क्या है पॉलीग्राफ टेस्ट, जो पकड़ सकता है रिया चक्रवर्ती का झूठ?

क्या है पॉलीग्राफ टेस्ट, जो पकड़ सकता है रिया चक्रवर्ती का झूठ?
पॉलीग्राफ टेस्ट के तहत झूठ पकड़ने के लिए कई किस्म की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है (सांकेतिक फोटो)

Sushant Singh Rajput Death Case: रिया चक्रवर्ती के पॉलीग्राफ टेस्ट (polygraph test of Rhea Chakraborty) से सुशांत केस में काफी मदद मिल सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 1:47 PM IST
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सुशांत सिंह राजपूत की मौत की गुत्थी और भी उलझ गई है. अब इसमें ड्रग एंगल भी दिख रहा है. कथित तौर पर रिया चक्रवर्ती ड्रग रैकेट से जुड़ी हुई थीं और सुशांत को भी ड्रग्स दिए जाते थे. मामले की पेचदगी देखते हुए सीबीआई (Central Bureau of Investigation) रिया चक्रवर्ती का पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने की बात कर रही है. उम्मीद है कि इस टेस्ट से रिया के सच और झूठ में फर्क थोड़ा आसान हो जाएगा. जानिए, क्या है ये टेस्ट और कैसे खोलेगा राज.

क्या हैं पॉलीग्राफ, नारको एनालिसिस टेस्ट?
इन परीक्षणों के ज़रिए किसी व्यक्ति का झूठ पकड़ने के लिए कई किस्म की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. कार्डियो कफ को संवेदनशील इलेक्ट्रोड्स भी कहा जाता है और इसे आरोपी के शरीर के कई पॉइंट्स पर लगाया जाता है जिससे उसका ब्लड प्रेशर, सांस या नब्ज़ की गति, खून के प्रवाह और पसीने की ग्रंथियों में बदलाव को जांचा जा सकता है. इस तकनीक का मकसद ये जांचना होता है कि आरोपी सच बोल रहा है या झूठ या वह सवाल का जवाब नहीं जानता.


नारको​ एनालिसि​स टेस्ट में केमिकल तकनीक का इस्तेमाल होता है. इसमें आरोपी को सोडियम पेंटोथैल ड्रग का एक इंजेक्शन दिया जाता है ताकि वह सम्मोहन ​जैसी स्थिति में पहुंच जाए और उसकी कल्पनाशीलता तकरीबन रुक जाए. इस स्थिति में चूंकि वह कल्पना नहीं कर पाता इसलिए माना जाता है कि वह सच बोल रहा है. इस ड्रग को 'ट्रुथ सीरम' भी कहा जाता है, जो सर्जरी के कुछ मामलों में एनिस्थीसिया के तौर पर भी इस्तेमाल होती है.



इसके लिए सबसे पहले जिसका टेस्ट हो रहा है, उसका भी कंसेंट यानी इजाजत लेनी होती है. इसके बाद ही टेस्ट की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. साथ ही ये पक्का करना भी जरूरी है कि जिसकी जांच हो रही है, वो मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ हो.

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क्या है इस तकनीक का इतिहास?
19वीं सदी में एक इतालवी क्रिमिनोलॉजिस्ट सीज़ार लोम्बोर्सो ने पूछताछ के दौरान अपराधी के ब्लड प्रेशर में आने वाले अंतर को जांचने वाली एक मशीन बनाई थी. इसी तरह की तकनीक पर काम होता रहा और 1914 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक विलियम मार्स्ट्रन ने ऐसी ही लेकिन कुछ एडवांस मशीन बनाई और उसके बाद कैलिफोर्निया पुलिस के जॉन लार्सन ने 1921 में.

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क्यों है इस टेस्ट को लेकर विवाद?
दुनियाभर के इतिहास में इन टेस्ट्स को लेकर जो परिणाम सामने आए हैं, उनमें 100 फीसदी सटीक नतीजे नहीं मिले हैं इसलिए इनकी विश्वसनीयता पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जाता.

कथित तौर पर रिया चक्रवर्ती ड्रग रैकेट से जुड़ी हुई थीं और सुशांत को भी ड्रग्स दिए जाते थे


भारत में होता है इन परीक्षणों का इस्तेमाल?
इन परीक्षणों को भारत में केस सुलझाने में मदद के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके लिए कानूनी प्रावधान हैं और बगैर मंज़ूरियों के ये टेस्ट नहीं किए जा सकते. हाल में उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप मामले में ये परीक्षण किए गए थे. इससे पहले अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में आरोपी इंद्राणी मुखर्जी के मामले में मई 2017 में ये टेस्ट किए गए थे.

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इससे पहले नोएडा के चर्चित आरुषि व हेमराज हत्याकांड में आरोपी डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार के मामले में ये टेस्ट किए गए थे. उनके कंपाउंडर कृष्णा का नार्को टेस्ट से जुड़ा एक वीडियो लीक हो जाने पर हंगामा भी हुआ था. वैसे बता दें कि ये मर्डर मिस्ट्री आज तक रहस्य ही बनी हुई है. कम से कम पॉलीग्राफ टेस्ट से तो इसमें कोई मदद नहीं मिल सकी थी. यही वजह है कि बहुत से लोग CBI की इस बात पर भी संदेह जता रहे हैं.
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