जानें, राजीव गांधी हत्या के दोषी पेरारिवलन को, जिसने जेल से किया टॉप, अब मिली ये राहत

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी एजी पेरारिवलन की परोल सुप्रीम कोर्ट ने हफ्तेभर के लिए बढ़ा दी

तमिलनाडु का ये किशोर महज 19 साल का था, जब उसे राजीव गांधी हत्याकांड (Rajiv Gandhi assassination) में दोषियों की मदद के आरोप में पकड़ा गया. कैद में ही एजी पेरारिवलन (AG Perarivalan) ने आगे की पढ़ाई की और टॉप किया.

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    राजीव गांधी हत्याकांड (Rajiv Gandhi Assassination) के दोषी एजी पेरारिवलन की परोल सुप्रीम कोर्ट ने हफ्तेभर के लिए बढ़ा दी है. अक्टूबर के आखिर से स्वास्थ्य कारणों से परोल पर बाहर रहे पेरारिवलन की ये राहत आज मंगलवार को खत्म होने वाली थी. परोल बढ़ाने के अलावा कोर्ट ने ये भी कहा कि पेरारिवलन जब भी सेहत की जांच के लिए जाएं तो उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाए.

    वैसे कोर्ट के पेरारिवलन के प्रति नर्म रवैये की कई खास वजहें हैं, जिनमें से एक ये भी है कि आज तक इस शख्स के हत्याकांड में सक्रिय हाथ होने के सबूत नहीं मिल सके.

    तमिलनाडु के जोलारपेट कस्बे से ताल्लुक रखने वाले पेरारिवलन को साल 1991 में जब राजीव गांधी हत्याकांड में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जब वे महज 19 साल के थे. उस दौरान पेरारिवलन पढ़ने में तेज एक स्टूडेंट था, जिसने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में डिप्लोमा खत्म ही किया था और चैन्नई में आगे की पढ़ाई के रास्ते तलाश रहा था. इसी दौरान राजीव गांधी की हत्या हुई और पेरारिवलन को गिरफ्तार कर लिया गया.

    rajiv gandhi assassination perarivalan
    पेरारिवलन ने जेल में आकर भी पढ़ाई-लिखाई जारी रखी


    सीबीआई ने तब पेरारिवलन और 41 दूसरे लोगों के खिलाफ केस लगाया, टेरोरिज्म एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट यानी टाडा के तहत इस केस में पेरारिवलन के बारे में बताया गया कि जिस आत्‍मघाती बम से राजीव गांधी की हत्‍या की गई थी उसके लिए 9 वोल्‍ट की बैटरी हत्‍यारों को उसने खरीदकर दी थी. साथ ही सीबीआई का ये दावा भी है कि वो राजीव की हत्या करने वाले मास्टरमाइंड लोगों के संपर्क में था.

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    पेरारिवलन ने माना कि उसने बैटरी खरीदी थी लेकिन साथ ही उसने ये भी बताया कि उसे नहीं मालूम कि इसका ऐसा उपयोग होगा. इस बयान पर पेरारिवलन के अलावा गहन तहकीकात में उसका परिवार भी अड़ा रहा और आज भी उनका यही कहना है कि पेरारिवलन को कुछ पता नहीं था. वैसे बता दें कि 9 वोल्ट की बैटरी किसी भी इलेक्ट्रिकल दुकान पर मिल जाती है.

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    इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब खुद मामले की तहकीकात से जुड़े एक अफसर ने हलफनामा दायर करके बताया कि उसने पेरारिवलन के बयान की आधी हकीकत ही लिखी थी. पेरारिवलन ने बताया था कि उसने बैटरी ली लेकिन साथ में उसके इस्तेमाल की कोई जानकारी न होने की बात भी कही थी. लेकिन अफसर ने ये जानकारी नहीं बताई.

    सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन मामले पर तमिलनाडु सरकार को झाड़ भी लगाई- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    खैर, पेरारिवलन, जिसका घरेलू नाम लोग अरिवु है, ने जेल में आकर भी पढ़ाई-लिखाई जारी रखी. जेल से ही उसने 12वीं का एग्जाम दिया, जिसमें वो 91.33 फीसदी नंबर लेकर पास हुआ. अब तक जेल में जिन लोगों ने ये एग्जाम दिया है, उसमें वो टापर है. इसके बाद उसने तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी के एक डिप्लोमा कोर्स में गोल्ड मेडल हासिल किया. इसके बाद भी उसकी पढ़ाई रुकी नहीं बल्कि उसने इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से पहले बैचलर इन कंप्यूटर एप्लिकेशन (बीसीए) किया और फिर कंप्यूटर में ही मास्टर्स किया.

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    अब लगभग 50 साल का होने जा रहा ये शख्स जेल में ही साथियों के साथ म्यूजिक बैंड भी चलाता है और उसके खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की खबरें कभी सुनाई नहीं पड़ीं. यही वजह हो सकती है कि सुप्रीम कोर्ट भी पेरारिवलन के मामले में ढीलढाल पर नाखुश है. हाल ही में पेरोल बढ़ाने के पहले भी कोर्ट पेरारिवलन की रिहाई की याचिका के लंबित होने को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है. उसने पूछा कि आखिर राज्यपाल को फैसला लेने में इतना वक्त क्यों लग रहा है. कोर्ट ने एक तरह से धमकाने के अंदाज में कहा कि वो अपने अधिकार का प्रयोग किए बिना चाहती है कि खुद राज्य सरकार ही इस मामले में फैसला ले ले.

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