सवाल-जवाब : ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अब किस तरह कस जाएगी नकेल, क्या कुछ बदलेगा

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के न्यूज और करेंट अफेयर्स सरकार के दायरे में होंगे.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के न्यूज और करेंट अफेयर्स सरकार के दायरे में होंगे.

हाल ही में सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT PlateForms) और डिजिटल कंटेट (Digital content) के रेगुलेशन (Regulation) के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके अनुसार वेबसीरीज (Web series) के जरिए या अन्य प्रोग्राम्स के जरिए ओटीटी प्लेटफॉर्म जो कुछ परोस रहे हैं, उसे देश के श्रोताओं के अनुकूल बनाएं. उससे अश्लीलता, हिंसा और आपत्तिजनक कंटेट खत्म करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 12, 2020, 4:42 PM IST
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सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी करके ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, आनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग और आनलाइन कंटेट पर नजर रखने का फैसला किया है. अब ये सारे माध्यम सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत होंगे. उनकी मॉनिटरिंग की जाएगी. सरकार उनके आपत्तिजनक कंटेट पर कैंची चला सकती है. ये भी संभव है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए भी सेंसर जैसी कोई व्यवस्था बनाई जाए. बहरहाल हम जानते हैं कि फिलहाल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए क्या नियम हैं और वो अब कैसे हो जाएंगे.

पिछले कुछ समय में इंटरनेट के प्रचार-प्रसार के बाद भारत में ओटीटी और आनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग बढ़ गई है. ये काफी लोकप्रिय भी हो रही है. इसीलिए देखते ही देखते आनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर वेबसीरीज और अन्य तरह के कार्यक्रम की भीड़ हो गई है. हालांकि इन्हें लेकर बहुत तरह की शिकायतें भी हैं. इनके कंटेंट और शूट को लेकर भी शिकायतें होती रही हैं.

दरअसल सरकार ने ये कदम भी खुद नहीं उठाया है बल्कि सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित मामले जाने और कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार को भी महसूस हुआ कि अब जिस तरह ओटीटी प्लेटफॉर्म बढ़ रहा है और ऐसा लग रहा है कि ये भविष्य का बड़ा प्लेटफॉर्म बन रहा है, तब उसने ये कदम उठाया, हालांकि इसको लेकर अब भी कई तरह के सवाल हैं.



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ओटीटी प्लेटफॉर्म का स्वरूप कैसा होगा?
- फिलहाल भारत में जो बड़े और चर्चित ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं, उसमें अमेजन, नेटफिलिक्स, हॉटस्टार आदि शामिल हैं. इनकी संख्या अब लगातार बढ़ रही है लेकिन अभी उसमें विदेश कंटेट ज्यादा है. जो विदेशी वेबसीरीज फिलहाल भारत में तमाम ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं, उसमें जो कंटेट है, वो तमाम विदेशी देशों के हिसाब से तो उचित हो सकता है लेकिन भारतीय प्रतिमानों के अनुसार वो कुछ ज्यादा ही बोल्ड है. अब इन प्लेटफॉर्म को भारत में अगर कुछ दिखाना है तो उन सभी गाइडलाइंस को मानना पडे़गा, जो भारत के कानूनों और नियमों के अनुकूल हो.

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आमतौर पर ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेट को लेकर फिलहाल क्या शिकायतें हैं?
- ज्यादातर एडल्ट कंटेट परोस रहे हैं. उनमें अश्लीलता तो है ही साथ ही हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है. साथ ही वेबसीरीज पर आने वाले संवाद की भाषा बहुत भद्दी और आपत्तिजनक है.

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इस साल की शुरुआत से सरकार के सीनियर अधिकारी इस पर काम कर रहे थे कि वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के लिए रेगुलेशन की जरूरत है. इसी के मद्देनजर पिछले साल 15 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने साथ आकर एक संस्था भी बनाई थी.


क्या इनके लिए गाइडलाइंस तय हो गई हैं?
- अभी शायद इस पर काम होना बाकी है लेकिन मोटामोटी फिलहाल उनकी गाइडलाइंस वही हो सकती हैं जो हमारी फिल्मों के प्रदर्शन या टीवी चैनल्स पर दिखाए जाने वाले प्रोग्राम्स के लिए जरूरी होती हैं. लेकिन ये दीगर है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वेबसीरीज इसीलिए ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं, क्योंकि वो बगैर किसी बंधन के कंटेंट तैयार करते हैं और उन्हें दिखाते हैं. उनमें कई अच्छी बातें भी हैं और कई कुछ हदतक आपत्तिजनक.

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क्या सरकार का ध्यान अभी इस पर गया या पहले से वो इस पर काम कर रहे थे?
- इस साल की शुरुआत से सरकार के सीनियर अधिकारी इस पर काम कर रहे थे कि वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के लिए रेगुलेशन की जरूरत है. पिछले साल नवंबर में सूचना एवं प्रसारण सचिव अमित खरे ने कहा था कि वो एक ऐसा सिस्टम देख रहे हैं, जिसमें ओटीटी इंडस्ट्री सेल्फ रेगुलेशन सिस्टम लागू करे.

क्या अब सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए भी सेंसर जैसी व्यवस्था शुरू करेगी?
- अभी ये स्पष्ट नहीं है कि सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म से स्वनियमन और स्वनियंत्रण वाली स्थिति चाहती है या फिर सेंसर बोर्ड जैसी व्यवस्था. वैसे पिछले साल देश के टॉप 15 ओटीटी प्लेटफॉर्म ने मिलकर एक संगठन खड़ा किया था, जो उसके रेगुलेशन के लिए काम करे.

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क्या ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए फिलहाल कोई कानून है?
- नहीं. इसीलिए सरकार ने अभी नोटिफिकेशन जारी किया है. आने वाले समय में इसे कानून के दायरे से जोड़ा जाएगा. वैसे टीवी पर आने वाले प्रोग्राम्स को केबिल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स 1994 के तहत चलना होता है तो फिल्में सिनेमेटोग्राफ एक्ट 1952 के तहत चलती हैं.
उसी तरह प्रिंट मीडिया, न्यूज आदि भी किसी ना किसी तरह रेगुलेट होते हैं लेकिन आनलाइन न्यूज का अभी रेगुलेशन नहीं है, इसे भी सरकार अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जारी हुए नोटिफिकेशन के दायरे में ले आई है

ओटीटी प्लेटफॉर्म ने मिलकर देश में खुद को स्वनियंत्रित करने के लिए जो संस्था बनाई है, उसका नाम क्या है?
- पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट और सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म के सेल्फ रेगुलेशन का सुझाव दिया था, उसके बाद 15 ओटीटी प्लेफॉर्म्स ने साथ आकर इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिशएन ऑफ इंडिया (आईएएमआईए) नाम की संस्था बनाई थी, जिसमें उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय की बातों पर सहमति जताते हुए सेल्फ रेगुलेशन और फ्रेमवर्क में काम करने पर सहमति जताई थी. इस संस्था में नेटफिलिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, डिज्नी हॉटस्टार, एएलटी बालाजी, जी5, एआरआरई, डिस्कवरी प्लस, इरोज नाउ, फिलिक्सट्री, होईचोई, हंगामा, एमएक्स प्लेयर, शेरमारू, वूट और जियो सिनेमा शामिल हैं.

क्या दूसरे देशों में भी डिजिटल कंटेट का रेगुलेशन है?
अमेरिका में सभी तरह के इलैक्ट्रानिक कम्युनिकेशन फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन से रेगुलेट होते हैं. ये सरकार की स्वतंत्र संस्था है. इसी तरह अमेरिका में इंटरनेट को लेकर भी रेगुलेशंस हैं. चीन, सिंगापुर और साउथ कोरिया ने भी इंटरनेट आधारित सेंसरशिप कानून बनाए हुए हैं.
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