वो अमेरिकी राष्ट्रपति, जो White House में जानलेवा बीमारियां लेकर आए

चुनावों से ठीक एक महीने पहले डोनाल्ड ट्रंप कोरोना पॉजिटिव पाए गए- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
चुनावों से ठीक एक महीने पहले डोनाल्ड ट्रंप कोरोना पॉजिटिव पाए गए- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

बेहद ताकतवर होने के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति (American president) अपने लिए बेस्ट डॉक्टर नहीं चुनते, बल्कि पुराने डॉक्टर पर ही भरोसा करते हैं. कई राष्ट्रपति अपनी बीमारी छिपाने के लिए सारे हदें पार कर गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 4, 2020, 4:57 PM IST
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राष्ट्रपति चुनावों से ठीक एक महीने पहले डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप कोरोना पॉजिटिव (Donald Trump and Melania Trump corona positive) पाए गए. लगभग 74 साल के ट्रंप फिलहाल तक मोटापे के अलावा किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं बताए जा रहे हैं. वैसे वाइट हाउस (White House) में शुरू से ही राष्ट्रपतियों की बीमारियां छिपाने का चलन रहा. ट्रंप की सेहत के अलावा उनसे पहले भी लगभग सभी राष्ट्रपतियों की सेहत शानदार बताई जाती रही, जबकि सच तो ये है कि वे वाइट हाउस में आने से पहले से ही बीमार रहे.

इस राष्ट्रपति के दांत से लेकर नजर तक थी कमजोर
अमेरिका के 7वें राष्ट्रपति ऐन्ड्रयू जैकसन (1829–1837) ने जब राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, उससे पहले ही वे अवसाद के शिकार हो चुके थे. लगभग 62 साल के तत्कालीन राष्ट्रपति की पत्नी की कुछ समय पहले ही दिल के दौरे से मौत हुई थी. शपथग्रहण के बाद वाइट हाउस आने पर उनकी कई बीमारियां सामने आईं. जैसे जैकसन के दांत खराब हो चुके थे, आंखें कमजोर थीं, वे क्रॉनिक सिरदर्द के मरीज थे और यहां तक कि उनके फेफड़ों से ब्लीडिंग होती थी.

white house America
वाइट हाउस में शुरू से ही राष्ट्रपतियों की बीमारियां छिपाने का चलन रहा

कैंसर जैसी बीमारी छिपा गए


ग्रोवर क्लेवलैंड ने साल 1893–1897 में अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया. वे पूरी जिंदगी मोटापे से ग्रस्त रहे. साथ ही ग्रोवर की किडनियां भी कमजोर थीं. बाद में वे मुंह के कैंसर से ग्रस्त पाए गए. आनन-फानन उन्होंने सर्जरी कराई, जो उस वक्त सफल भी रही लेकिन अगले 3 सालों के भीतर राष्ट्रपति की मौत हो गई.

दस्तखत करते हाथ कांपते थे
वूड्रो विल्सन (1913–1921) एक नहीं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त रहने के दौरान राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे. हेल्थलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वे हाइपरटेंशन और डबल विजन के शिकार थे. साथ ही उन्हें कई बार दिल का दौरा पड़ा था. इसकी वजह से विल्सन का दायां हाथ बुरी तरह से प्रभावित हुआ था और वे हाथ से ठीक से साइन भी नहीं कर पाते थे.

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विल्सन के स्ट्रोक ने उनकी देखने की ताकत लगभग छीन ली और वे व्हीलचेयर पर आ गए. इसके बाद भी अलग-अलग तरह के बहानों से उन्होंने अपनी अस्वस्थता को छिपाया. इन्हीं राष्ट्रपति का राज खुलने के बाद कांग्रेस ने 25वां संशोधन किया. इस नियम के तहत अगर राष्ट्रपति की मौत हो जाए, या वो अपंग हो जाए तो उसकी जगह उप-राष्ट्रपति ले सकता है.

franklin d. roosevelt
फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट के बारे में वाइट हाउस में सख्त सीक्रेसी बनी रही


व्हीलचेयर पर काटे अपने दिन
फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट (1933–1945) लगभग 39 साल की उम्र में पोलियो का शिकार हुए. ये कोई ऐसा-वैसा पोलियो अटैक नहीं था, बल्कि इसमें रूजवेल्ट के दोनों पैर बेकार हो गए और वे हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गए. अपने पहले कार्यकाल के लिए जब रूजवेल्ट ने दावेदारी की, तब जनता के पास उनकी सीमित जानकारी थी. वाइट हाउस पहुंचने के बाद इसपर और सख्ती हो गई. साल 1944 में अपने चौथे टर्म के दौरान वे दिल के मरीज थे, एनोरैग्जिया के कारण हरदम थके रहते और काम नहीं कर पाते थे.

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हार्ट अटैक को बताया पेट की खराबी
वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक तब रूजवेल्ट की सेहत जांच के दौरान एक सर्जन फ्रेंक लाही ने पाया कि वे इतने बीमार हैं कि राष्ट्रपति जैसे अहम पद के बिल्कुल लायक नहीं. सर्जन की ये बात साल 2011 में बाहर आ सकी. यहां तक कि जब उन्हें पहला दिल का दौरा पड़ा था तो वाइट हाउस ने प्रेस वार्ता में बताया कि राष्ट्रपति को पाचन से संबंधित समस्या आ रही है. इसका जिक्र भी एक किताब Whistlestop में मिलता है, जिसे पत्रकार और लेखक जॉन डिकरसन ने लिखा था.

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लिखी गई है किताब
वैसे अमेरिका के सबसे ताकतवर शख्स होने के बाद भी राष्ट्रपति और यहां तक कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी अपनी बीमारी का इतिहास छिपाकर रखते हैं. ऐसे ही राष्ट्रपतियों के बारे में इतिहासकार मैथ्यू एल्जिओ ने एक किताब भी लिखी है- The President Is a Sick Man. मैथ्यू ने इतिहासकार होने के कारण राष्ट्रपतियों की जिंदगी पर काफी गौर किया.

Donald Trump America
राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल तक मोटापे के अलावा किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं बताए जा रहे


नहीं चुनते हैं बेस्ट डॉक्टर
वे मानते हैं कि अमेरिका जैसे देश का सबसे शक्तिशाली शख्स होने के बाद भी अक्सर राष्ट्रपति अच्छे डॉक्टर अपॉइंट नहीं करते हैं. उन्हें डर रहता है कि कहीं उनकी बीमारी की बात बाहर न चली जाए और विरोधी फायदा न उठाएं. इसी वजह से लगभग सभी प्रेसिडेंट्स ने अपने पुराने फैमिली डॉक्टरों को ही अपना डॉक्टर बनाए रखा.

जहाज में कराई थी सर्जरी
राष्ट्रपति अपनी बीमारी को सीक्रेट रखने के लिए इस हद तक गए कि कई राष्ट्रपतियों ने किसी सर्जरी की जरूरत होने पर जहाज में सर्जरी करवा डाली. जैसे राष्ट्रपति ग्रोवर क्लेवलैंड ने मुंह के कैंसर की सर्जरी चलते जहाज में करवाई थी. इसके लिए मेडिकल टीम के नाम पर उनके फैमिली डॉक्टर और टीम थी. सबने बीमारी के बारे में चुप रहने की कसम ली और इसके बाद प्रक्रिया शुरू की गई. समुद्र के बीच हुई इस सर्जरी में सबसे बड़ा खतरा लहरों का था. लहरों के विशाल होने पर जहाज हिलता और साथ ही सर्जरी कर रहे डॉक्टरों के हाथ भी हिलते. लेकिन खतरा लिया गया. सर्जरी सफल हो रही लेकिन जल्दी ही राष्ट्रपति की मौत हो गई. माना जाता है कि ये समुद्री सर्जरी और अपेक्षाकृत कम जानकार टीम से सर्जरी करवाने का नतीजा था.
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