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Smiling Buddha ही क्यों रखा गया पहले पोखरण परमाणु परीक्षण का नाम

पोखरण में हुए पहले परमाणु परीक्षण का नाम ऑपरेशन स्माइलिंग (Operation Smiling Buddha) बुद्धा रखने के पीछे एक ऐतिहासिक किस्सा है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

पोखरण में हुए पहले परमाणु परीक्षण का नाम ऑपरेशन स्माइलिंग (Operation Smiling Buddha) बुद्धा रखने के पीछे एक ऐतिहासिक किस्सा है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

भारत (India) में 18 मई 1974 में पोखरण (Pokhran I)का पहला परमाणु परीक्षण हुआ था. इस परीक्षण का नाम ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा (Operation Smiling Buddha) रखा गया था. इस परीक्षण को तत्कालीन वैश्विक राजनैतिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा कदम माना गया था और इसका संबंध भारत के इतिहास की एक छोटी से कहानी से भी है जिसमें बुद्ध की एक विशेष प्रतिक्रिया की भी प्रासंगिकता है.

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    भारत (India) आज एक परमाणु शक्ति से संपन्न देश है. आज से 48 साल पहले 18 मई 1974 को भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण (Nuclear Tests) राजस्थान की पोखरण टेस्ट रेंज में किया था. भारत ने इस परीक्षण को शांतिपूर्ण उपयोग के लिए किया गया परमाणु परीक्षण करार देते हुए कहा का वह इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए नहीं करेगा.  इस दिन बुद्ध पूर्णिमा का दिन था. और इस नाते इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा (Operation Smiling Buddha) रखा गया था. लेकिन कम लोग जानते हैं कि बुद्ध की एक कहानी भी इस ऑपरेशन से जोड़कर देखी जाती है.

    भाभा आणविक शोध केंद्र
    यह परीक्षण भारत के प्रमुख नाभकीय शोध संस्थान भाभा आणविक शोध केंद्र  (BARC) के निदेशक राजा रमन्ना के पर्यवेक्षण में हुआ था. यह पूरा ऑपरेशन 7 सितंबर 1972 को ही बीएआरसी के द्वारा ही शुरू किया गया और उसी ने इसे पूरी तरह से अंजाम  दिया था. फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार यह परीक्षण 8-12 किलोटन टीएनटी के विस्फोट के बराबर था.

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत
    यह परीक्षण संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों के के बाहर किया गया पहला परीक्षण था उस समय भी इस परीक्षण की भनक अमेरिका और दुनिया की अन्य गुप्तचर संस्थों को नहीं लगने दी थी. इस परीक्षण से भारत अमेरिका, सेवियत यूनियन, फ्रांस, और चीन के बाद सफलता पूर्वक परमाणु परीक्षण करने वाला छठा देश बन गया था.इस परीक्षण की वजह से अमेरिका और अन्य बड़े औद्योगिक देशों ने भारत पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. उनका दावा था इससे परमाणु प्रसार को बढ़ावा मिलेगा.

    काफी पहले से चल रहे थे प्रयास
    भारत को परमाणु संपन्न बनाने के प्रयास तो आजादी के पहले से ही शुरू हो गए है. आजादी के बाद जब भारत परमाणु ऊर्जा का उपयोग करने के लिए आणविक केंद्र बनाए, तब भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संसद में कहा था कि भारत अगर सक्षम होने के बाद भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.

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    परमाणु परीक्षण के कार्यक्रम में तेजी भारत पाक 1971 के युद्ध के बाद इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के कार्यकाल में आई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    इंदिरा गांधी के कार्यकाल में आई तेजी
    बाद में जब भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण उपयोग पर ही जोर दिया गया था. लेकिन इस कार्यक्रम में तेजी आई इंदिरा गांधी के सत्ता में आने के बाद. उन्होंने ही परमाणु क्षमता के विकास का कार्यक्रम को आगे बढ़ाया. इस परीक्षण में 75 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक टीम शामिल हुई थी जिसकी अगुआई राजा रमन्ना, पीके अयंगार, राजगोपाल, चिंदबंरम और अन्य वैज्ञानिकों ने की थी. जिन्होंने 1967 से 1974 तक काम किया था.

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    भारत पाक युद्ध
    1971 में भारत पाक युद्ध और बांग्लादेश की आजादी के संघर्ष के दौरान अमेरिकी सरकार ने एक युद्धपोत बंगाल की खाड़ी में तैनात कर दिया था. सोवियत संघ जो उस समय परोक्ष रूप से भारत के साथ था, ने भी एक सबमरीन यानि पनडुब्बी भेज दी थी. सोवियत संघ की प्रतिक्रिया ने भारत को परमाणु शक्ति का अहसास दिलाया था. इससे पहले कि बात और बिगड़ती, युद्ध का निर्णय हो चुका था.

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    पोखरण (Pokhran) में भी भारत ने 1974 और उसके बाद 1998 में परमाणु परीक्षण किए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Rudra Narayan Mitra Shutterstockshutterstock)

    मगध वैशाली और बुद्ध
    इस घटना, अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत की स्थिति ने भारत को कई सबक दिए और भारत ने परमाणु परीक्षण करने का फैसला किया. लेकिन  बहुत कम लोग जान सके कि बुद्ध के साथ मुस्कुराहट जोड़ने की क्या कहानी थी. भारत के इतिहास में बुद्ध के काल में ही शक्तिशाली मगध वैशाली राज्य पर हमला कर दिया था. मगध के पास एक राजशाही की विशाल सेना थी, वैशाली में एक तरह का लोकतंत्र था और वहां  लोग यही तय करते रह गए की लड़ना है या नहीं, कैसे लड़ना है किसे लड़ना है.

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    इसका नतीजा यही हुआ कि मगध ने वैशाली पर भारी खून खराबा करते हुए कब्जा कर लिया. इस पर बुद्ध की प्रतिक्रिया मायूसी और नाराजगी का भाव के रूप में मिली. उनके भाव का अर्थ यही था कि शांति कायम रखने के लिए राज्य को युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार होना चाहिए. 1964 से भारत वैशाली की तरह और चीन मगध की तरह था. और परमाणु परीक्षण  की सफलता मतलब यही था अगर बुद्ध होते वे मुस्कुरा रहे होते इसीलिए इस ऑपरेशन का नाम स्माइलिंग बुद्धा रखा गया

    Tags: History, India, Research, Science

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