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Quantum computing अब सामान्य तापमान पर होगी मुमकिन, नए शोध ने जगाई उम्मीद

क्वांटम कम्प्यूटिंग में भी इलेक्ट्रान टेलीपोर्टेशन की यह तकनीक उपयोगी हो सकती है.

क्वांटम कम्प्यूटिंग में भी इलेक्ट्रान टेलीपोर्टेशन की यह तकनीक उपयोगी हो सकती है.

क्वांटम कम्प्यूटिंग (Quantum computing) बहुत कम तापमान पर ही काम कर सकती है, लेकिन नए शोध ने इसके सामान्य तापमान पर काम कर पाने की उम्मीद जगाई है.

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नई दिल्ली: कम्प्यूटर की दुनिया में क्वांटम कम्प्यूटिंग (Quantum computing) एक नया और अधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र है. लेकिन यह क्षेत्र बहुत चुनौतियों से भरा हुआ है. एक ताजा शोध ने उम्मीद जगाई है कि अब ऐसे क्वांटम कम्प्यूटिंग मशीन बन सकेंगी जो कमरे के सामान्य तापमान (Room Temperature) पर भी दक्षता से काम कर सकेंगीं.

इस शोध के मुताबिक क्वांटम लॉजिक गेट्स का उपयोग इस तरह की सक्षम मशीन बनाने में मदद करेगा. अमेरिकी सेना के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया है कि अब क्वांटम कम्प्यूटर का सामान्य तापमान पर काम करना मुमकिन हो सकेगा.

कम तापमान पर ही काम कर हो पाता है लेकिन
क्वांटम कम्प्यूटिंग के बारे बरसों से माना जा रहा है क्वांटम कम्प्यूटिंग को काम करने के लिए बहुत कम तापमान की जरूरत होती है. सालों से ऑप्टिकल नॉनलीनियर्टी वाले पारदर्शी क्रिस्टल को ही कम तापमान पर क्वांटम कम्प्यूटिंग के काम कर पाने की समस्या के समाधान के तौर पर देखा जा रहा था. इस समाधान को भी बहुत तरजीह नहीं मिली थी. अब सेना क शोधकर्ताओं नए लॉजिक सर्किट पर काम कर रहे हैं जिससे मशीन सामान्य तापमान पर काम कर सकेंगी.

जल्दी ही मिले उत्साहजनक नतीजे
अभी शोध शुरुआती स्तर पर है लेकिन उसके नतीजे बहुत ही उत्साह जनक हैं. इस अध्ययन में अमेरिकी सेना के कॉम्बैट कैपेबिलिटीज डिवेलपमेंट कमांड की रिसर्च लैब के डॉ कुर्ट जैकब, एमआईटी के डॉ मिक्केल हेयुक और प्रो डिर्क इंगलूंड ने पाया है कि एक दशक के अंदर ही क्वांटम कमप्यूटिंग पूरी तरह से काम करने लगेगी.

अक्षम हैं अभी के क्वांटम कंप्यूटिंग सिस्टम
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में दिखाया कि वे किस तरह से क्वांटम लॉजिक गेट्स का उपयोग करेंगे. वे फोटोनिक सर्किट और ऑप्टिकल क्रिटस्टल में इनका उपयोग कर क्वांटम कंप्यूटर बनाएंगे. शोधकर्तोओं ने वर्तमान क्वांटम सिस्टम को अक्षम बताया. उनके मुताबिक इसकी वजह यह तथ्य है कि इन सिस्टम के काम करने के लिए बहुत ज्यादा कूलिंग करने की जरूरत होती है.  ऐसे में ये सिस्टम बहुत भारी, बहुत ज्यादा ऊर्जा की खपत करने वाले हो जाते हैं जो ग्राहकों के लिए बहुत महंगे साबित होंगे. शोधकर्ताओं ने फोटोनिक सर्किट्स के उपयोग के कारण इन उपकरणों को बड़ा होने से रोकने में मदद मिलेगी. इसलिए कम तापमान की भी जरूरत नहीं होगी.

क्ववांटम कम्प्यूटिंग परंपरागत कम्प्यूटिंग से कई गुना शक्तिशाली है.


परंपरागत कम्प्यूटर की होती है यह सीमा
परंपरागत कम्प्यूटर बिट्स का उपयोग करते हैं जो ऑन या ऑफ (1 या 0) हो सकती है. वे सभी संक्रिया को इन्ही के रूप में प्रोसेस कर नतीजे देती हैं. इसका मतलब यह है कि वे एक बार में केवल एक ही समस्या का हल कर सकती हैं.

क्या खास होता है क्वांटम कम्प्यूटर में
वहीं क्वांटम कम्प्यूटर की इकाई क्वांटम बिट्स होती हैं जिन्हें क्यूबिट्स (Qubits) कहा जाता है. क्यूबिट्स एक हमेशा जिन अवस्थाओं में रहते हैं उन्हें स्ट्रेंज स्टेट कहा जाता है. वे एक एक साथ कई ऑन और ऑफ की स्थिति में भी रह सकते हैं. जिससे इनकी गणना की क्षमता बहुत ज्यादा हो जाती है. इसी कारण क्वांटम  कम्प्यूटर परंपरागत कम्प्यूटरों की तुलना में ज्यादा दक्ष होते हैं.

क्यूबिट्स की स्ट्रेंज स्टेट की समस्या
क्वांटम कम्प्यूटर की समस्या क्यूबिट्स की स्ट्रेंज स्टेट ही है क्योंकि इन्हें सही तरह से काम करने के लिए बहुत ही ज्यादा कम तापमान की जरूरत होती है. शोधकर्ता लॉजिक गेट्स और फोटोनिक सर्किट का उपयोग कर इसका समाधान करना चाहते हैं. इससे वे विद्युत सर्किट की जगह प्रकाशीय संकतों का उपयोग कर सकेंगे.

कैसे होगी सामान्य तापमान
शोधकर्ताओं का मानना है कि फोटोन के उपयोग से वे क्वांटम कम्प्यूटिंग में कम तापमान की जरूरत को खत्म कर सकेंगे. इसमें वे नॉनलीनियर ऑप्टिकल क्रिस्टल का उपयोग भी करेंगे. उन्हें काफी समय से पहले फोटोन और नॉनलीनियर ऑप्टिकल क्रिस्टल का उपयोग अभी तक केवल एक अवधारणा ही थी. लेकिन शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वे 10 साल में सामान्य तापमान पर क्वांटम कम्प्यूटिंग एक हकीकत होगी.

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