Covid-19 की तरह किसी महामारी को लंबा नहीं खिंचने देगी क्वांटम कम्प्यूटिंग

Covid-19 की तरह किसी महामारी को लंबा नहीं खिंचने देगी क्वांटम कम्प्यूटिंग
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कोविड-19 (Covid-19) की दवा और वैक्सीन पता लगाने में भले ही समय लग रहा हो, लेकिन भविष्य में क्वांटम कम्प्यूटिंग से कुछ ही दिनों में किसी नए वायरस की दवा और वैक्सीन तय हो जाया करेगी.

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Cororna Virus) तब दुनिया भर में फैलना शुरू भी नहीं हुआ था. वैज्ञानिकों ने इसके इलाज और वैकसीन के बारे में कहा था कि इसमें लंबा समय लग सकता है. कोविड-19 को लेकर शोधकर्ताओं की कही यह बात सच हो रही है. पांच महीने बाद भी इस महामारी के इलाज और वैक्सीन को लेकर तमाम प्रयास जारी हैं लेकिन निर्णायक कुछ भी नहीं. सैकड़ों क्लीनिकल ट्रायल (Clinical Trial) दूसरे या तीसरे चरण में चल रहे हैं. ऐसे में एक वैक्सीन या दवा ढूंढने की प्रक्रिया में जबर्दस्त सुधार की गुंजाइश क्वांटम कम्प्यूटिंग (Quantum Computing) ला सकता है.

समय क्यों लग रहा है या लगता है
आमतौर पर किसी बीमारी का पता चलने के बाद सबसे पहले उसके लक्षणों को स्पष्ट किया जाता है. इसके बाद संक्रमण फैलाने वाले रोगाणु (Pahtogen) की पहचान की जाती है. इसके बाद इस रोगाणु (इस मामले में विषाणु या वायरस) के पूरे गुणों का पता लगाया जाता है. जिसमें उसका पूरा का पूरा जेनेटिक कोड शामिल होता है. इसके बाद यह शोध शुरु किया जाता है कि यह वायरस काम कैसे करता है और आक्रमण कैसे करता है. इसके साथ ही इंसानी शरीर उस वायरस पर कैसे प्रतिक्रिया करता है. इसका भी पता लगाया जाता है.

इसके बाद यह प्रक्रिया



इसी शोध के साथ ही लक्षणों के आधार पर दवाओं का परीक्षण भी शुरू होता है और वैक्सीन की खोज भी. फिर लैब में परीक्षण, जानवरों पर ट्रायल, कुछ इंसानों पर ट्रायल, सामूहिक ट्रायल, व्यापक ट्रायल जैसी प्रक्रिया खत्म होने के बाद सभी चरणों में सफल होने पर ही दवा या वैक्सीन को बड़े पैमाने पर इजाजत दी जाती है और घोषणा कर दी जाती है कि वैक्सीन या इलाज मिल गया है. दवाओं के उत्पादन के बाद यह लोगों तक पहुंच पाती जो एक अलग समय लेने वाली प्रक्रिया है.



Compting
कवांटम कम्प्यूटिंग की गति से वायरस की वैक्सीन कुछ दिन में पता चल सकती है.


क्या यह कोविड-19 के मामले में भी सामान्य है
दुर्भाग्य से पूरी तरह से हां. लेकिन कुछ अच्छी बातें भी हैं. जितनी तेजी से इस वायरस के लक्षण और गुण पकड़े गई उतनी तेजी से दुनिया में अब तक किसी भी वायरस या रोगाणु के बारे में जानाकरी हासिल नहीं की जा सकी. केवल 12 दिन में ही हमें सार्स कोव 2 के स्पाइक प्रोटीन के बारे में पता चल गया था, जबकि इसी मामले में एचआईवी के लिए सालों लग गए थे.

तो क्या और जल्दी नहीं मिल सकती दवा या वैक्सीन
वायरस के अध्ययन से लेकर दवा के टेस्टिंग में करीब 15 साल का समय और ढाई बिलियन डॉलर से ज्यादा का समय लगता है. इनमें से भी 99 प्रतिशत प्रयास सफल नहीं होते. इस लंबी प्रक्रिया और खर्चे से बचा जा सकता है अगर दवा की खोज और टेस्टिंग का काम लैब में न होकर कम्प्यूटर से हो. हमारे पास पूरा डेटाबेस है. अगर हमारे पास शक्तिशाली कम्प्यूटर हों तो वे यह जल्दी ही पता लगा लेते कि क्या कोई दवा कोविड-19 का इलाज या वैक्सीन की तरह काम कर सकती है या नहीं.

क्या करेगी क्वांटम कम्प्यूटिंग
यह काम आम कम्प्यूटिंग यहां तक कि आज के सुपर कम्प्यूटर से भी नहीं हो सकता, लेकिन क्वांटम कम्प्यूटिंग में यह क्षमता है कि इतने विशाल आंकड़ों को प्रसंस्करण कर सके, गणना कर सके, इनके जटिल समीकरणों को हल कर सके. इन जटिल समीकरणों में से एक, उदाहरण के तौर पर, उस दवा के अणु को ढूंढना जो कोरोना वायरस के स्पाइक पर हमला कर सके, वाला समीकरण होगा. ऐसे समीकरणों से यह पता चल सकेगा कि किस दवा का असर वायरस को मारने में सबसे कारगर होगा वह भी मानवीय कोशिकाओं के अंदर. इससे हमें हर दवा के ट्रायल में भी लंबा समय नहीं खर्चना पड़ेगा.

cororna
अभी दवा की खोज और ट्रायल में बहुत लंबा समय लगता है.


क्वांटम कम्प्यूटिंग क्यों
इसकी वजह है क्वांटम कम्प्यूटिंग का परंपरागत कम्प्यूटिंग के बहुत ही अधिक तेज होना. सार्व कोव 2 क स्पाइक प्रोटीन में हजारों अणु होते हैं.  इन पर सिम्यूलेशन से गणना आज के सुपर कम्प्यूटर के भी बस की बात नहीं हैं. ऐसा करने में कई दशक तक लग सकते हैं, लेकिन एक बड़ा क्वांटम कम्प्यूटर ऐसी गणना करने में सक्षम होगा.

फिलहाल क्वांटम कम्प्यूटर बने नहीं हैं. लेकिन यह अवधारणा मूर्त रूप ले सकती है और तब दवा उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव आ सकेगा. और हम वह समय भी देख सकेंगे कि कोई नया वायरस आएगा और उसके दस दिन के अंदर ही उसकी दवा और वैक्सीन तय हो जाएगी.

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