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इराक में सरकार के खिलाफ इन वजहों से हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन

News18Hindi
Updated: October 27, 2019, 1:46 PM IST
इराक में सरकार के खिलाफ इन वजहों से हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन
इराक में भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी के चलते लोग सड़क पर उतर आए हैं.

प्रदर्शनकारी इराक (Iraq) में बेहतर सुविधाओं के साथ साथ नौकरियों और भ्रष्टाचार को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों में 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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  • Last Updated: October 27, 2019, 1:46 PM IST
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इराक (Iraq) में सरकार (government ) के खिलाफ आम लोगों का गुस्सा भड़क उठा है. लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. इराक में होने वाली हिंसक प्रदर्शनों (Protests) के पीछे देश में बढ़ती बेरोजगारी और गरीबी है. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों में अबतक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इराक से आई रिपोर्ट के अनुसार राजधानी बगदाद में ताजा प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गयी है.

सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की एक भीड़ ने शहर के दक्षिणी इलाके में स्थित एक मिलीशिया समूह के दफ्तरों को निशाना बनाया है. भीड़ के इस हमले में कई लोगों के मारे जाने की खबर है. कई दशकों से हिंसक दंश झलने के बाद बनी इराक सरकार के खिलाफ आखिर लोगों लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग सड़कों पर सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं?

राजधानी बगदाद में ताजा प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा है.


हिंसाग्रस्त रहने के चलते अव्यवस्था का शिकार

खाड़ी युद्ध के बाद इराक लगातार कई दशकों तक अस्थिरता का शिकार रहा है. तेल संपन्न देश होने के बावजूद हिंसाग्रस्त रहने के कारण देश गंभीर आर्थिक समस्याओं से घिरा हुआ है. साथ ही देश में सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर है. ऐसी परिस्थियों में देश के आम लोगों के जीवन में समस्याओं का अंबार है. देश में भ्रष्ट शासन व्यवस्था के चलते बड़े पैमाने पर युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं. अब लोगों के सब्र का पैमाना भर चुका है और नाराज लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर आ गए हैं.

बेहतर नागरिक सुविधाओं और नौकरियों की मांग
प्रदर्शनकारी देश में बेहतर सुविधाओं के साथ साथ नौकरियों और भ्रष्टाचार को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं. दरअसल आम लोगों द्वारा अपनी मांगों को लेकर पूरे देश में पिछले एक महीने से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियों ने इस प्रदर्शन को बलात रोकने का प्रयास किया. जिसके चलते आंदोलन हिंसक हो गया और जगह-जगह हिंसक टकराव होने लगे. जिसमें करीब डेढ़ सौ लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई है.
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जगह-जगह हिंसक टकराव के चलते करीब डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गयी है.


प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री की सख्त चेतावनी
वहीं देश के प्रधानमंत्री अदेल अब्दुल महदी ने प्रदर्शनकारियों को सख्त हिदायत दी है. उन्होंने ने कहा कि देश में हिंसा करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है. सरकार किसी भी कीमत पर हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगी. इसके अलावा देश के प्रमुख शिया धर्म गुरु अयतुल्लाह अली अल-सिस्तानी ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि प्रशासन सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को दबाने के लिए बहुत ज्यादा बल प्रयोग कर रही है.

हालांकि प्रधानमंत्री महदी ने लोगों को आश्वस्त भी किया है कि लोगों की मांग पर वो व्यवस्था में सुधार करेंगे. इसके लिए सरकार की कैबिनेट में बड़े पैमाने पर फेर बदल करने को भी तैयारी है. लेकिन प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा धड़ा प्रधानमंत्री के इस आश्वासन पर भरोशा नहीं कर रहा है.

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई से अमेरिका का इनकार
उल्लेखनीय है कि हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. जिसके चलते बगदाद में हजारों की संख्या में अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं. अमेरिकी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सैनिक इन प्रदर्शनों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई में हिस्सा नहीं ले रही हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है. साथ ही अमेरिकी दूतावास ने दोनों ही पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है. दूतावास ने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों में किसी भी तरफ से हिंसा की कोई जगह नहीं है.

अमेरिका ने लोगों के प्रदर्शन करने के लोकतांत्रित अधिकार का समर्थन किया है.


प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की अहम भूमिका
बता दें कि इराक में हो रहे सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की एक अहम भूमिका है. पोस्ट के जरिए प्रदर्शनकारियों को 1 अक्टूबर को तहरीर चौक पर इकट्ठा होने के लिए कहा गया था. देश की खराब होती अर्थव्यवस्था, नौकरियों की कमी और सरकारी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया. जब कुछ लोगों ने ग्रीन जोन में प्रवेश करने की कोशिश की तो वहां मौजूद सुरक्षा बलों ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और हथियारों का इस्तेमाल किया. सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई.

फिर से भड़की हिंसा
इस बल प्रयोग का जवाब प्रदर्शनकारियों ने पत्थर से दिया और वहां रखे कचरापात्रों में आग लगा दी. सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस झड़प में कम से कम साढ़े तीन सौ से ज़्यादा लोग घायल भी हुए हैं. वहीं गृह मंत्रालय के हवाले से आई एक रिपोर्ट के अनुसार देशभर में हुए इन हिंसक प्रदर्शनों में कम से कम 68 सैन्य सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं. बगदाद में हुए प्रदर्शन में युवाऔ और बेरोजगार लोगों ने हिस्सा लिया है. सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अधित्याधिक बल प्रयोग ने देशव्यापी प्रदर्शनों का रूप ले लिया है.

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First published: October 27, 2019, 1:46 PM IST
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