay)

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट विभिन्न धर्मों के बीच संघर्ष की स्थिति को टालने के लिए बना था- सांकेतिक फोटो (pixabay)

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (The Places Of Worship Act) के तहत साल 1991 में ये कानून बन गया कि आजादी के रोज जो धर्मस्थल जिस भी मजहब का था, वो उसी तरह रहेगा. अब इस एक्ट पर भी सवाल उठ रहे हैं.

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काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) मामले में वाराणसी कोर्ट ने पुरातात्विक सर्वे कराने की बात की. इसके बाद से हिंदू-मुस्लिम संगठन अपने-अपने तरीके से इसपर खुशी और एतराज जता रहे हैं. इधर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (Muslim Personal Law Board) के सदस्य जफरयाब जिलानी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के सर्वेक्षण के फैसले को 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट (The Places Of Worship (Special Provisions) Act, 1991) का उल्लंघन कहते हुए इसे चुनौती देने की बात कह डाली.

क्या कहता है पूजास्थल पर बना ये नियम

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का मुकदमा साल 1991 में बने पूजा स्थल कानून के तहत आ रहा है. इसके मायने यह हैं कि देश की आजादी के समय यानी 15 अगस्त 1947 को जो भी प्लेसेज ऑफ वर्शिप यानी पूजा स्थल, जिस भी संप्रदाय का था, वो उसी का रहेगा. यानी अगर कहीं मंदिर है तो वो मंदिर ही रहे और मस्जिद है तो उसमें कोई फेरबदल न हो. ये कानून अलग-अलग मजहब को मानने वालों की आस्था बनाए रखने और खासतौर पर उनके बीच संघर्ष की स्थिति को टालने के लिए बना था. इसे साल 1991 में नरसिम्हा राव सरकार ने पारित किया था.

Kashi Vishwanath Mandir Gyanvapi Mosque
ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) मामले में वाराणसी कोर्ट ने पुरातात्विक सर्वे कराने की बात की

किसलिए बना ये नियम 

इस कानून का पूरा नाम प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजन) एक्ट, 1991 है. इससे एक धर्मस्थल को उसी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है और दूसरे धर्म के लोग वहां अतिक्रमण नहीं कर सकते. अधिनियम के तहत तीन साल तक की सजा के साथ-साथ जुर्माना भी हो सकता है, अगर कोई एक धर्मस्थल को दूसरे में बदलने की कोशिश करे या ऐसा करने की कोशिश में लिप्त पाया जाए. हालांकि इस मामले में अयोध्या विवाद को छूट दी गई थी.

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मुस्लिम नेता कर रहे एतराज 

इधर वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में अदालत ने पुरातात्विक सर्वे कराने का आदेश दिया, जिसपर कई मुस्लिम संगठन और नेता एतराज जताते हुए तर्क दे रहे हैं कि ये 1991 प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का उल्लंघन है. एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के मुताबिक मस्जिद कमेटी को तुरंत इस आदेश पर एतराज करना चाहिए, इससे पहले कि पुरातत्व विभाग काम शुरू करे.

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क्या है काशी में मंदिर-मस्जिद विवाद 

अयोध्या में रामजन्मभूमि फैसले के बाद से कई जगहों पर मथुरा और काशी का जिक्र आने लगा है. काशी का मामला यही है, जिस बारे में फिलहाल चर्चा है, यानी ज्ञानवापी मस्जिद विवाद, जिसमें याचिकाकर्ताओं के मुताबिक मस्जिद को मुगल शासक औरंगजेब ने प्राचीन मंदिर को गिराकर बनवाया था. कहा तो ये तक जाता है कि मस्जिद में उन्हीं अवशेषों का इस्तेमाल हुआ, जो कभी मंदिर में थे. याचिका में इसके सबूत के तौर पर पुराने दस्तावेज भी सौंपे गए. फिलहाल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मंदिर-मस्जिद परिसर में पुरातत्व विभाग को खुदाई और सर्वेक्षण के आदेश दिए हैं. जो भी हकीकत हो, इसके बाद ही पता चल सकेगी.

shahi idgah mosque mathura
शाही ईदगाह मस्जिद, मथुरा पर लगातार विवाद हो रहा है


क्या मथुरा में कृष्ण मंदिर ढहाकर बनी मस्जिद?

अब जानते हैं कि आखिर मथुरा में किस बात का हल्ला है. यहां पर शाही ईदगाह मस्जिद विवाद चल रहा है, जिसके तहत याचिकाकर्ताओं का दावा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13 एकड़ के कटरा केशव देव मंदिर के परिसर पर 17वीं शताब्दी में शाही ईदगाह बनाया गया था. उनका कहना है कि फिलहाल जहां मस्जिद है, वहीं किसी समय कंस का कारागार था और फिर कृष्ण मंदिर हुआ. बाद में मुगलों ने इसे नष्ट करवाकर शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी. इस मामले में भी यही कहा जा रहा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने का आदेश दिया था.

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अब प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 पर भी विवाद हो रहा है

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में सरकार को तलब करते हुए एक याचिका का जवाब देने को कहा. याचिका में कहा गया कि ये एक्ट हिंदुओं समेत सिखों, बौद्ध धर्म के लोगों को अपने धर्म स्थल पर अवैध कब्जा करने के खिलाफ दावे से रोकने वाला है. इस बारे में सुप्रीम कोर्ट वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर करते हुए इस एक्ट को चुनौती दी. उन्होंने कहा कि आक्रामणकारियों ने कई धर्मों के पूजा स्थलों को तोड़कर अपने धर्म स्थल बना दिए. अब कानून बनाकर हमें उन पूजा स्थलों का सच जानने से रोकना असंवैधानिक है.
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