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एक 'हलवाई' ने बनाई है भारत की ये बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटी, जहां पढ़ते हैं 35 देशों के स्टूडेंट्स

एक 'हलवाई' ने बनाई है भारत की ये बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटी, जहां पढ़ते हैं 35 देशों के स्टूडेंट्स

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का ओपन एयर थियेटर

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का ओपन एयर थियेटर

भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आयोजन करने वाली यूनिवर्सिटी अपने आप में बेहद खास है. इसकी सफलता का किस्सा किसी में भी उत्साह भरने को काफी है.

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को पंजाब के दौरे पर हैं. यहां उन्होंने जालंधर में 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया और इस अवसर पर स्टूडेंट्स को संबोधित भी किया. इसके बाद प्रधानमंत्री गुरदासपुर रवाना हो जाएंगे जहां वे एक आम सभा को संबोधित करेंगे. इस बार की भारतीय विज्ञान कांग्रेस का थीम ‘भविष्य का भारत - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ है. यह तीन से सात जनवरी तक चलेगी. इसका आयोजन लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से किया जा रहा है. भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आयोजन करने वाली यूनिवर्सिटी अपने आप में बेहद खास है. इसकी सफलता का किस्सा किसी में भी उत्साह भरने को काफी है. पढ़िए लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की सफलता की कहानी:

    एक छोटे से गांव से जुड़ी हैं जड़ें
    भारत में सफलता पाने के बाद लोगों से सुनने को मिलता है, लड्डू खिलाइये. और मंगाए जाते हैं लड्डू. लेकिन सुजातनगर के मित्तल परिवार के साथ ऐसा नहीं है. उनके जीवन में लड्डू पहले आए और सफलता की मिठास बाद में. सुजातनगर, जयपुर के पास एक छोटा सा गांव है. यह मित्तल परिवार आज लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) का मालिक है. इस यूनिवर्सिटी में आज 30,000 से ज्यादा स्टूडेंट्स एनरोल हैं. साथ ही पूरे पंजाब में इस परिवार के कई सारे बिजनेस अभी शुरू होने हैं. लेकिन आज भी उनका परिवार लवली हलवाई परिवार के नाम से फेमस है. और उन्हें इस पर गर्व है.



    विभाजन के बाद भारत आया परिवार
    अशोक मित्तल के पिता बलदेव राज मित्तल 1947 में पाकिस्तान के सियालकोट से जालंधर आए और यहां रक्षा ठेकेदार का काम करने लगे. एक बार उन्होंने इंडिया टुडे पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'हमारा परिवार कभी भी प्रयोग करने, नए रास्तों पर चलने का जोखिम उठाने से नहीं बचता था.'

    बलदेव राज ने 1961 में अपने एक मित्र से 500 रुपये का कर्ज लेकर जालंधर में मिठाई की दुकान खोली. इसका नाम रखा गया लवली स्वीट्स. अशोक मित्तल ने बताया था कि उनकी पहचान बनी साफ-सुथरा और ढकी हुई मिठाइयां. जिससे उनकी दुकान पॉपुलर होने लगी और 1969 तक शहर में उन्होंने तीन दुकानें खोल लीं. हालांकि यह आसान नहीं रहा और अशोक के अनुसार उनके पिता बलदेव राज ने इसके लिए बहुत मेहनत की.

    अशोक मित्तल


    बजाज स्कूटर और मारुति कार ने बढ़ाया कारोबार
    अशोक बताते हैं कि उन्होंने कारोबार के गुर भी अपने पिता से ही सीखे. उनसे सीखने के लिए वे हमेशा उनके साथ-साथ ही रहते थे. अशोक बताते हैं कि 1991 में जब उन्होंने बजाज स्कूटर की डीलरशिप के लिए अप्लाई किया था तो बजाज ने उनकी एप्लिकेशन यह कहकर खारिज कर दी थी कि बजाज की हालत इतनी भी खराब नहीं हुई है कि लड्डू बेचने वालों को अपनी डीलरशिप दें. अशोक के ही अनुसार लेकिन जब बजाज वाले जालंधर आए और उन्हें हमारी कारोबारी क्षमता का पता चला तो उन्होंने हमें डीलरशिप दे दी.

    इसके बाद परिवार को 1996 में मारुति की डीलरशिप भी सौंप दी. जिसे पंजाब में बहुत सफलता मिली. वे कहते हैं कि पंजाब में अव्वल होने के बाद हम पूरे उत्तर भारत में फैल गए.

    मंदिर या धर्मशाला के बजाए खोली यूनिवर्सिटी
    बिजनेस चल निकलने के बाद परिवार ने समाज की बेहतरी का लक्ष्य लेकर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) की स्थापना की. वे कहते हैं कि उन्होंने धर्मशाला, मंदिर या वृद्धाश्रम खोलने के बारे में भी सोचा था लेकिन शिक्षा का महत्व समझते हुए उन्होंने यूनिवर्सिटी के बारे में सोचा. अशोक बताते हैं कि प्राइवेट स्कूलों का तंत्र देश में पहले से ही मजबूत था लेकिन उच्च शिक्षा में ठहराव नहीं आया था, इसलिए उन्होंने ऐसा फैसला लिया.

    2001 में उन्होंने अपना संस्थान खोला और उसे पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी (PTU) से संबद्ध करा दिया. उसी साल यूनिवर्सिटी के तीन शीर्ष स्थानों पर इसी यूनिवर्सिटी के छात्र रहे, जिसके बाद से यूनिवर्सिटी चर्चित हो गई.

    600 एकड़ में फैली यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं 30 हजार स्टूडेंट्स
    इसके बाद 2003 में उन्होंने खुद यूनिवर्सिटी के दर्जे के लिए पंजाब सरकार के पास अप्लाई किया. 2005 में LPU को यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया. यहां वर्तमान में दुनिया के 35 देशों से ज्यादा के छात्र अध्ययन कर रहे हैं. वहीं कुल छात्रों की संख्या 30 हज़ार से भी ज्यादा है. अशोक कहते हैं कि हमारे लिए संख्या महत्व नहीं रखती, हमारा लक्ष्य छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का कौशल देना है.

    इस यूनिवर्सिटी की खासियत इसका कैंपस भी है, जो 600 एकड़ के इलाके में फैला हुआ है. यहां 3,500 से ज्यादा एकेडमिक स्टाफ काम करता है. UGC मान्यता प्राप्त इस यूनिवर्सिटी में डिप्लोमा, ग्रेजुएशन से लेकर डॉक्टरेट तक 200 से ज्यादा कोर्स संचालित होते हैं.

    अमेरिका, इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ब्राजील, चीन, स्पेन और पोलैंड की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज के साथ LPU की साझेदारी है. 2013 में इस यूनिवर्सिटी को बेस्ट प्राइवेट यूनिवर्सिटी का अवॉर्ड मिल चुका है.

    इसके अलावा LPU ने कैंपस के आसपास के 50 से ज्यादा गांवों को गोद ले रखा है. यहां वे स्वास्थ्य और शैक्षणिक शिविर लगाते हैं. यह समूह लुधियाना जेल के कैदियों को भी नमकीन आदि खाद्य पदार्थ बनाने सिखाता है. रीटेल के क्षेत्र में उतरने की योजना भी बना रहा है.

    यह भी पढ़ें: कुंभ विशेष: महिलाओं को नागा साधु बनने के दौरान देनी पड़ती हैं ये कठिन परीक्षाएं

    Tags: Bajaj Group, Jalandhar, Maruti Alto 800, Punjab, Science, UGC-NET exam, University education, University grant commission

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