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5 अप्रैल के वो 9 मिनट, नहीं हो सकती ग्रिड में गड़बड़ी, यह है वजह

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: April 4, 2020, 6:57 PM IST
5 अप्रैल के वो 9 मिनट, नहीं हो सकती ग्रिड में गड़बड़ी, यह है वजह
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कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लोगों से पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट तक बिजली बंद करने और दीया जलाकर, टार्च या मोबाइल से रोशनी करने की अपील की है. जिस पर कई लोगों बिजली ग्रिड फेल होने की आशंका हुई. लेकिन इसकी संभावना बहुत ही कम है.

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नई दिल्ली:  कोरोना वायरस के चलते देश भर में चल रहे लॉकडाउन के मद्देनजर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देश के नाम संदेश दिया. अपने इस संदेश में उन्होंने लोगों से रविवार रात 5 अप्रैल को रात 9 बजे 9 मिनट तक बिजली बंद कर दिया जलाने, टार्च या मोबाइल से रोशनी करने की अपील की है.  इसको लेकर कई लोगों ने आशंका जताई कि बिजली बंद करने से क्या पावर ग्रिड फेल हो सकती है. इस बात की संभावना कम ही है.

बिजली विभाग है पूरी तरह से चौकस
इस आशंका को लेकर  कई प्रदेश के बिजली ग्रिड प्रबंधक अब इस बात की तैयारी में हैं कि किसी भी हालत में ग्रिड फेल न हो. वे तमाम उन संभावनाओं का आंकलन करने में भी लग गए कि क्या वाकई में ऐसी परिस्थिति आ भी सकती है कि ग्रिड फेल हो जाए और वे इस तरह की स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहें. हालंकि ऐसा होने की संभावना नहीं के बराबर ही है.

बहुत ज्यादा नहीं है मांग



इस मामले में राज्यों के लोड डिस्पैच सेंटर्स (SLDC) अलर्ट हो गए हैं  और हर संभव विपरीत परिस्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक भारत में फिलहाल 370 गीगा वाट्स की क्षमता है  जबकि आमतौर पर इस पर औसतन 150 गीगा वाट्स का पावर मांग का बोझ होता है. देश में बिजली ग्रिड के संचालन की जिम्मेदारी पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड, पोसोको (POSOCO) के जिम्मे हैं.



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पीएम मोदी ने 5 तारीख की रात 9 बजे 9 मिनट तक घर की लाइट बंद करने की गुजारिश की है (फाइल फोटो)


उतार चढ़ाव पैदा कर सकते हैं समस्या
ग्रिड में उतार चढ़ाव के कारण कोई गड़बड़ी न हो यह जिम्मेदारी भी पोसोको की ही है. मांग और आपूर्ति के आधार पर पोसोको अपनी फ्रीक्वेंसी को 50 हर्ट्स के आसपास कायम रखती है. जो उस समय के बिजली के भार के संतुलन के परिलक्षित करती है.

क्या होगा अगर फ्रीक्वेंसी बढ़ी तो
अगर यह फ्रीक्वेंसी बढ़ी तो हमारे घर का वोल्टेज बढ़ जाएगा. और कम होने पर हमारे घर का वोल्टेज कम हो जाएगा. मांग बढ़ने या गड़बड़ी होने से मांग घटने के कारण ऑपरेटर को ही यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि ऑटोमेटिक केरक्टिव रिस्पॉन्स इससे निपट ले और नाकाम न हो. नहीं तो जल्दी ही (बहुत ही कम समय में) मांग घटा कर या उत्पादन बढ़ा कर इसे ठीक करना होता है.

तो क्या तब हो सकती है दिक्कत
आशंका यह है कि रविवार रात 9 बजे से पहले मांग अचानक बहुत ही कम हो सकती है और 9 बजकर 9 मिनट के बाद एकदम से बहुत बढ़ सकती है. चिंता यही जताई जा रही है कि इन दोनों समय पर ग्रिड फ्रीक्वेंसी सीमा से बाहर न चली जाए. ऐसे में देश भर के सभी जनरेटर्स को ग्रिड कोड के मुताबकि रिस्पॉन्स देना होगा. इस दौरान 10 से 15 हजार मेगावाट का उतार चढ़ाव आ सकता है.

Lockdown
देश भर में इस समय 14 तारीख तक लॉकडाउन की स्थिति है.


कोई बहुत बड़ा दबाव नहीं होगा होगा यह
घरेलू भार 30-32 प्रतिशत होता है, जबकि  औद्योगिक भार 40 प्रतिशत तो कृषि भार 20 प्रतिशत, और व्यावसायिक भार 8 प्रतिशत होता है. देखा जाए तो इस उतार चढ़ाव का बड़ा असर नहीं होगा जैसा कि आशंका जताई जा रही है.

लेकिन फिर भी घबराने की बात नहीं
ऑपरेटर्स को अति विपरीत परिस्थिति में झटका या जर्क की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन ऐसी संभावना नहीं है क्योंकि पहले ही घरेलू मांग बहुत कम हो गई है. होटल, फैक्ट्री मॉल्स रेलवे स्टेशन आदि सार्वजनिक जगहें बंद हैं. इससे मांग करीब 20 प्रतिशत पहले ही गिर चुकी है.

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देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 68 पहुंच गई है


एक तर्क यह भी 
दूसरी तरफ बिजली विभाग भी आश्वसन दे चुके हैं कि 5 अप्रैल को समस्या नहीं आएगी. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अर्थ अवर में कोई समस्या नहीं आती तो रविवार को समस्या कैसे आ सकती है.

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First published: April 4, 2020, 6:57 PM IST
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