कैसे बने होंगे पृथ्वी पर सबसे पहले जैविक अणु, इस प्रयोग ने बताई प्रक्रिया

पृथ्वी (Earth) पर पहली बार जैविक अणुओं (Organic Molecule) का निर्माण एक अहम प्रक्रिया है जिसका जीवन की उत्पत्ति (Origin of life) से गहरा संबंध है.
पृथ्वी (Earth) पर पहली बार जैविक अणुओं (Organic Molecule) का निर्माण एक अहम प्रक्रिया है जिसका जीवन की उत्पत्ति (Origin of life) से गहरा संबंध है.

पृथ्वी (Earth) पर जीवन की जैविक अणुओं (Organic Molecule) पर बहुत अहम भूमिका है, लेकिन सबसे पहले इनका निर्माण कैसे हुआ यह प्रक्रिया (Process) जानने की कोशिश की.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 6:41 AM IST
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पृथ्वी (Earth) पर जीवन में जैविक अणुओं (Organic Molecules) की भूमिका होती है. बिना जैविक पदार्थों के जीवन (Life) प्रक्रिया की कल्पना करना भी असंभव है. जाहिर तौर पर ऐसा लगता है कि पहले पृथ्वी पर जैविक पदार्थ आए होंगे फिर जीवन पनपा होगा. लेकिन इसका कोई स्पष्ट प्रमाण या संकेत नहीं है. लेकिन ताजा अध्ययन में उस प्रक्रिया का पता लगाने की कोशिश हुई है जिससे पृथ्वी पर पहला (Frist) जैविक पदार्थ बना होगा.

इस प्रक्रिया की पहचान
अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री और नासा द्वारा अनुदानित शोध ने इस अहम प्रक्रिया की पहचान की है. इसी प्रक्रिया ने 4 अरब साल पहले पृथ्वी पर सबसे पहले जैविक अणुओं का निर्माण करने में अहम भूमिका निभाई थी. इसके बाद ही पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हुई थी.

क्यों अहम है यह प्रक्रिया
यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हो सकता है यह ब्रह्माण्ड में अन्यत्र जीवन की तलाश में मददगार साबित हो. शोधकर्ताओं का लगता है कि पृथ्वी पर पानी के अंदर हाइड्रोथर्मल वेंट्स वाली प्रक्रिया कहीं और भी पाई जा सकती है जिससे जो भविष्य में जीवन की नींव साबित हो सकती है. यह अध्ययन प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस जर्नल में इसी हफ्ते प्रकाशित हुआ है.



कैसे बनते हैं जैविक अणु
पृथ्वी पर मौजूद सभी जैविक अणु (organic molecule) कार्बन के बने हैं. ये अणु हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसे तत्वों के साथ जुड़ने के बाद बने. आज के जीवन में इनमें से ज्यादातर अणु कार्बन डाइऑक्साइड के रिडक्शन से बने हैं. इस प्रक्रिया में कार्बन विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा कार्बन निर्धारण (Carbon Fixation) के कई मार्गों से होकर गुजरता है जिसमें प्रकाश संश्लेषण भी एक है.

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कार्बन डाइऑक्साड (CO2) और कार्बन संबंधी अणुओं (Molecules) की शुरू से जीवन में अहम भूमिका रही है. (तस्वीर: Pixabay)


पहली बार कैसे बने जैविक अणु
ज्यादातर मार्गों में या तो कोशिका की ऊर्जा की जरूरत होती  या फिर अन्य प्रक्रिया बहुत ही बाद में विकसित हुई थी. ऐसे में सवाल उठता है कि ये जैविक अणु आखिर सबसे पहले कैसे बने होंगे. इसका जवाब पाने के लिए शोधकर्ताओं ने माइक्रोफ्ल्यूड रिएक्टर बनाए जो छोटी प्रयोगशालाएं थी  जिसमें वैज्ञानिक द्रव्यों (गैस सहित) के बर्ताव का सूक्ष्म स्तर पर अध्ययन कर सकते थे.

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कैसे मिले नतीजे
पहले के रिएक्टर मेने हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुलबों को द्रव्य में मिलाया लेकिन रिडक्शन नहीं हुआ, फिर इसके बाद जापान में कुछ शोधकर्ताओं ने गैसों को द्रव्य से प्रतिक्रिया कराने के बजाए गैस के प्रवाह में द्रवों को छोड़ा और उन्हें नतीजे मिल गए.

कोई ऊर्जा नहीं लगती
इस प्रक्रिया से शोधकर्ताओं को हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड मिलाने पर फॉर्मिक एसिड (HCOOH) नाम का ऑर्गोनिक अणु मिला. यह आज की कार्बन निर्धारण प्रक्रिया से मिलती जुलती प्रक्रिया थी जिसमें कोई ऊर्जा नहीं लगती. इस तरह की प्रक्रिया भी पुराने महासागरों के हाइड्रोथर्मल वेंट्स में होती होगी.

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जैविक अणुओं (Organic Molecule) के बारे में अभी तक स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं कि वे पहली बार कब बने थे. (तस्वीर: Pixabay)


और जगह भी मिल सकते हैं ऐसे सिस्टम
शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके नतीजे हमारे जैवमंडल से बाहर भी मिल सकते हैं इसी तरह से हाइड्रोथर्मल सिस्टम सौरमंडल में अन्य जगहों पर भी हो सकते हैं जिनमें ग्ररू ग्रह का चंद्रमा यूरोपा और शनिग्रह का चंद्रमा एनसेलाडस शामिल हैं. ये ब्रह्माण्ड में अन्य पथरीले ग्रहों पर ही हो सकते हैं.

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इस शोध की अहमियत कई अन्य क्षेत्रों में भी हो सकती है जिनमें पर्यवारण प्रमुख है. ऐसी सरल प्रक्रियाओं से वायुमंडल में कार्बन की मात्रा घटाई जा सकती है. इसके अलावा इन हालातों में अन्य तरह के रासायनिक प्रयोग भी उपयोगी हो सकते हैं जिसमें दूसरे तत्वों और अणुओं की भूमिका हो.
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