अपना शहर चुनें

States

मंगल की सतह के मीलों नीचे लंबे समय तक रहा होगा जीवन- शोध

शोधकर्ताओं का कहना है कि मंगल (Mars) की सतह के नीचे ही जीवन (Life) लंबे समय तक रह पाया होगा.हैं.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
शोधकर्ताओं का कहना है कि मंगल (Mars) की सतह के नीचे ही जीवन (Life) लंबे समय तक रह पाया होगा.हैं.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

मंगल ग्रह (Mars) की सतह की गहराइयों में जीवन (Life) के होने की सबसे ज्यादा संभावना है क्योंकि यहां भूगर्भीय ऊष्मा (Geothermal Heat) के द्वारा तरल पानी लंबे समय तक कायम रह सकेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 1:19 PM IST
  • Share this:
क्या मंगल (Mars) पर कभी जीवन (Life) था, यह सवाल वैज्ञानिकों को काफी समय से उलझाए हुए है. मंगल की सतह के हालात पृथ्वी (Earth) जैसे जीवन के लिए बहुत ही प्रतिकूल हैं. फिर भी वैज्ञानिक यह नहीं मान पा रहे हैं कि मंगल पर कहीं भी जीवन नहीं होगा, कम से कम इतिहास में तो इसकी गुंजाइश कम ही दिखी है. वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर तरल पानी (Liquid Water) के स्रोत वहां की जमीन के नीचे मिले हैं. जबकि सतह पर केवल ठंडी बर्फ(Cold Ice) मिली है. नए अध्ययन के अनुसार लाल ग्रह की सतह के कई मील नीचे जीवन रहा होगा.

क्या है इस धारणा की वजह
इस शोध में यहां कभी जीवन होने की संभावना की खास वजह यह बताई है कि मंगल की सतह के नीचे की बर्फ वहां की भूगर्भीय ऊष्मा के कारण पिघल गई होगी जिससे वहां जीवन के अनुकूल हालात बन गए होंगे. साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में मंगल के विभिन्न डेटासेट का अध्ययन किया और देखा गया कि क्या मंगल पर भूगर्भीय गर्मी पिछले 4.1 से लेकर 3.7 अरब साल में रही होगी या नहीं.

हालात होते गए ऐसे
शोधकर्ताओं ने बताया कि सतह के नीचे बर्फ पिघलने के लिए जरूरी हालात पुरातन मंगल में हर जगह थे. यदि मंगल में 4 अरब साल पहले तक भी गर्म और नम जलवायु रही होगी, मैग्नेटिक फील्ड नहीं रहा होगा, वायुमंडल पतला हो गया होगा और समय के साथ वहां का वैश्विक तापमान बहुत ही कम हो गया होगा, तरल पानी केवल गहराइयों में ही स्थायी रह पाया होगा.



केवल यह संभव रह गया था
इसलिए यदि मंगल पर कभी जीवन पैदा भी हुआ होगा तो धीरे धीरे वह तरल पानी के साथ जमीन के नीचे तक पहुंच गया होगा. इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और अमेरिका के न्यू ब्रुन्सविक में रुटगर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लुजेंद्र ओझा का कहना है इतनी गहराइयों पर जीवन हाइड्रोथर्मल गतिविधि और पानी-पत्थर के बीच प्रतिक्रियाओं के जरिए कायम रह सकता है. इसीलिए मंगल पर सतह के नीचे सबसे लंबा जीवन के योग्य वातावरण रह सकता है.

Life on Mars, Geothermal Heat, subsurface of Mars, Liquid Water,
शोधकर्ताओं ने यह जानना चाहा कि मंगल (Mars) में तरल पानी (Liquid Water) रहने स्थिति कब तक रह पाई होगी.. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


मंगल के वातावरण की भूमिका
शोधकर्ताओं ने यह भी जानने का भी प्रयास किया कि मंगल का वायुमंडल क्या लंबे समय तक गर्म रह पाया होगा या नहीं ओझा ने बताया कि कम्प्यूटर सिम्यूलेशन्स में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी की वाष्प जैसी ग्रीन हाउस गैसें भी मंगल के शुरुआती वायुमंडल मिलती रहीं, जलवायु मॉडल्स लंबे समय तक गर्म और नम मंगल को बनाए रखना मुश्किल ही रहा.

जानिए मंगल ग्रह के लिए परीक्षण क्यों हो रहे हैं इस देश में

सूर्य की युवावस्था का प्रभाव
उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने प्रस्ताव दिया है कि काफी समय पहले मंगल पर उच्च भूगर्भीय ऊष्मा से फेंट यंग सन पैराडॉक्स से तालमेल हो सकता है.  सूर्य ने अपनी युवावस्था में ग्रहों को बहुत अधिक मात्रा में गर्मी पहुंचाई थी, लेकिन बाद में यह सिलसिला बंद हो गया. शोधकर्ताओं के मुताबिक 4 अरब साल पहले सूर्य कम गर्म रहा होगा इसलिए मंगल का शुरुआती वातावरण बहुत ही ठडा रहा होगा.

Mars, Life on Mars, Geothermal Heat, subsurface of Mars, Liquid Water,
मंगल ग्रह (Mars) पर वैज्ञानिकों को बार बार ऐसे संकेत मिलते रहे हैं जिससे पता चलता है कि कभी यहां की सतह पर तरल पानी (Liquid Water) था.. NASA)


लेकिन ऐसे संकेत भी तो मिले हैं
मंगल की सतह पर भी पानी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं जैसे पुरानी नदियों के तल और पानी से संबंधित खनिजों जैसे रासायनिक संकेत. इससे साफ जाहिर है कि एक समय में मंगल की सतह पर ही तरल पानी मौजूद था. यही भूगर्भीय रिकॉर्ड और क्लाइमेट मॉडल के बीच का विरोधाभास है जिसे फेंट यंगसन पैराडॉक्स कहा जाता है.

NASA ने ISS पर उगाई मूलियां, जानिए क्या है इसकी अहमियत

शोधकर्ताओं का मानना है कि मंगल, पृथ्वी शुक्र और बुध जैसे ग्रहों पर ऊष्मा पैदा करने वाले तत्व मौजूद रहे हैं जिनकी रोडियधर्मिता के कारण ऊष्मा पैदा होती है. ये पदार्थ सतह के नीचे काफी समय तक बर्फ को पिघलाकर रखने में सक्षम रहते हैं. ऐसा ही कुछ मंगल पर 4 अरब साल पहले हुआ होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज