सूखे की आहट? क्यों जून-जुलाई की बारिश के आंकड़े दे रहे हैं ऐसे संकेत?

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 10 जुलाई के बीच देश भर में जितनी बारिश हुई है, वह इतने वक्त में होने वाली सामान्य बारिश की तुलना में 14 फीसदी तक कम है. जानें ये 14 फीसदी कम बारिश क्या मायने रखती है.

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Updated: July 15, 2019, 8:44 PM IST
सूखे की आहट? क्यों जून-जुलाई की बारिश के आंकड़े दे रहे हैं ऐसे संकेत?
जून और जुलाई में हुई कम बारिश आने वाले दिनों में सूखे का संकेत दे रही है.
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Updated: July 15, 2019, 8:44 PM IST
भारत में जून और सितंबर महीनों के बीच दक्षिण पश्चिमी मानसून की 80 फीसदी बरसात हो जाया करती है या इतनी बरसात की ज़रूरत होती है. इसका मतलब ये भी है कि इस समय के बीच ये संकेत मिल जाते हैं कि आने वाले महीनों में देश को सूखे की समस्या झेलना पड़ेगी या नहीं. ताज़ा आंकड़ों को देखें तो साफ कहा जा सकता है कि भारत के सामने आने वाले दिनों में सूखे का संकट सामने खड़ा है. बारिश भारत के कुछ इलाकों में तबाही मचा रही है या मचा चुकी है तो कहीं एक बूंद तक बरसात नहीं हुई है.

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देश के मौसम विभाग के मुताबिक 1 जून से 10 जुलाई के बीच पूरे देश में जितनी बारिश हुई है, वह इतने समय में ज़रूरत या अपेक्षा के हिसाब से 14 फीसदी तक कम है. प्रायद्वीप और पूर्वी भारत में तो हालात और भी चेतावनी भरे बने हुए हैं. एक तरफ, दक्षिणी प्रायद्वीप क्षेत्र में जहां 28 फीसदी तक कम बारिश के रिकॉर्ड दर्ज हुए हैं तो वहीं पूर्व और उत्तर पूर्व भारत में 22 फीसदी कम बरसात हुई है.

इन तमाम आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि देश के सामने आने वाले दिनों में सूखे का बड़ा संकट खड़ा है, अगर मानसून के बचे मौसम में भरपूर और हर जगह बारिश नहीं हुई तो इस बात को नकारा नहीं जा सकता. इस अनुमान का एक कारण यह भी है कि पिछले रिकॉर्ड्स के आधार पर देखा गया है कि जून और जुलाई में मानसून कमज़ोर रहा है, तो देश में सूखा पड़ा है.

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पुणे स्थित उष्णकटिबंध मौसम विज्ञान के भारतीय इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने 2013 में मौसम विभाग के बरसात के डेटा का विश्लेषण किया था तो पाया था कि जून व जुलाई के महीनों में बरसात भरपूर नहीं होती तो देश में सूखा पड़ने की आशंका 90 फीसदी तक बढ़ जाती है. देश में दो भयानक सूखे 1972 और 1987 में पड़े थे और विश्लेषण के अनुसार इन सालों में जुलाई में हुई बारिश औसत बारिश से 26 से 30 फीसदी तक कम थी और कुल बारिश सामान्य से 18 से 25 फीसदी तक कम थी.
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इस अध्ययन में यह भी कहा गया था कि जून में मानसून कमज़ोर रहता है तो कुल मानसून में 77 फीसदी तक कमी रहने की आशंका बढ़ जाती है.

देश के ताज़ा हालात
सूखा चेतावनी सिस्टम यानी डीईडब्ल्यूएस के डेटा के मुताबिक जुलाई के पहले हफ्ते में देश का 6.6 फीसदी इलाका असाधारण सूखा यानी 'एक्सेप्शनल ड्राय' पड़ा हुआ है. इसी दौरान देश का 4.54 फीसदी हिस्सा 'एक्सट्रीम ड्राय' यानी बेहद सूखा है. ये दोनों श्रेणियां सूखे संबंधी गंभीर स्थितियों की सूचना देती हैं.

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11 से 17 जुलाई के हफ्ते के दौरान मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के उन हिस्सों में बारिश होगी, जहां अब तक हुई नहीं है. साथ ही, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय जैसे प्रदेशों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. इसके बाद के हफ्ते के लिए मौसम विभाग का अनुमान है कि केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में 'सामान्य से ज़्यादा' बारिश हो सकती है.

ताज़ा हालात के चलते यही उम्मीद की जाना चाहिए कि आने वाले हफ्तों के लिए मौसम विभाग का अनुमान या भविष्यवाणी सही साबित हो और मानसून मज़बूत हो, तभी देश के सामने से सूखे का संकट कम हो सकता है.

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First published: July 15, 2019, 8:44 PM IST
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