कैसे होता है पूर्व राष्ट्रपति का अंतिम संस्कार, प्रणब के कोरोना ग्रस्त होने से क्या पड़ा असर

कैसे होता है पूर्व राष्ट्रपति का अंतिम संस्कार, प्रणब के कोरोना ग्रस्त होने से क्या पड़ा असर
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के बीच पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ (Photo-moneycontrol)

पूर्व राष्ट्रपति (former President)का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ होता है. लेकिन प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) के कोरोना ग्रस्त (Corona Positive) होने के कारण इसमें बदलाव किया गया. जानते हैं कैसे दी गई उन्हें आखिरी विदाई

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 1, 2020, 4:12 PM IST
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी रोड श्मशान में कोरोना प्रोटोकॉल के साथ हुआ. बता दें कि निधन से पहले वे कोरोना संक्रमित पाए गए थे. पूर्व राष्ट्रपति के अंतिम संस्कार की खास रीति होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. साथ ही ये भी ध्यान रखा गया कि कोरोना होने के कारण अंतिम संस्कार के दौरान कोई दूसरा प्रभावित न हो जाए. जानिए, पूर्व राष्ट्रपति की अंतिम विदाई के क्या प्रोटोकॉल हैं. कोरोना से इसपर क्या और कितना असर हुआ.

ब्रेन सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर प्रणब मुखर्जी के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हई. इसी संक्रमण के कारण उन्हें सेप्टिक शॉक हुआ और इसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से अस्पताल में ही पूर्व राष्ट्रपति का निधन हो गया. इसी वजह से उनका शरीर अस्पताल से सीधा लोधी रोड स्थित श्मशान घाट ले जाया गया. वहीं उनके निवास 10, राजाजी मार्ग पर उनकी तस्वीर रखी गई है, वहीं पर सारे नेता जाकर उनके अंतिम दर्शन कर रहे हैं. अगर कोरोना का मामला न होता तो उनके पार्थिव शरीर को शव वाहन की बजाए गन कैरिएज में ले जाता जाता.

स्टेट फ्यूनरल के तहत पूर्व राष्ट्रपति के सम्मान में 7 दिनों के राजकीय शोक का एलान है




स्टेट फ्यूनरल के तहत पूर्व राष्ट्रपति के सम्मान में 7 दिनों के राजकीय शोक का एलान किया गया है, जो कि 31 अगस्त से ही शुरू हो चुका है. इस दौरान जिन भी भवनों में राष्ट्रीय ध्वज नियमित तौर पर फहराने की परंपरा है, वहां ध्वज को आधा झुकाकर रखा जाएगा. इसके अलावा कहीं भी किसी तरह का कोई सरकारी उत्सव नहीं होगा.



राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, यानी स्टेट फ्यूनरल के अलग नियम-कायदे होते हैं. इसके तहत कई चीजें आती हैं, जैसे अंतिम संस्कार के दौरान गन से सलामी देना, राजकीय शोक घोषित किया जाना और राष्ट्र ध्वज का आधा झुका दिया जाना. मृत व्यक्ति का शरीर राष्ट्र ध्वज में लपेटकर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाता है. फिलहाल हमारे देश में स्टेट फ्यूनरल पूर्व राष्ट्रपति और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय नेताओं और मुख्यमंत्रियों को दिया जाता है.

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इसके अलावा राज्य की सरकार भी फैसले ले सकती है कि वो अपने क्षेत्र के किसी गणमान्य नागरिक जैसे कलाकार, वैज्ञानिक या सोशल वर्कर के निधन पर उसे राजकीय सम्मान दे. हालांकि इसके लिए भी कैबिनेट से मंजूरी चाहिए होती है. इस तरह से देखा जाए तो पूर्व राष्ट्रपति को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ही उसी सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जैसी स्टेट फ्यूनरल के तहत दी जाती है.

पत्नी शुभ्रा के साथ प्रणब मुखर्जी


कोरोना संक्रमित मृतक के अंतिम संस्कार का प्रोटोकॉल
केंद्र सरकार के साथ ही बड़े पैमाने पर प्रभावित राज्यों ने कोविड 19 के कारण मरने वाले लोगों के शवों के अंतिम संस्कार (Last Rites) के बारे में गाइडलाइन्स जारी की हैं. इसके तहत राज्यों में कुछ नियम अलग-अलग भी हैं. जैसे महाराष्ट्र में, किसी भी मौत की स्थिति में शव की कोरोना जांच होगी और रिपोर्ट आने के बाद शव उसके परिजनों को सौंपा जाएगा. पॉज़िटिव रिपोर्ट आने पर संबंधित निकायों की देखरेख में अंतिम संस्कार करवाया जाएगा.

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गाइडलाइन के अनुसार अगर Covid-19 संक्रमण से किसी की मौत होती है तो उसके परिवारवाले और मित्र मृतक के अंतिम दर्शन तो कर सकते हैं लेकिन किसी भी तरह से उसके पास नहीं जा सकते. यानी मृत शरीर को छूना, चूमना या गले लगाना एकदम मना है.

इसके अलावा कई रीति-रिवाजों का भी पालन नहीं किया जा सकता. मसलन कई धर्मों में मृतक को नहला-धुलाकर उसके शरीर पर सुगंधित लेप किया जाता है, सजाया जाता है और नए कपड़े पहनाए जाते हैं. इसकी सख्त मनाही है.

कोरोना प्रोटोकॉल के तहत मृत शरीर को छूना, चूमना या गले लगाना एकदम मना है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


यहां तक कि किसी भी जांच के लिए शव की ऑटोप्सी यानी चीरफाड़ भी नहीं की जा सकेगी क्योंकि इस दौरान चीरफाड़ करने वालों के वायरस की चपेट में आने का खतरा होता है. लेकिन ऑटोप्सी अगर एकदम ही जरूरी हो तो स्वास्थ्य कर्मचारी इंफेक्शन रोकने के सारे उपाय अपनाते हुए ही ऑटोप्सी करेंगे.

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गाइडलाइन में यह भी साफ है कि अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग जमा नहीं हो सकते. ज्यादा लोगों के जमा होने पर सोशल डिस्टेंसिंग का नियम टूट सकता है और हो सकता है कि आने वाले लोग भी किसी तरह से संक्रमित हो जाएं.

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भारत में हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा है कि कोरोना के मृतक के अंतिम दर्शन के लिए बॉडी बैग को केवल एक ही बार खोला जा सकता है और ये काम भी सिर्फ मेडिकल स्टाफ ही कर सकता है, न कि परिवार के लोग. इस दौरान धार्मिक रिवाज जैसे कोई धार्मिक ग्रंथ पढ़ना या फिर शरीर पर गंगाजल छिड़कना जैसे नियमों की इजाजत है क्योंकि इनमें शरीर को छूने की जरूरत नहीं पड़ती है.
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