पाकिस्तान में हर साल 1000 से ज्यादा लड़कियों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन

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Updated: March 25, 2019, 2:44 PM IST
पाकिस्तान में हर साल 1000 से ज्यादा लड़कियों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन
पाकिस्तानी हिंदुओं का प्रदर्शन

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत मानवाधिकार के लिहाज से बहुत बदतर है. वो लगातार हिंसा का शिकार बनते हैं.

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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में होली से एक दिन पहले दो नाबालिग हिंदू बहनों का अपहरण कर लिया गया. इसके बाद जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराकर उनकी शादी करा दी गई.  इसके बाद दोनों नाबालिग हिंदू लड़कियों रवीना (12) और रीना (15) ने पंजाब की एक कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर सुरक्षा की मांग की है.
पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की ये कोई पहली घटना नहीं है. तकरीबन रोज ही वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ इस तरह की घटनाएं होती हैं. हालांकि बहुत कम घटनाएं सुर्खियों का रूप ले पाती हैं, क्योंकि ज्यादातर को सरकार और उसका सिस्टम ही अपने स्तर पर दबा देता है.
पाकिस्तान से हर साल हजारों हिंदू परिवार भागकर भारत में ना केवल शरण लेते हैं बल्कि भारतीय नागरिकता की गुहार भी लगाते हैं. पिछले पांच सालों में भारत सरकार ने काफी बड़ी संख्या में पाकिस्तान से आए शरणार्थी हिंदुओं को नागरिकता दी है.
भारत में एक अनुमान के तौर पर दो लाख से ज्यादा हिंदू शरणार्थी देश के विभिन्न हिस्सों में शरण लिए हुए हैं. अकेले राजस्थान में ही उनकी संख्या सवा लाख के आसपास है. वो अपने देश नहीं लौटना चाहते.

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पाकिस्तान में कितने अल्पसंख्यक
पाकिस्तान सरकार के नेशनल डेटा बेस एंड रजिस्ट्रेशन अथारिटी में दर्ज ताजातरीन आंकडो़ं के अनुसार वहां अल्पसंख्यकों की आबादी
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हिंदू             - 1,414,527
ईसाई          - 1,270,051
अहमदी       - 125,681
बहाई           - 33,734
सिख           - 6146
पारसी         - 4020
बौद्ध           - 1492
अन्य           - 66,898

- ताजातरीन पाकिस्तान जनगणना में हिंदुओं की आबादी 1.2 फीसदी और क्रिश्चियन की जनसंख्या 1.9 फीसदी दर्ज की गई है.

पाकिस्तान से भागे हिंदू शरणार्थी


- वर्ष 2011 में इश्तियाक अहमद की एक किताब पब्लिश होकर आई, जिसमें पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों की आबादी को 10 फीसदी बताया गया है. इस किताब के अनुसार पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई और अहमदी खुद के 40लाख होने का दावा करते हैं.
- हकीकत में पाकिस्तान में बहुत तेजी से हिन्दू, बौद्ध और सिखों में कमी आ रही है.

1941 में क्या स्थिति थी
- उस समय की जनगणना के अनुसार पाकिस्तान वाले इस भूभाग पर बंटवारे से पहले 5.9 करोड़ गैर मुस्लिम रहते थे. बंटवारे के दौरान बड़े पैमाने पर हिंदुओं और सिखों का पलायन भारत की ओर हुआ. हिंदुओं की आबादी तब वहां 24 फीसदी के आसपास थी. अब हालत एकदम बदल गई है.

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पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों पर रिपोर्ट
- अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता  संबंधी अमेरिकी कमीशन की वर्ष 2012 की सालाना रिपोर्ट ये बातें कहती है.
- पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर नहीं है
- पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों को तोड़ा जाता है, आमतौर पर ऐसा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, क्योंकि पाकिस्तान सरकार का रुख इस मामले में लगातार ठंडा रहता है.
- रिपोर्ट में दुनियाभर के देशों की बात की गई लेकिन पाकिस्तान को लेकर खासतौर पर चिंता जाहिर की गई.

पाकिस्तानी हिंदुओं का प्रदर्शन


अल्पसंख्यकों के खिलाफ किस तरह की हिंसा
- ये हिंसा हर स्तर पर होती है. संपत्ति हड़पने से लेकर घर की महिलाओं के साथ बदसलूकी तक
- हिंदू महिलाओं और लड़कियों के अपहरण की घटनाओं में खासी बढोतरी हुई है
- अपहरण के बाद उनका धर्म बदलकर उनकी शादी मुस्लिम युवकों से कर दी जाती है.
- अल्पसंख्यकों को नौकरियों से लेकर व्यावसायिक क्षेत्र तक में धर्म के नाम पर निशाना बनाया जाता है
- दोयम दर्जे के नागरिकों सरीखा व्यवहार हो रहा है.
- 2012 के बाद से सैकड़ों अल्पसंख्यक हमलों में मारे जा चुके हैं, हजारों लोगों का धर्म बदला जा चुका है.
- पाकिस्तान के ही एक अखबार डेली टाइम्स ने पिछले दिनों लिखा था, पाकिस्तान में अक्सर हिंदू औरतों का बलात्कार और शोषण किया जाता है. इसके बाद उनकी शादी जबरदस्ती बलात्कारियों से कर दी जाती है. अगर वे पहले से शादीशुदा हों तो भी उनकी दूसरी शादी कर दी जाती है. उनका धर्म परिवर्तन कर दिया जाता है. वे किसी अदालत में अपनी पहले से हुई शादी को साबित नहीं कर पातीं.

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अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं
- 2009 में ईसाइयों के खिलाफ गोजरा में दंगे हुए
- 2013 में जोसेफ कॉलोनी और गुजरांवाला दंगा भी क्रिश्चियन अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुआ
- 2010 में अहमदी समुदाय की मस्जिदों पर लाहौर में हमले हुए

- हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ छिटपुट हमले लगातार होते रहते हैं

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हिंदू मंदिरों की स्थिति
- कुल 428 बड़े मंदिरों में 20 ही बेहतर स्थिति में हैं
- 90 के दशक में 1000 छोटे बड़े मंदिरों को निशाना बनाया गया.

जो व्यवहार अल्पसंख्यकों के साथ आमतौर पर होता है
- अल्पसंख्यक बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाता.
- पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के बलपूर्वक धर्म बदलने की घटनाएं बहुतायत में हैं
- अल्पसंख्यकों से कुछ अतिवादी धार्मिक संगठन जबरदस्त जजिया टैक्स वसूलते हैं
- स्कूलों की किताबों में पाठ्यक्रम ऐसा है जो हिन्दुओं के प्रति विद्वेष ज्यादा फैलाता है
- हिंदुओं से बड़े पैमाने पर जमीन छीनी जा चुकी है.
- उन्हें नौकरी से लेकर लोन, हाउसिंग और दूसरे कामों में दिक्कतें आती हैं.
- चर्च, अहमदियों की मस्जिदों और हिंदुओं के मंदिरों पर अक्सर हमले होते हैं.

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क्या है वो ईश निंदा कानून, जिसके निशाने पर होते हैं अल्पसंख्यक
- पाकिस्तान में जनरल जिया उल हक के राज में 1980 के दशक में ईश निंदा कानून को कड़ा करके अल्पसंख्यकों की शामत ही ले आई गई. इस कानून में ये प्रावधान है कि अगर देश के किसी नागरिक को ईश यानि अल्लाह या पैगंबर की निंदा करते पाया गया तो उसके खिलाफ ये कानून लागू हो जाएगा. इस कानून में आमतौर बेगुनाह अल्पसंख्यक ही फंसते हैं.
- ये देखने में आया है कि पाकिस्तान में जब बहुसंख्यकों को किसी अल्पसंख्यक से कोई बदला लेना होता है तो उस पर ईश निंदा का आरोप लगाकर उसे फंसा दिया जाता है.
- ईश निंदा के दोषियों को फांसी या आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा दी जाती है. पाकिस्तान में हाल के बरसों में 16 से ज्यादा लोगों को इस आरोप में मृत्युदंड दिया जा चुका है जबकि 20 शख्स आजीवन कैद की सजा पा चुके हैं. आशिया बीवी का मामला ईश निंदा से ही जुड़ा है. ईसाई धर्म से ताल्लुक रखने वाली इस महिला को एक मामूली सी बात में कहासुनी के बाद ईश निंदा के मामले में फंसा दिया गया. हालांकि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने उसे बाइज्जत बरी कर दिया गया. लेकिन वो सार्वजनिक तौर पर इसलिए कहीं नहीं निकल सकती कि ऐसा करने पर तुरंत उसकी हत्या हो जाएगी. इस मामले में पाकिस्तान में लगातार हिंसक प्रदर्शन होते रहे हैं.

क्या है ह्यूमन राइट वाच की रिपोर्ट
ह्यूमन राइट वाच दुनिया की जानी मानी मानवाधिकार संस्था है. इस संस्था की रिपोर्ट के अनुसार
- 2012 के बाद पाकिस्तान में हालत खराब हुई है
- सरकार सुरक्षा देने के प्रति लापरवाह है
- अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के प्रति कोताही की जाती है

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जबरिया धर्म परिवर्तन
- वर्ष 2010 में पाकिस्तान में मानवाधिकार आयोग के एक अधिकारी ने कहा था कि हर महीने तकरीबन 20 से 25 हिंदू लड़कियों का अपहरण करने के बाद जबरिया धर्म बदलकर उनकी शादी कराई जाती है. जन स्वास्थय और लिंग आधारित हिंसा पर शेफील्ड हलम यूनिवर्सिटी में रिसर्च करने वाली सादिक भंभ्रो ने पाया कि 2012 से 2017 तक 286 लड़कियों का जबरदस्ती धर्म बदला गया. ये वो संख्या है, जो पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबारों की रिपोर्ट्स के आधार पर काउंट की गई. ये तादाद और बड़ी भी हो सकती है. साउथ एशिया पार्टनरशिप का कहना है कि पाकिस्तान में हर साल कम से कम 1000 लड़कियों का जबरन धर्म बदला जाता है.

तब जिन्ना ने अल्पसंख्यकों से क्या कहा था
पाकिस्तान के जन्म के बाद कायदेआजम जिन्ना ने 17 अगस्त 1947 को भाषण में कहा था कि अल्पसंख्यकों को पाकिस्तान में भयमुक्त होकर रहने की जरूरत है. उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा. आप स्वतंत्र हैं. निडर होकर अपने धर्मस्थलों पर जाइए. आप चाहे किसी भी धर्म, जाति और समुदाय के हों, आप सभी पाकिस्तान राष्ट्र के नागरिक हैं. सभी के लिए यहां कानून और दर्जा एक सरीखा होगा. लेकिन ऐसा पाकिस्तान में कभी नहीं हुआ.

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First published: March 25, 2019, 2:44 PM IST
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