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राम ने तीर से धरती में छेद कर बुझाई थी सीता की प्यास, कल पश्चिम बंगाल की अयोध्या में है चुनाव

News18Hindi
Updated: May 11, 2019, 12:52 PM IST
राम ने तीर से धरती में छेद कर बुझाई थी सीता की प्यास, कल पश्चिम बंगाल की अयोध्या में है चुनाव
भगवान राम की तीर से निकला कुंड

पुरुलिया लोकसभा चुनाव 2019 बेहद दिलचस्प होने जा रहा है. बीजेपी यहां चौथे नंबर से पहले नंबर पर आने की ताक में है.

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लोकसभा चुनाव 2019 में सबसे ज्यादा सरगर्मी पश्चिम बंगाल रही. अभी तक हुए पांच चरणों के मतदान में अगर सबसे ज्यादा छिट-फुट हिंसा की खबरें किसी एक प्रदेश से आई हैं, तो वो पश्चिम बंगाल है. इसके कारण भी साफ हैं. बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP), ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाने के फिराक में है. असल में बीते कुछ विधानसभा चुनावों में नॉर्थ ईस्ट के प्रदेशों में बीजेपी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है. इसलिए अब बीजेपी की नजर पश्चिम बंगाल पर भी है. ऐसे में छठे व सातवें चरण में पश्चिम बंगाल की बची हुई 10 सीटों के चुनाव पर सबकी नजर है.

बताया जा रहा है कि इनमें सबसे ज्यादा संवेदनशील चुनाव पुरुलिया में देखने को मिलेगा. यहां पर बीजेपी ने ग्राउंड-लेवल पर जमकर प्रचार किया है.

पुरुलिया लोकसभा चुनाव 2019 के प्रत्याशी
यहां पर चार प्रमुख उम्मीदवारों बीजेपी के ज्योर्तिमय महतो, तृण मूल कांग्रेस (TMC) के मृगांक महतो, कांग्रेस के नेपाल महतो और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (CPIM) के बीर सिंह महतों में बीजेपी और टीएमसी की प्रमुख लड़ाई है. फिलहाल इस सीट के सांसद टीएमसी के मृगांक महतो हैं. लेकिन बीजेपी टीएमसी से यह सीट छीनने में पूरी ताकत से लगी है. इसमें बीजेपी को अजोध्या हिल्स (अयोध्या पहाड़ी) का लाभ मिल सकता है.



अयोध्या हिल्स की झलक




पुरुलिया लोकसभा चुनाव 2014 के परिणाम
पिछले आम चुनाव में बीजेपी पुरुलिया लोकसभा में चौथे स्‍थान पर आई थी. लोकसभा चुनाव 2019 की लहर के बावजूद बीजेपी के उम्मीदवार बिकाश बनर्जी को कुल 86,236 वोट मिले थे. जबकि सीट जीतने वाले टीएमसी के उम्मीदवार मृगांक महतो को 468,277 वोट मिले थे. दोनों को मिले वोटों में साढ़े तीन लाख से ज्यादा वोटों का फासला था. बीजेपी की तुलना में दूसरे नंबर पर आए ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नरहरि महतो को 314,400 और तीसरे स्‍थान पर कांग्रेस उम्मीदवार नेपाल महतो को 257,923 वोट मिले थे.

पुरुलिया लोकसभा क्षेत्र का समीकरण
साल 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुलिया लोकसभा क्षेत्र के अंतरगत आने वाले भूभाग में 2244195 लोग रहते हैं. इनमें 87.16 फीसदी ग्रामीण व 12.84 फीसदी शहरी लोग हैं. जाति आधारित आंकडों की बात करें तो अनुसूचित जाति व जनजाति 35.43 जबकि 2017 की वोटर लिस्ट के मुताबिक यहां कुल 1571323 वोटर हैं.

वनवास के समय पुरुलिया में रहे थे भगवान राम
दरअसल, पुरुलिया क्षेत्र में भगवान राम को लेकर कई कथाएं हैं. बीजेपी को यहां आधार ढूढ़ने के लिए इन कहानियों ने मदद की. बताया जाता है कि 14 वर्ष वनवास के दौरान भगवान राम और सीता पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित पहाड़ियों पर काफी समय तक रहे थे. इसलिए इस पहाड़ी का नाम अयोध्या के नाम पर रख दिया गया. इस पहाड़ी बारे में ये भी कहा जाता है ‌कि एक बार सीता को प्यास लगी थी, तब भगवान राम ने अपनी तीर को धरती पर मारा था. इससे वहां एक कुंड बन गया. वह अब भी मौजूद है. इसे अब सीता कुंड के तौर पर जाना जाता है. यहां बैशाख के महीने में पूर्णमासी के दिन आदिवासी लोग शिकार के लिए भी एकजुट होते हैं.

अजोध्या हिल्स की एक झलक


अजोध्या हिल्स पर दी जाती है पर्वतारोहियों को ट्रेनिंग
अजोध्या हिल्स को भगवान राम की कभी उपस्थिति के अलावा इस लिए भी जाना जाता है क्योंकि वहां युवा पर्वतारोहियों को पहाड़ चढ़ने संबंधित ट्रेनिंग भी जाती हैं. पुरुलिया में कई ऐसे इंस्ट‌ीट्यूट हैं जो अपने यहां के शिक्षार्थियों को यहां पर लेकर आते हैं.यहां पुहंचने के लिए झालदा और सीरकाबाद व बाघमुंडी से होकर जाना पड़ता है. यहां पर रहने के लिए हर तरह की सुविधाएं मौजूद हैं.

बताया जा रहा है कि ऐतिसाहासिक तथ्यों और अजोध्या हिल्स की अध्यात्‍मिक फिजा को देखते हुए यहां पर राजनीतिक बदलाव की उम्मीद की जा रही है. ऐसे में 12 मई को होने वाले पुरुलिया लोकसभा में मतदान पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी.

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First published: May 11, 2019, 11:50 AM IST
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