Explained: उत्तर कोरिया के मॉडल शहर में क्यों कोई नहीं रहता?

किजोंग डांग (Kijong-dong) नाम का ये शहर असल में नकली सिटी है- सांकेतिक फोटो

किजोंग डांग (Kijong-dong) नाम का ये शहर असल में नकली सिटी है- सांकेतिक फोटो

उत्तर कोरिया में किजोंग डांग (Kijong-dong town in North Korea) नाम का ये शहर नकली सिटी है, जो दक्षिण कोरिया से सटी सीमा पर है. शहर एक तरह के जाल का काम करता है ताकि उत्तर कोरिया से भागे लोग शहर की चमकदमक देखकर लौट आएं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 3, 2021, 3:28 PM IST
  • Share this:
नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया के Demilitarized Zone से सटा हुआ है ये शहर. यहां पर दोनों ही देशों के सैनिक भारी संख्या में तैनात रहते हैं ताकि कोई किसी सीमा का अतिक्रमण न कर ले. इस शहर में ऊंची इमारतें हैं. एक प्ले स्कूल और दो सेकेंडरी स्कूल हैं. साथ ही अस्पताल और दुकानें भी हैं. नॉर्थ कोरिया का कहना है कि शहर में 200 लोग रहते हैं और व्यवस्था से काफी खुश हैं. हालांकि सैटेलाइट इमेजों में कई बार ये पता चल चुका है कि शहर में कभी कोई रहा ही नहीं.

किजोंग डांग असल में एक प्रोफेगंडा टाउन है, जिसका मकसद है कोरिया छोड़कर भागे लगभग 50 हजार लोगों की बात को गलत साबित करना. बता दें कि किम परिवार की तानाशाही की वजह से देश से बहुत से लोग बाहर निकल भागे और साउथ कोरिया या फिर दूसरे देशों में जाकर बस गए. वहां जाकर इंटरनेशनल मीडिया में उन्होंने अपने देश के सच का खुलासा किया कि वहां नागरिकों के अधिकार किस कदर सीमित हैं. और विरोध करने वालों को कैसे कैंप में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. इसके बाद से रहस्यों की परतें खुलने लगीं.

ये भी पढ़ें: क्या तुर्की कोरोना वैक्सीन के बदले चीन से उइगर मुस्लिमों का सौदा कर लेगा?

सख्त सेंसरशिप वाले देश में इस बात से खलबली मच गई. तब ये साबित करने के लिए कि भागे हुए लोगों की बात झूठी है और नॉर्थ कोरिया भी दूसरे देशों की तरह अपने नागरिकों का खयाल रखता है, ये शहर बसाया गया. यही वजह है कि इसे propaganda town भी कहते हैं.
north korea
शहर व्यवस्थित ढंग से बसा हुआ है लेकिन माना जाता है कि किसी घर के अंदर जाएं तो वहां सिर्फ दीवारें हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


पूरे शहर में एक ही रंग की नीली-नीली छतें हैं. शहर व्यवस्थित ढंग से बसा हुआ है लेकिन माना जाता है कि किसी घर के अंदर जाएं तो वहां सिर्फ दीवारें हैं, अंदर कोई स्ट्रक्चर नहीं है. यहां तक कि घरों में खिड़कियां तक नहीं हैं. घरों से कभी कोई आता-जाता नहीं दिखता. कभी कोई हलचल नहीं होती है. कभी किसी जगह आज तक कोई नहीं दिखा. कभी कपड़े सूखते या परदे हिलते नहीं दिखे. हां इस बात का खयाल रखा जाता है कि दिन में लाइट बंद हो और रात में लाइट जले. सारी लाइटें एक साथ ऑन और ऑफ होती हैं. अगर कभी कोई इंसान नजर आया है तो वो है सड़कों के किनारे बने पेवमेंट्स की सफाई करता हुआ शख्स.

ये भी पढ़ें: Explained: क्यों जापान में बच्चों से ज्यादा पालतू जानवरों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है?



यहां पर कई लाउडस्पीकर लगे हुए हैं, जिनका मुंह साउथ कोरिया की तरफ है, जो रोज लगभग 20 घंटे बजते ही रहते हैं. इनमें लगातार नॉर्थ कोरिया के लोगों के शांतिपूर्ण जीवन और तानाशाह की अच्छाई की बातें बताई जाती हैं. साथ ही उन लोगों की आलोचना होती है जो बेवजह ऐसे भले देशनायक को छोड़कर चले गए. लाउड स्पीकर पर पश्चिमी संस्कृति की लगातार बुराई होती रहती है, जिनमें बिना नाम लिए खासकर अमेरिका को भला-बुरा कहा जाता है. इसके साथ ही नॉर्थ कोरिया का देशभक्ति गीत बजता रहता है.

kim jong un
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग (Kim Jong-un) - सांकेतिक फोटो (needpix)


यहां इतना शोर होता है कि दूसरी ओर रहने वाले लोग लगातार परेशान रहते हैं. बीच में दोनों देशों के करार के कारण लाउड स्पीकर साल 2004 से 2015 तक बंद रहे लेकिन टेंशन बढ़ते ही साल 2016 में लाउड स्पीकर दोबारा बजाए जाने लगे.

ये भी पढ़ें: खगोलविदों ने पकड़ी रहस्यमयी तरंगें, तो क्या एलियन हमें कोई इशारा कर रहे हैं?

साल 1980 में साउथ कोरिया ने अपने देश का झंडा सीमा पर लगवाया. ये 323 फीट लंबा और 130 किलोग्राम भारी था. इसपर देखादेखी नॉर्थ कोरिया ने इससे भी बड़ा झंडा तैयार करवाया. किम के देश का ये झंडा 525 फीट लंबा और 270 किलोग्राम भारी है. ये झंडा इसी नकली शहर में लगाया गया ताकि दूर से भी दूसरे देश के लोग उसे देख सकें. दोनों देशों के बीच झंडे की इस होड़ को flagpole war भी कहा जाता है. नॉर्थ कोरिया का लगाया ये झंडा दुनिया का सबसे लंबा झंडा रहा. लगभग एक दशक बाद Azerbaijan देश ने इससे भी ऊंचा झंडा तैयार करवाया. अब किम का ये झंडा दुनिया का चौथा सबसे ऊंचा झंडा बन चुका है. सऊदी अरब और तजाकिस्तान भी इससे ऊंचे फ्लैग बनवा चुके हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज