पाकिस्तान का वो बड़ा नेता जिसका दिल भारत के लिए धड़कता है

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Updated: September 3, 2019, 2:53 PM IST
पाकिस्तान का वो बड़ा नेता जिसका दिल भारत के लिए धड़कता है
अल्ताफ हुसैन

अल्ताफ हुसैन 27 साल पहले पाकिस्तान से भागकर लंदन में राजनीतिक शरण ली थी. तब से वो वहीं बैठकर पाकिस्तान में अपनी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट को कंट्रोल करते हैं. उनकी लोकप्रियता अच्छी खासी है

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पाकिस्तान की सियासत की बहुत बड़ी ताकत हैं अल्ताफ हुसैन. वो 27 साल पहले पाकिस्तान से भागकर लंदन आ गए थे. वहीं से वो अपनी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट कंट्रोल करते हैं. वो कराची में टेलीफोन के जरिए लाउडस्पीकर पर भाषण देते हैं. तब ये पूरा शहर थम जाता है. अल्ताफ पाकिस्तान के अकेले नेता हैं जो भारत की तारीफ करते थकते नहीं. अभी एक दिन पहले ही अल्ताफ ने एक वीडियो जारी किया और इसे उन्होंने "सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा..कहते हुए खत्म किया.

जानते हैं कि अल्ताफ कौन हैं. कहां से पाकिस्तान पहुंचे. पाकिस्तान में उनकी क्या स्थिति है. आखिर अब भी कराची शहर उनकी एक आवाज पर कैसे थम जाता है. वैसे उनकी पार्टी एमक्यूएम को पाकिस्तान की चौथी बड़ी और सिंध की दूसरी बड़ी पार्टी माना जाता है.

पीटर फ्रैंच की किताब "लिबर्टी आर डेथ" कहती है कि सत्तर के दशक में जब उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की थी, तब उन्हें कोई गंभीरता से नहीं लेते थे. वो साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके अभिभावक आगरा से पाकिस्तान के कराची आकर बस गए थे.



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अल्ताफ हुसैन का तब भी कहना यही होता था कि पाकिस्तान में मुहाजिरों के साथ नौकरी से लेकर समाज तक में भेदभाव हो रहा है. उन्हें ना तो अच्छी पोजिशन मिलती है और ना ही वो तरक्की कर पाते हैं. पाकिस्तान में सिंधी और पंजाबी जागीरदार छाए हुए हैं.

तब वो मोपेड से घूमा करते थे 
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शुरू में बेशक अल्ताफ की ज्यादा पकड़ नहीं थी. वो तब मोपेड से घूमते थे. लेकिन उनकी सक्रियता गजब की थी. वो लगे रहते थे. कुछ सालों में वो लोकप्रिय होने लगे. कराची और पाकिस्तान के मुहाजिरों में वो जाने जाने लगे. उन्हें पाकिस्तान में बसे मुहाजिरों की आवाज समझा जाने लगा. इस बीच उन्होंने कुछ नौकरियां कीं लेकिन मामला जमा नहीं. यूनिवर्सिटी से बी.फॉर्मा ग्रेजुएट अल्ताफ ने जब 1984 में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट नाम से पार्टी बनाई तो वो बड़ी ताकत बन गए. इस पार्टी को मुहाजिर कौमी मूवमेंट के नाम से भी जाना जाता है.

कराची में अल्ताफ हुसैन की मर्जी के बगैर कभी पत्ता भी नहीं खड़कता था


एक आवाज पर थम जाता था कराची 
तब उन्होंने खुलेआम पाकिस्तान की ताकतवर माने जाने वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को चुनौती दी. कराची में अल्ताफ की पकड़ इतनी मजबूत थी कि उनकी एक आवाज पर ये शहर थम जाता था. हालांकि अल्ताफ के दौर में अस्सी के दशक में कराची में हिंसा बढ़ गई. वो यहां समानांतर सत्ता चलाने लगे. कहा जाने लगा कि कराची शहर में उनके बगैर एक पत्ता भी खड़क नहीं सकता. कराची में उनके कार्यकर्ताओं का आधार बहुत बड़ा रहा है. दस हजार तो अकेले सशस्त्र कार्यकर्ता थे. इसके बाद सदस्यों की संख्या कहीं बहुत ज्यादा.

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बेनजीर ने कराची में सफाई आपरेशन कराया
1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने सेना भेजकर कराची में एमक्यूएम और उसके नेताओं को जमकर ठिकाने लगाया. माना जाता है कि उन दिनों कराची में हजारों लोग मारे गए. हालांकि अल्ताफ इसे भांप चुके थे और वो इंग्लैंड भाग गए. तब से वो वहीं रह रहे हैं.

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान की मजबूत पार्टियों में गिनी जाती है, जिसके समर्थक आमतौर पर वो मुहाजिर हैं, जो बंटवारे के दौरान भारत से पाकिस्तान गए थे


लंदन से टेलीफोन पर देते हैं भाषण
जब मोबाइल नहीं आए थे तब वो लंदन से अपनी पार्टी को कंट्रोल करते थे. टेलीफोन से वो भाषण देते थे और इसे कराची में तमाम इलाकों में लाउडस्पीकर से कनेक्ट कर दिया जाता था. अब वो समय समय पर पाकिस्तान में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और फॉलोअर्स के लिए वीडियो भी जारी करते हैं.

कराची से मोटा आर्थिक चंदा उनके पास पहुंचता है
कराची के लोग मंत्रमुग्ध होकर उनका भाषण सुनते हैं. उनके एक निर्देश पर शहर में कुछ भी हो सकने की स्थिति रहती है. इस शहर के सैकड़ों-हजारों दुकानदार, वैंडर्स और रहने वाले लोग लाखों-करोड़ों रुपए अनिवार्य टैक्स की तरह इकट्ठा करके अल्ताफ के पास लंदन में भेजते हैं.

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लंदन में कड़ी सुरक्षा में 
अल्ताफ लंदन में अपनी निजी सुरक्षा में रहता है. उसके करीब पहुंचना बहुत मुश्किल है. उत्तरी लंदन का उसका घर किसी किले की तरह है. माना जाता है कि वो तमाम तरह के कारोबार वहां से चलाते रहते हैं. ये भी कहा जाता है में बैठकर अल्ताफ पाकिस्तान का जितना नुकसान कर सकते हैं, करते रहते हैं. उनके किसी भी भाषण और वीडियो को पाकिस्तानी मीडिया में दिखाने की इजाजत नहीं है.

अल्ताफ 1992 में पाकिस्तान से भागकर लंदन आ गए थे, तब से वो यहीं से टेलीफोन के जरिए पार्टी को कंट्रोल करते हैं


पाकिस्तान को दुनिया का कैंसर बता चुके हैं
कुछ समय पहले जब उन्होंने पाकिस्तान को दुनिया का कैंसर बताया, तो पाकिस्तानी हुक्मरानों को इस पर बहुत मिर्ची लगी थी. कुछ साल पहले तक एमक्यूएम के नेशनल असेंबली में 25 सांसद थे लेकिन पार्टी ने इस साल के शुरू में पाकिस्तान में हुए चुनाव का बहिष्कार कर दिया. हालांकि उनकी पार्टी में दो-फाड़ हो चुकी है.

कहते हैं कि पाकिस्तान आना गलती थी
65 साल के अल्ताफ कश्मीर में धारा 370 हटाने को भारत का अंदरूनी मामला बताते हैं. वो लगातार कहते हैं कि पाकिस्तान और भारत दोनों एक ही दिन आजाद हुए लेकिन भारत हर सेक्टर में इतना आगे है कि खुद को पाकिस्तानी कहने में शर्मिंदगी होती है.
वो और भी कई बातें कहते हैं. मसलन मुजाहिरों का भारत छोड़कर पाकिस्तान आना सबसे बड़ी भूल थी. वो प्रधानमंत्री मोदी से भी मुहाजिरों के हक की आवाज उठाने की बात करते हैं. बल्कि यहां तक कहते हैं कि हम मुजाहिर तो भारत और मोदी के ही लोग हैं. हम भारत में ही खुश थे. हमारे लिए पाकिस्तान सही जगह है ही नहीं.

अब भी जब अल्ताफ टेलीफोन के जरिए भाषण देते हैं तो कराची के तमाम इलाकों में इसे लाउडस्पीकर से कनेक्ट करके सुना जाता है और एमक्यूएम की रैलियां इतनी बड़ी होती हैं कि लोग हैरान रह जाते हैं


3576 मामले चल रहे हैं
इस शख्स पर एक दो नहीं बल्कि पाकिस्तान में 3576 मामले चल रहे हैं. 2014 में उन्हें एक हत्या के मामले में लंदन में गिरफ्तार किया गया लेकिन तीसरे दिन ही रिहाई हो गई. कुछ लोग इस शख्स को पीर मानते हैं. ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर चुके अल्ताफ बेशक पाकिस्तान में मोस्ट वांडेट हैं लेकिन स्काटलैंड पुलिस कहती है कि उन्होंने लंदन में कोई कानून नहीं तोड़ा है. अल्ताफ अब कई बीमारियों के शिकार हो चुके हैं.
उनके ज्यादातर रिश्तेदार कराची में रहते हैं. पुलिस उसमें कई की हत्याएं कर चुकी है. अल्ताफ की बीवी भी उसके साथ कराची से लंदन आ गई थी लेकिन अब दोनों में तलाक हो चुका है. उसकी बेटी खुद एक बड़े बिजनेस की मालिकिन है.

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First published: September 2, 2019, 9:00 PM IST
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