क्या है प्लैनेट 9 का रहस्य- एक ग्रह, ब्लैकहोल या फिर कोरी कल्पना

वैज्ञानिकों प्लैनेट 9 या उसके जैसे पिंड के अस्तित्व के अप्रत्यक्ष संकेत मिलते रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वैज्ञानिकों प्लैनेट 9 या उसके जैसे पिंड के अस्तित्व के अप्रत्यक्ष संकेत मिलते रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

काफी समय से हमारे सौरमंडल (Solar System) के रहस्मयी नौवें ग्रह (Planet 9) की चर्चाएं हो रही हैं. कोई इसे ग्रह है तो कोई ब्लैक होल (Black Hole) बताता है. लेकिन अभी तक यह पिंड दिखाई ही नहीं दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 20, 2021, 6:16 PM IST
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हमारे सौरमंडल (Solar System) में इस समय 8 ग्रह (Planets)  हैं. वैज्ञानिकों ने पहले प्लूटो (Pluto) को ग्रह का दर्जा दे रखा था. तब सूर्य के नौ ग्रह हुआ करते थे. लेकिन बाद में उससे ग्रह का दर्जा छीन लिया गया और सौरमंडल के 8 ग्रह रह गए, लेकिन इसके साथ ही सौरमंडल के नौवें ग्रह (Planet 9) की तलाश भी शुरू हो गई. सदियों से इस ग्रह की खोज की जा रही है. इसमें वैज्ञानिकों और खगलोविदों के अलावा कई लेखक भी उलझे रहे. लकिन हाल के कुछ सालों में संभावित नौवें ग्रह के मजबूत संकेत मिले हैं, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह रहस्मयी पिंड वास्तव में ग्रह है, ब्लैक होल (Black Hole) है या फिर सिर्फ एक वैज्ञानिक कल्पना.

यह माना जाता है इसके बारे में

प्लैनेट 9 के नाम से मशहूर यह नौवां ग्रह के बारे में वैज्ञानिक यह प्रमाणित करने का प्रयास कर रहे हैं कि हमारे सौरमंडल में इस रहस्यमय ग्रह का अस्तित्व है. माना जाता है कि इसका भार पृथ्वी के भार से दस गुना ज्यादा है और यह किसी बर्फीली सामग्री से बना है जिससे नेप्च्यून और यूरेनस बने हैं. इस ग्रह की वैसा ही क्रोड़ है जैसे इन दोनों ग्रहों की है. इन खगोलविदों का मानना है कि यह काइपर घेरे के बाहर स्थित माना जा रहा है.

ऐसे हुई इसके जिक्र की शुरुआत
दिलचस्प बात यह है कि अभी तक के अवलोकनों में इस ग्रह को नहीं देखा जा सका है, लेकिन बहुत से खगोलविद इसकी उपस्थिति को लेकर बहुत आश्वस्त हैं. इस ग्रह की अवधारणा की शुरुआत 19वीं सदी से मानी जा रही है जब एक यात्रा वृत्तांत लेखक ने एक रहस्यमयी नौवें ग्रह,  का होने का विश्वास जताया था. 20वीं सदी में प्लूटो को नौवें ग्रह का दर्जा दिया गया लेकिन 2006 में उसे बौना ग्रह करार दिया गया.

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सौरमंडल (Solar System) के नौवें ग्रह (Planet 9) को लेकर कई तरह के संकेत मिलने की बात होती रही है. . (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


तो क्या हवा में ही हो रही है प्लैनेट 9 की बात



साल 1989 में नासा के वायजर अभियान में काइपर घेरे को खोजा गया. इसी से साबित हुआ कि प्लूटो वास्तव में ग्रह नहीं बल्कि बौना ग्रह है. लेकिन इससे हुए नई खोजों ने सुझाया कि काइपर के बेल्ट के बाहर एक ग्रह या दूसरा खगोलीय पिंड हैं. 2016 में अपने अवलोकनों के आधार पर दो वैज्ञानिकों माइक ब्राउन और कोन्सटेंटिन बैटिजिन ने दावा किया कि नौवां ग्रह पृथ्वी से दस गुना भारी होना चाहिए जो काइपर बैलेट में बौने ग्रहों के गुरुत्व खिंचाव के लिए जिम्मेदार हैं.

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तो है क्या है, इस पर विवाद

इस खिंचाव के बहुत सी व्याख्या दी जा रही हैं. वहीं इस पिंड के दिखाई ना देने की वजह यह भी बताई जा रही है कि वास्तव में यह ग्रह है ही नहीं. इसी कड़ी में इसे एक प्रिमॉर्डियल ब्लैक होल (primordial black hole) बताया जा रहा है. प्रिमॉर्डियल ब्लैक होल आकार में एक ग्रह की ही तरह होते हैं और पकड़ में नहीं आ पाते हैं. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि कोई प्रिमॉर्डियल ब्लैक होल ही काइपर घेरे के पिंडों की कक्षा को प्रभावित कर रहा है.

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बताया जाता है कि नौवां ग्रह (Planet 9) सौरमंडल के छोर के छोटे ग्रहों की कक्षा प्रभावित कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


भ्रम भी हो सकता है

हालिया शोध यह भी बताते हैं कि प्लैनेट 9 की अवधारणा भ्रम भी हो सकती है. इस मत के आलोचकों के अध्ययन में बताया गया है कि प्लैनेट 9 का प्रमाण, वास्तव में ट्रांस नेप्च्यूनियन ऑब्जेक्ट (TNO) का समूह है जिसके बारे में कहा जाता है कि उस पर इस ग्रह का प्रभाव पड़ रहा है. यह समूह इस लिए दिखा है क्योंकि टेलीस्कोप उसी दिशा में देख रहे थे.एक अध्ययन का कहना है कि TNO की कक्षाएं सामान्य बर्ताव कर रही हैं.

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इस अध्ययन पर भी सवाल उठाए गए हैं. जिससे मामले पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है. शोधकर्ताओं को वेरा सी रूबिन वेधशाला से बहुत उम्मीदें हैं जो चिली में बन रही है और उससे कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.
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