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क्वांटम कंप्यूटर ने सुपर कम्प्यूटर को पछाड़ा, जानिए क्या है मामला

माना जा रहा है कि क्वांटम कम्प्यूटर एक दिन सुपर कंप्यूटर की जगह ले लेंगे.

माना जा रहा है कि क्वांटम कम्प्यूटर एक दिन सुपर कंप्यूटर की जगह ले लेंगे.

अब सुपर कम्प्यूटरों (Super Computers) को क्वांटम कम्प्यूटर्स (Quantum Computers) ने ऊर्जा के उपयोग के मामले में पीछे छोड़ दिया है, लेकिन क्या वे परंपरागत कम्प्यूटरों की जगह ले सकते हैं.

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नई दिल्ली: इस समय सुपर कम्प्यूटर (Super Computer) ही दुनिया के सबसे ताकतवर कम्प्यूटर माने जाते हैं. लेकिन शोधकर्ताओं इस नई तकनीक में खास उपलब्धि हासिल करते हैं कम्प्यूटिंग क्षेत्र में ऊर्जा के उपयोग में नया मानदंड स्थापित किया है. अब क्वांटम कम्प्यूटर (Quantum Computer) किसी एक टास्क को पूरा करने के लिए सुपर कम्प्यूटर से काफी कम ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं.

किस तरह के क्वांटम कम्प्यूटर पर किया गया प्रयोग
शोधकर्ताओं ने इसके नॉएसी इंटरमिडिएट स्केल क्वांटम (NISQ) कम्पूटर पर प्रयोग किया है. तकनीकी विशेषतज्ञों को क्वांटम कम्प्यूटर तकनीक से बहुत उम्मीदें हैं. क्या क्वांटम कम्प्यूटर को सुपर कम्प्यूटर को पीछे छोड़ सकते हैं यह सवाल अहम होता जा रहा है.

कैसे परखा जाए कौन बेहतर- यही चुनौती है
शोधकर्ता इस समय यही पता करने में लगे हैं कि नए क्वांटम कम्प्यूटर क्या शक्तिशाली कम्प्यूरों से बेहतर काम कर सकते हैं और यह किस तरह से परखा जाए यह भी एक चुनौती है. इस मामले में रैंडम क्वांटम सर्किट (RQC) से आउट निकालने से भी तुलना की जा सकती है. वहीं क्वांटम सिम्यूलेटर प्रोग्राम चलाने से भी इस समस्या का हल हो सकता है. लेकिन सवाल यही है कि क्यों क्वांटम कम्प्यूटर भी क्वांटम सिम्यूलेट की तरह सी दक्षता से सवाल हल कर सकता है.

दक्षता कैसे तय हो
दक्षता निश्चित करना चुनौती है.आमतौर पर यह किसी सवाल को सुलझाने में लगने वाले समय से नापा जाता है. इस शोध के लिए साल्वातोर मैंड्रा और उनके साथियों ने नासा के एमेस रिसर्च सेंटर, कैलिफौर्निया स्थित गूगल एंड ओक रिज नेशनल लैब में अध्ययन किया. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस मामले में समय यानि कि गति को ही पैमाना मानना ठीक नहीं होगा. मैंड्रा का ने कहा, “एक समस्या को सुलझाने में एक वनकोर प्रोसेसर एक घंटा,टू-कोर प्रोसेसर 30 मिनट, और फोर-कोर प्रोसेसर 15 मिनट लगाएगा.”

आमतौर पर कम्प्यूटर की दक्षता उनकी गणना करने में लगने वाले समय से की जाती है.


तो क्या रखा शोधकर्ताओं ने आधार
इसके बजाय मैंड्रा की टीम ने  NISQ और परंपरागत सुपर कम्प्यूटर के द्वारा  RCQ समस्या हल करने में लगने वाली ऊर्जा की गणना की. इसके लिए उन्होंने क्यूफ्लेक्स (qFlex) प्रोग्राम बनाया. इस प्रोग्राम को एमेस स्थिति इलेक्ट्रा सुपरकम्प्यूटर और ओक रिज स्थित सम्मिट सुपर कम्प्यूटर पर चलाया गया. इसमें सम्मिट दुनिया का सबसे शक्तिशाली सुपर कम्प्यूटर है.

किसने कितनी ऊर्जा की खपत की
उन्होंने दोनों सुपर कम्प्यूटर के द्वारा इस प्रोग्राम को चलाने में खर्च हुई ऊर्जा की गणना की और उसकी तुलना NISQ कम्प्यूटर की उपयोग में लाई गई ऊर्जा से की. जहां इलेक्ट्रा ने 97 MWh (MegaWatt hour) और सम्मिट ने 21MWh की खपत की, वहीं NISQ ने केवल 0.00042 MWh की ऊर्जा खर्च की.

अभी बहुत कुछ तय होना है
बेशक शोध में यही पाया गया कि क्वांटम कम्प्यूटर क्वांटम सिम्यूलेशन वाले प्रोग्राम को कम ऊर्जा लगा कर हल कर देता है. लेकिन आने वाले समय इसकी सुपर कम्प्यूटर से जंग जारी रहना भी तय है. इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि धीरे धीरे क्वांटम कम्पूयर परंपरागत कम्प्यूटरों की जगह ले लेंगे. लेकिन उसके लिए दिल्ली अभी बहुत दूर है.

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