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आगरा से पाकिस्तान गया मुस्लिम नेता, जो अब भारत में मांग रहा है शरण

आगरा से पाकिस्तान गया मुस्लिम नेता, जो अब भारत में मांग रहा है शरण

अल्ताफ का परिवार कभी आगरा में रहता था. अब वो वापस वहीं लौटना चाहते हैं

अल्ताफ का परिवार कभी आगरा में रहता था. अब वो वापस वहीं लौटना चाहते हैं

अल्ताफ हुसैन 27 साल पहले पाकिस्तान से भागकर लंदन में राजनीतिक शरण ली थी. तब से वो वहीं बैठकर पाकिस्तान में अपनी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट को कंट्रोल करते हैं. उनकी लोकप्रियता अच्छी खासी है

    पाकिस्तान की सियासत की बहुत बड़ी ताकत हैं अल्ताफ हुसैन. जब बंटवारा हुआ तो उनका परिवार आगरा से पाकिस्तान चला गया. अल्ताफ पाकिस्तान की ताकतवर मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पार्टी के नेता हैं. उनकी एक आवाज पर कराची समेत पाकिस्तान के कई शहरों में हजारों लोग इकट्ठा हो जाते हैं. अल्ताफ 27 साल पहले पाकिस्तान से भागकर लंदन चले गए लेकिन अब वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में शरण देने की गुहार लगा रहे हैं.

    उनका कहना है कि मोदी उन्हें और उनके समर्थकों को भारत में शरण दे दें. वो वापस उस वतन में लौटना चाहते हैं, जहां उनके पुरखे दफन हैं. वो वहीं रहना चाहते हैं. वो कह रहे हैं अगर भारत हिंदू राष्ट्र भी बनता है तो उन्हें ये मंजूर है. आखिर क्यों अल्ताफ जैसा ताकतवर नेता भारत आना चाहता है.

    अल्ताफ लंदन से ही अपनी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट को कंट्रोल करते हैं. वो कराची में टेलीफोन के जरिए लाउडस्पीकर पर भाषण देते हैं. तब ये पूरा शहर थम जाता है. अल्ताफ पाकिस्तान के अकेले नेता हैं जो भारत की तारीफ करते थकते नहीं. उन्होंने कुछ समय पहले ही एक वीडियो जारी किया. इसे उन्होंने "सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा..कहते हुए खत्म किया.

    जानते हैं कि अल्ताफ कौन हैं. कहां से पाकिस्तान पहुंचे. पाकिस्तान में उनकी क्या स्थिति है. वैसे उनकी पार्टी एमक्यूएम को पाकिस्तान की चौथी बड़ी और सिंध की दूसरी बड़ी पार्टी माना जाता है.

    पीटर फ्रैंच की किताब "लिबर्टी आर डेथ" कहती है कि सत्तर के दशक में जब अल्ताफ ने छात्र राजनीति शुरू की थी, तब कोई उन्हें गंभीरता से नहीं लेता था. वो साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके अभिभावक आगरा से पाकिस्तान के कराची आकर बस गए थे.



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    तब वो मोपेड से घूमा करते थे 
    शुरू में बेशक अल्ताफ की ज्यादा पकड़ नहीं थी. वो मोपेड से घूमा करते थे. हालांकि उनकी सक्रियता गजब की थी. कुछ सालों में वो लोकप्रिय होने लगे. कराची और पाकिस्तान के मुहाजिर उन्हें जानने लगे. उन्हें पाकिस्तान में बसे मुहाजिरों की आवाज समझा जाने लगा.

    अल्ताफ हुसैन ने छात्र जीवन से ही पाकिस्तान में मुजाहिरों की हालत पर आवाज उठानी शुरू की. उन्होंने कहा, पाकिस्तान में मुहाजिरों के साथ नौकरी में तो भेदभाव होता ही है बल्कि सामाजिक और आर्थिक तौर पर भी उनकी तरक्की की राह में रोड़े अटकाए जाते हैं. उन्हें ना तो अच्छी पोजीशन मिलती है और ना ही तरक्की.

    यूनिवर्सिटी से बी. फॉर्मा करने के बाद अल्ताफ ने कुछ नौकरियां कीं लेकिन फिर उन्हें लगा कि इससे काम नहीं चलेगा. 1984 में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट नाम से पार्टी बनाने के बाद वो बड़ी ताकत बनते चले गए. इस पार्टी को मुहाजिर कौमी मूवमेंट के नाम से भी जाना जाता है.

    कराची में अल्ताफ हुसैन की मर्जी के बगैर कभी पत्ता भी नहीं खड़कता था


    एक आवाज पर थम जाता था कराची 
    जब उन्होंने एमक्यूएम खड़ी की तो खुलेआम पाकिस्तान की ताकतवर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को चुनौती दी. कराची में अल्ताफ की पकड़ इतनी मजबूत थी कि उनकी एक आवाज पर शहर थम जाता था. हालांकि अल्ताफ के दौर में अस्सी के दशक में कराची में हिंसा बहुत बढ़ गई.

    वो यहां समानांतर सत्ता चलाने लगे. कहा जाने लगा कि कराची में उनके बगैर एक पत्ता भी नहीं खड़क सकता. कराची में एमक्यूएम के कार्यकर्ताओं का बड़ा आधार रहा है. दस हजार तो अकेले सशस्त्र कार्यकर्ता थे. इसके अलावा सदस्यों की संख्या कहीं बहुत ज्यादा.

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    बेनजीर ने कराची में सफाई आपरेशन कराया
    1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने कराची में सेना भेजी ताकि एमक्यूएम और उसके नेताओं को ठिकाने लगाया जा सके. माना जाता है कि उन दिनों कराची में हजारों लोग मारे गए. अल्ताफ तब इंग्लैंड भाग गए. तब से वो वहीं रह रहे हैं.

    मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान की मजबूत पार्टियों में गिनी जाती है, जिसके समर्थक आमतौर पर वो मुहाजिर हैं, जो बंटवारे के दौरान भारत से पाकिस्तान गए थे


    लंदन से टेलीफोन पर देते हैं भाषण
    जब मोबाइल नहीं आए थे तब वो लंदन से अपनी पार्टी को टेलीफोन से कंट्रोल करते थे. इससे भाषण देते थे. कराची में तमाम इलाकों में टेलीफोन को लाउडस्पीकर से कनेक्ट कर दिया जाता था. अब वो समय समय पर पाकिस्तान में पार्टी कार्यकर्ताओं और फॉलोअर्स के लिए वीडियो भी जारी करते हैं.

    कराची से मोटा आर्थिक चंदा उनके पास पहुंचता है
    कराची के लोग मंत्रमुग्ध होकर उनका भाषण सुनते हैं. उनके एक निर्देश पर शहर में कुछ भी हो सकता है. इस शहर के हजारों दुकानदार, वैंडर्स और बाशिंदे लाखों-करोड़ों रुपये अनिवार्य टैक्स की तरह इकट्ठा करके अल्ताफ के पास लंदन में भेजते हैं.

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    लंदन में कड़ी सुरक्षा में 
    अल्ताफ लंदन में अपनी निजी सुरक्षा में रहते हैं. उसके करीब पहुंचना बहुत मुश्किल है. उत्तरी लंदन का उसका घर किसी किले की तरह है. माना जाता है कि वो वहां से कई तरह के कारोबार करते हैं.

    अल्ताफ 1992 में पाकिस्तान से भागकर लंदन आ गए थे, तब से वो यहीं से टेलीफोन के जरिए पार्टी को कंट्रोल करते हैं


    पाकिस्तान को दुनिया का कैंसर बता चुके हैं
    कुछ समय पहले जब उन्होंने पाकिस्तान को दुनिया का कैंसर बताया, तो पाकिस्तानी हुक्मरानों को बहुत खराब लगा. कुछ साल पहले एमक्यूएम के नेशनल असेंबली में 25 सांसद थे लेकिन पार्टी ने वर्ष 2018 में पाकिस्तान के आमचुनावों का बहिष्कार कर दिया. हालांकि उनकी पार्टी दो-फाड़ हो चुकी है.

    कहते हैं कि पाकिस्तान आना गलती थी
    65 साल के अल्ताफ कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने को भारत का अंदरूनी मामला बताते हैं. वो लगातार कहते हैं कि पाकिस्तान और भारत दोनों एक ही दिन आजाद हुए लेकिन भारत हर सेक्टर में इतना आगे है कि खुद को पाकिस्तानी कहने में शर्मिंदगी होती है.
    वो और भी कई बातें कहते हैं. मसलन मुजाहिरों का भारत छोड़कर पाकिस्तान आना सबसे बड़ी भूल थी. वो प्रधानमंत्री मोदी से मुहाजिरों के हक की आवाज उठाने की बात करते हैं. वो कहते हैं कि हम मुजाहिर तो भारत और मोदी के ही लोग हैं. हम भारत में ही खुश थे. हमारे लिए पाकिस्तान सही जगह है ही नहीं.

    अब भी जब अल्ताफ टेलीफोन के जरिए भाषण देते हैं तो कराची के तमाम इलाकों में इसे लाउडस्पीकर से कनेक्ट करके सुना जाता है.  एमक्यूएम की रैलियां इतनी बड़ी होती हैं कि लोग हैरान रह जाते हैं


    चल रहे हैं 3576 मामले
    इस शख्स पर एक दो नहीं बल्कि पाकिस्तान में 3576 मामले चल रहे हैं. 2014 में उन्हें एक हत्या के मामले में लंदन में गिरफ्तार किया गया लेकिन तीसरे दिन ही रिहाई हो गई. कुछ लोग अल्ताफ को पीर यानी संत भी मानते हैं. ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर चुके अल्ताफ बेशक पाकिस्तान में मोस्ट वांडेट हैं लेकिन स्कॉटलैंड पुलिस कहती है कि उन्होंने लंदन में कोई कानून नहीं तोड़ा है. अल्ताफ अब कई बीमारियों के शिकार हो चुके हैं.
    उनके ज्यादातर रिश्तेदार कराची में रहते हैं. पुलिस उसमें कई की हत्याएं कर चुकी है. अल्ताफ की बीवी भी उनके साथ कराची से लंदन आ गई थी लेकिन फिर दोनों में तलाक हो गया. उनकी बेटी खुद एक बड़े बिजनेस की मालकिन है.

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    Tags: Agra news, India pakistan, Karachi, Pakistan

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