भारत रत्न प्रणब दा: रोज़ मछली खाने के शौकीन हैं प्रणब, जानिए उनके बारे में सब कुछ

प्रणब मुखर्जी ने राजनीति का लंबा सफर तय किया. क्लर्क से अपने करियर की शुरुआत करने वाले प्रणब दा राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद पर पहुंचे. उन्होंने अपनी राजनीतिक समझबूझ और कौशल के जरिए ये मुकाम हासिल किया...

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 6:26 PM IST
भारत रत्न प्रणब दा: रोज़ मछली खाने के शौकीन हैं प्रणब, जानिए उनके बारे में सब कुछ
प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारतरत्न से नवाजा गया है. भारत का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले प्रणब दा का भारतीय राजनीति में बड़ा योगदान रहा है. वो राष्ट्रपति बनने से पहले केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों को संभाल चुके हैं. कांग्रेस के सीनियर नेताओं में से एक रहे प्रणब दा का सम्मान सभी पार्टियों के नेता करते हैं.

प्रणब मुखर्जी ने अपना करियर कोलकाता में डिप्टी अकाउंटेंट जनरल के कार्यालय में क्लर्क के रूप में शुरू किया था लेकिन इसके बाद अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से वो आगे बढ़ते गए.

प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के एक छोटे से गांव मिराटी में एक ब्राह्मण परिवार में 11 दिसंबर 1935 में हुआ था. प्रणब मुखर्जी के पिता कामदा किंकर मुखर्जी क्षेत्र के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. आज़ादी की लड़ाई में वो 10 सालों से ज्यादा समय तक ब्रिटिश जेलों में कैद रहे.

उनके पिताजी 1920 से इंडियन नेशनल कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे. देश की आजादी के बाद वो 1952 से लेकर 1964 तक पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य रहे. प्रणब ने राजनीति में प्रवेश पिता के हाथ को पकड़ कर ही किया था.

राजनीति में आने से पहले कई भूमिकाओं में नजर आए
शुरुआत क्लर्क से करने के बाद वो पत्रकार बने लेकिन साथ-साथ कोलकाता विश्वविद्यालय में आगे की पढाई भी करते रहे. कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबंधित सूरी विद्यासागर कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद प्रणब मुखर्जी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से ही इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की पढ़ाई की. कोलकाता विश्वविद्यालय से क़ानून की उपाधि (लॉ) की शिक्षा के बाद पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के एक कॉलेज में प्राध्यापक (प्रोफेसर) की नौकरी शुरू की.उन्होंने वकील के रूप में भी काम किया.

प्रणब दा की बुद्धि का लोहा हर किसी ने माना
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लोग उन्हें प्रणब दा के नाम से जानते हैं. उनकी पैनी बुद्धि का लोहा हर कोई मानता रहा है. अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने लगातार इसका प्रदर्शन किया. साथ ही आगे की सीढियां चढ़ते गए. राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में इंदिरा गांधी से लेकर मनमोहन सिंह की अगुवाई वाले सरकार में काम किया.

pranab mukherjee awarded bharat ratna today know his brief political journey from clerk to president of india
प्रणब मुखर्जी ने राजनीति का लंबा सफर तय किया है


दुर्गा के उपासक हैं
बंगाली परिवार से होने के कारण उन्हें रबिंद्र संगीत में भी खासी रुचि है. प्रणब को पश्चिम बंगाल के अन्य निवासियों की तरह ही माँ दुर्गा का उपासक भी माना जाता है. दुर्गा पूजा के दौरान वे माता की उपासना भी करते हैं. वो मृदुभाषी, गंभीर और कम बोलने वाले है. उन्हें बागवानी, किताबें पढ़ना और संगीत पसंद है. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने काफी हद तक राष्ट्रपति भवन को तकनीक तौर बदल दिया. प्रणब दा के बारे में कहा जाता है कि मंत्री और राष्ट्रपति रहते हुए वो रोज 18 घंटे काम करते थे. अब वो बेशक रिटायर हो चुके हों लेकिन अब भी सक्रिय हैं.

69 में पहली बार राज्यसभा में पहुंचे थे
प्रणब दा के राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1969 में हुई, तब वो पहली बार राज्य सभा से चुनकर संसद में आए थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी ने उनकी योग्यता से प्रभावित होकर मात्र 35 वर्ष की अवस्था में, 1969 में कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्य सभा का सदस्य बना दिया. उसके बाद वे, 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्यसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए.

तब बने थे पहली बार मंत्री
1973 में केंद्र सरकार में प्रणब मुखर्जी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. 1974 में केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री बने. प्रणब वर्ष 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे. इसके बाद वो 1984 में  पहली बार भारत के वित्त मंत्री बने. प्रणब मुखर्जी ने सन 1982-83 के लिए पहला बजट सदन में पेश किया. वह सात बार कैबिनेट मंत्री रहे.

वित्तमंत्री के बतौर दर्ज हैं कई रिकॉर्ड
प्रणब दा का वित्तमंत्री के बतौर कई रिकॉर्ड दर्ज हैं. प्रणब दा ने सबसे ज्यादा सात बार बजट पेश किया है. वो ऐसे एकलौते वित्तमंत्री रहे हैं, जिन्होंने वित्तमंत्रालय का प्रभार आर्थिक उदारवाद से पहले भी संभाला है और उसके बाद भी. 1984 में यूरोमनी मैगजीन ने उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन वित्तमंत्री के तौर पर सम्मान दिया.

कांग्रेस से अलग पार्टी का गठन
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी सरकार की कैबिनेट में प्रणब मुखर्जी को शामिल नहीं किया गया. तब उन्होंने अपनी अलग राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया. फिर 1989 में राजीव गांधी से विवाद का निपटारा होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी को राष्ट्रीय कांग्रेस में मिला दिया. पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव उन्हें पार्टी में दोबारा लेकर आये थे.

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प्रणब दा का सम्मान सभी पार्टियों के नेता करते हैं


लोकसभा सांसद
प्रणब मुखर्जी पहली बार लोकसभा के लिए पश्चिम बंगाल के जंगीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 13 मई 2004 को चुने गए थे. इसी क्षेत्र से दुबारा 2009 में भी लोकसभा के लिए चुने गए. पश्चिम बंगाल में वो कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से सबसे अधिक 1, 28,252 मतों से जीतने वाले सदस्य रहे.

2004 में पार्टी सत्ता में आई तो उन्हें भारत के रक्षा मंत्री के प्रतिष्ठित पद पर पहुंचने में मदद मिली. 24 अक्टूबर 2006 को उन्हें भारत का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया. राष्ट्रपति बनने से पहले वो यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे. वो भारत के 13वें राष्ट्रपति बने.

मछली खाने के शौकीन हैं प्रणब दा
प्रणब दा के बारे में कहा जाता है कि वो मछली खाने के शौकीन हैं. मंगलवार को छोड़कर वो हर दिन मछली खाते हैं. कहा जाता है कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद ही राष्ट्रपति भवन के किचन में मछली बनाने की शुरुआत हुई.

रिटायर होने के बाद ट्विटर पर सक्रिय हैं प्रणब दा

राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद भी प्रणब दा की सक्रियता में कमी नहीं आई. उस वक्त वो काफी चर्चा में आए थे जब आरएसएस के कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया था. कांग्रेसी विचारधारा के होने के बावजूद वो न सिर्फ आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल हुए बल्कि वहां उन्होंने अपने विचार भी रखे.

प्रणब दा सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहते हैं. खासकर ट्विटर पर उन्होंने अपनी सक्रियता बनाए रखी है. सोशल मीडिया के जरिए वो विभिन्न राजनीतिज्ञों और आम लोगों से संपर्क बनाए रखते हैं.

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First published: August 8, 2019, 4:33 PM IST
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