वैज्ञानिकों को मिला एक Hot Jupiter, दूसरी पृथ्वी खोजने में होगा सहायक

शनि का टाइटन अब 11 सेमी प्रतिवर्ष की दर से शनि से दूर जा रहा है.
शनि का टाइटन अब 11 सेमी प्रतिवर्ष की दर से शनि से दूर जा रहा है.

वैज्ञानिकों ने सुदूर अंतरिक्ष में गुरु (Jupiter) ग्रह जैसा एक और ग्रह खोजा है जो अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं के बारे में अहम जानकारी हासिल करने में मदद कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2020, 1:46 PM IST
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नई दिल्ली. ब्रह्मांड (Universe) में पृथ्वी (Earth) के अलावा भी जीवन की संभावनाओं की खोज जारी है. इस खोज में दुनिया के वैज्ञानिक दो तरह से लगे हुए हैं. एक तो वे ग्रह जहां जीवन पहले से ही हो और दूसरे वे ग्रह जहां अभी तक जीवन नहीं हो लेकिन पनपने की संभावना हो. दूसरी कड़ी में वैज्ञानिकों को एक ऐसे ग्रह के अध्ययन से उम्मीदें हैं जहां धातुएं तक पिघली अवस्थाओं में हैं.

हमारे सौर मंडल के एक ग्रह से मिलता जुलता ग्रह है यह
वैज्ञानिकों को हमारे सौरमंडल के एक ग्रह बृहस्पति या गुरु (Jupiter) के जैसा ग्रह मिला है. इस ग्रह के वायुमंडल में पिघली हुई घातुएं मिली है. MASCARA-2b नाम का यह ग्रह अपने सूर्य के बहुत पास है. यह ग्रह पृथ्वी से 4.31 क्वाड्रिलियन किलोमीटर दूर है. यह शीशे जैसा ग्रह येल स्थित एक्सट्रीम प्रीसीशन स्पोक्ट्रोमीटर (EXPRESS) की पहली खोज है.

क्यों उत्साहित हैं इस खोज से वैज्ञानिक
वैज्ञानिक इस ग्रह की खोज से बहुत उत्साहित हैं क्योंकि इस ग्रह का अध्ययन उनके लिए अहम हो सकता है क्योंकि इससे उन्हें उस तरह के ग्रह खोजने में मदद मिल सकती है जिनमें पृथ्वी की तरह जीवन की संभावनाएं हों.



Universe
अंतरिक्ष में बहुत से ऐसे गर्म ग्रह है जो यह जानकारी दे सकते हैं कि आगे चल कर उनमें जीवन की क्या संभावनाएं हैं.


नई तकनीक विकसित करने के लिए लैब की तरह है यह ग्रह
येल की खगोलविद डेबरा फिशर का कहना है, “गर्म जूपिटर ऐसी विश्लेषण तकनीक विकसित करने के लिए आदर्श लैब की तरह होती हैं जो सक्षम ग्रहों में जीवन के संकेत ढूंढने में मदद कर सकते हैं.”

क्यों हॉट जूपिटर्स कहे जाते हैं ऐसे ग्रह
इन ग्रहों के गुरु के जैसे होने के कारण इन्हें हॉट जूपिटर्स कहा जाता है. इस तरह का पहला ग्रह 25 साल पहले खोजा गया था. MASCARA 2b  एक खास स्पैक्ट्रोमीटर EXPRESS की मदद से खोजा गया था जो एरीजोना में 4.3 मीटर लोवेल डिस्कवरी टेलीस्कोप में बनाया गया है. इसका मूल उद्देश्य पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज ही है, लेकिन सुदूर अन्य ग्रहों के बारे में खास जानाकारी जुटा सकता है जो इसके उद्देश्य में उपयोगी हो सकती हैं.

यह खास बात है यहां के वायुमंडल में
ये ग्रह गुरु ग्रह की तरह गैस से बने होते हैं लेकिन उनकी सतह का तापमान बहुत ज्यादा होता है. मसकारा 2 बी की सतह का तापमान 17.26 डिग्री है जो कि पानी के क्वथनांक यानी कि बॉयलिंग प्वाइंट से 20 गुना ज्यादा होता है. इसी वजह से वहां के वायुमंडल में भी ज्यादातर पिघली हुई धातुएं पाई जाती हैं.

Planet
दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना तलाशना एक कठिन काम है..


क्यों पिघली धातु होती है इसके वायुमंडल में
फिशर का मानना है कि मासकारा 2बी के वायुमंडल पर वाष्पीकृत धातुओं का पाया जाना बहुत उत्साहित करने वाला वैज्ञानिक नतीजा है. इसकी वजह यह है कि वह अपने सूर्य के गुरु ग्रह के मुकाबले 100 गुना ज्यादा करीब है.

यहां सुबह शाम अलग होता रासायनिक संरचना
एक्सप्रेस उपकरण से अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता जेन्स होएजमेकर्स को यह पता करने में कामयाबी मिली कि इस ग्रह पर सुबह और शाम को रासायानिक संरचना अलग हो जाती है. उन्होंने कहा, “इन रासायानिक पड़तालों से पता चलता है कि इस वायुमंडल में किस तरह के अणु होंगे. इसके अलावा यह इनसे वायुमंडल में गैसों के प्रवाह की प्रभाविकता बारे में भी पता चल सकता है.

क्या राह मिलेगी इस खोज के बाद
वैज्ञानिक इस बात की उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें इस अध्ययन से उन्हें किसी ग्रह के निर्माण के शुरुआती दौर के बारे में जानने में मदद मिलेगी. शोधकर्ता यह भी जान पाएंगे कि वे कौन से कारक हैं जो बात में किसी ग्रह के वायुमंडल के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. और वे यह भी  जान सकते हैं कि किस ग्रह में भविष्य में पृथ्वी जैसे ग्रह बनने की ज्यादा संभावनाएं हैं.

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