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बाहर की ताकतें प्रभावित कर रही हैं पृथ्वी की टेक्टेनिक प्लेट की गतिविधियां

बाहर की ताकतें प्रभावित कर रही हैं पृथ्वी की टेक्टेनिक प्लेट की गतिविधियां

पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) की सक्रियता ग्रह की जलवायु को बहुत संवदनशील बना देती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) की सक्रियता ग्रह की जलवायु को बहुत संवदनशील बना देती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    पृथ्वी ग्रह (Earth)हमारे सौरमंडल के दूसरे ग्रहों से बहुत अलग है. इसकी वजह केवल जीवन ही नहीं बल्कि उसकी संरचना है जो उसे दूसरे ग्रहों से अलग बनाती है. पृथ्वी की बाहर परत जिसे थलमंडल (Lithosphere) भी कहते हैं 20 से ज्यादा टेक्टोनिक प्लेट (Tectonic Plates) से बनी है ये प्लेट पिघले प्लास्टिक के ऊपर तैरती हुई मानी जाती जाती हैं. जिनकी गतिविधियों से महाद्वीपों का आकार बदलता रहता है. इन्हीं गतिविधियों की वजह से यहां पर्वत मालाएं और महासागरों की गहरी कंदराएं बनती हैं. नए अध्ययन में बताया गया है कि इनकी गतिविधियों को पृथ्वी से बाहर की ताकतें प्रभावित करती है.

    एक मत यह भी
    टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों की वजह पर काफी पहले से बहस होती आ रही है. इस विषय पर कई तरह के मत दिए गए हैं. इनमें से एक है कि पृथ्वी की गर्म क्रोड़ से पैदा हुई संवहनीय धाराएं इन विशालकाय प्लेट को गतिमान बनाएं हैं. लेकिन संदेह यह कि क्या ये धाराएं इतनी विशाल मात्रा में ऊर्जा पैदा कर पाती हैं कि ये प्लेट गतिमान हो सकें.

    पृथ्वी के बाहर के बल
    जीएसए स्पेशल पेपर्स में प्रकाशित इस अध्ययन में  शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के बाहर के बलों की ओर ध्यान दिया है. इसमें शोधकर्ताओं ने कहा है कि सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण बल ही है जो पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स को गतिमान बनाए हुए हैं. इस अवधारणा में बैरीसेंटर की भूमका प्रमुख है जिसे चक्कर लगा रहे पिंडों के तंत्र के भार का केंद्र कहा जाता है.

    बैरीसेंटर की स्थिति में  बदालव
    इस मामले में पृथ्वी और चंद्रमा के बैरीसेंटर (Barycenter) की बात हो रही है. यह वह बिंदु है जिसके बीच का चक्कर हमारा चंद्रमा लगा रहा है और वास्तव में वह हमारे ग्रह का केंद्र बिंदु नहीं है जिसे जियोसेंटर कहा जाता है. वास्तव में पृथ्वी के अंदर स्थित बैरीसेंटर की स्थिति हर महीने करीब 600 किलोमीटर तक बदल जाती है क्योंकि चंद्रमा की कक्षा सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण दीर्घवृत्ताकार है.

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    यह सब सूर्य, चंद्रमा और खुद पृथ्वी (Earth) के तनावों का मिला जुला प्रभाव है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    एक तरह का असंतुलन
    सेंट लुइस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के भूभौतिकविद एनी होफमीस्टर बताती हैं, “चूंकि कंपित हो रहा बैरीसेंटर जियोसेंटर से 4600 किलोमीटर की दूरी पर है. इस वजह से पृथ्वी का स्पर्शरेखीय कक्षीय त्वरण और सौर खिंचाव बैरीसेंटर के अलावा हर जगह संतुलित नहीं है. पृथ्वी की गर्म मोटी और ताकतवर आंतरिक परतें इन बलों को झेल सकती हैं, लेकिन इसका पतला, ठंडा और भुरभुरा स्थलमंडल इस पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है.

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    बहुत सारे बलों का प्रभाव
    इसमें और तनाव जोड़ने का काम पृथ्वी की धुरी करती है जिस पर वह घूमती है और जिसके कारण पृथ्वी आदर्श रूप में गोलाकार नहीं है. चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य से आने वाले ये तनाव मिलकर टेक्टोनिक प्लेट्स को गतिमान करते हैं और उन्हें तोड़ने का भी काम करते हैं. शोधकर्ताओं ने बताया कि पृथ्वी की जटिल कक्षा में अपकेंद्रीय बल की मात्रा और दिशा में अंतर और सौर बल मिलकर  पृथ्वी पर बहुत ही असमान, असथाई रूप से विविधता भरे बल लागते हैं जिस पर पहले से ही घूर्णन का दबाव होता है.

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    इसमें पृथ्वी (Earth)की झुके हुए अक्ष की भी भूमिका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    तीनों का मिला जुला प्रभाव
    इस सब का प्रभाव यह होता है कि छोट थलमंडल और ठोस ऊपरी मेंटल अलग अलग गति से घूर्णन करते हैं जो पृथ्वी-चंद्रमा-सूर्य का मिला जुला लेकिन विशेष प्रभाव है. इसमें चंद्रमा का आकर और सूर्य से दूरी प्रमुख हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि चंद्रमा के बिना टेक्टोनिक प्लेटों में वह गतिविधि कभी नहीं दिख पाती जो आज है. वहीं सूर्य का चंद्रमा पर गुरुत्व बल पृथ्वी पर लगे बल से 2.2 गुना ज्यादा है. जिससे अगले एक अरब साल में चंद्रमा पृथ्वी से दूर हो जाएगा. इसी तरह से यह बल पृथ्वी के आंतरिक हिस्सों पर भी काम करते हैं.

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    शोधकर्ताओं ने बताया कि प्लेट टेक्टोनिक गतिविधि दो अलग लेकिन अंतरक्रिया करने वाले गुरुत्व प्रक्रियाओं का नतीजा है. जहां पृथ्वी के आंतरिक हिस्सों की गर्मी ने ऊष्मीय और भौतिक सीमाएं निर्धारित कर थलमंडल को अलग रखा. शोधकर्ताओं ने अपने इस विश्लेषण को सौरमंडल  पर दूसरे पथरीले ग्रहों के चंद्रमाओं पर भी लागू किया लेकिन वहां ऐसी टेक्टोनिक गतिविधि के संकेत नहीं मिले. लेकिन प्लूटो में पृथ्वी के जैसी समानताएं जरूर मिली हैं जिसका एक बड़ा चंद्रमा है.

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