Home /News /knowledge /

ISS में देखी वैज्ञानिकों ने पदार्थ की पांचवी अवस्था, पृथ्वी पर थी यह समस्या

ISS में देखी वैज्ञानिकों ने पदार्थ की पांचवी अवस्था, पृथ्वी पर थी यह समस्या

ISS  में वैज्ञानिकों ने पदार्थ की पांचवी अवस्था बनाने में सफलता पाई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ISS में वैज्ञानिकों ने पदार्थ की पांचवी अवस्था बनाने में सफलता पाई. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों को पृथ्वी पर पदार्थ की पांचवी अवस्था (fifth state of matter) बनाने में बहुत परेशानी होती थी, लेकिन अंतरिक्ष में वे इसे ज्यादा समय के लिए बनाने में सफल रहे.

नई दिल्ली:  वैज्ञानिक कई तरह के अध्ययन सिर्फ इसलिए नहीं कर पाते हैं क्यों की पृथ्वी की हालात उनके प्रयोगों के अनुकूल नहीं होते. ऐसे प्रयोगों के लिए अंतरिक्ष एक आदर्श जगह होती है. हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) में वैज्ञानिकों ने एक अनूठा प्रयोग किया और उन्हें पहली बार अंतरिक्ष में पदार्थ की पांचवी अवस्था (Fifth state of matter) देखने में सफलता मिली है. इससे उन्हें ब्रह्माण्ड के कई अनसुलझे रहस्यों के बारे में जानने में मदद मिलेगी.

कब बनती है पदार्थ की यह खास अवस्था
पदार्थ की यह खास अवस्था तब बनती है जब कुछ तत्वों के परमाणुओं को परम शून्य के तापमान तक ठंडा किया जाता है. परमशून्य तापमान 0 केल्विन या  -273.15 डिग्री सेल्सियस होता है. इसकी उपस्थिति का अनुमान सबसे पहले महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और भारतीय गणितज्ञ सत्येंद्रनाथ बोस ने लगाया था. इसी लिए इसे बोस आइंस्टीन कंडेनसेट (BEC) कहा जाता है. परमशून्य तापमान पर  परमाणु मिल कर एक ही इकाई की तरह का काम करने लगते हैं. उनकी क्वांटम स्तर यानी परमाणु और उससे भी छोटे स्तर पर गुण समान हो जाते हैं. क्वांटम स्तर पर हर कण पदार्थ की एक तरंग की तरह भी बर्ताव करने लगता है.

क्या अहमियत है इस BEC की
पदार्थ की यह पांचवी अवस्था यानि BEC वह दुनिया जहां गुरुत्व जैसे बल काम करते हैं और वह महीन दुनिया जहां क्वांटम मैकेनिक्स के नियम काम करते हैं, बीच एक रेखा के तौर पर काम करती है. वैज्ञानिकों को लगता है कि इस अवस्था में कई रहस्यमय परिघटनाओं के संकेत छिपे हैं जिनमें डार्क एनर्जी भी शामिल है जिसके बारे में कहा जाता है कि वही हमारे ब्रह्माण्ड के बहुत तेजी से फैलने की जिम्मेदार है.

Matter
यह अवस्था परमाणु और उससे छोटे कणों के स्तर पर बनती है.


पृथ्वी पर प्रयोग करने पर होती है यह परेशानी
यह अवस्था या BEC काफी नाजुक होती है. बाहर से जरा सा दखल उसके तापमान को बढ़ा देता है और वह अवस्था खत्म हो जाती है. इससे वैज्ञानिकों के लिए इस अवस्था का धरती पर अध्ययन करना असंभव हो जाता है. पृथ्वी पर गुरुत्व और मैग्नेटिक फील्ड का व्यवधान इस तरह की अवस्था के अवलोकन में बाधा डालता है. लेकिन अंतरिक्ष में इस तरह की कोई बाधा नहीं आती है. गुरुवार को नासा के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस अवस्था के प्रयोग पर पहले नतीजे जारी किए. ये प्रयोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर किए गए थे जहां कणों पर पृथ्वी की बंदिशें नहीं थीं.

यह फायदा हुआ अंतरिक्ष में प्रयोग करने से
पसदीना के कैलीफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी  के रॉबर्ट थॉम्पसन ने बताया कि माइक्रोग्रैविटी की कराण ISS के वैज्ञानिक परमाणुओं को एक साथ लाने में कामयाब हुए क्योंकि वहां गुरुत्व बल काम नहीं कर रहा था. नेचर जर्नल में प्रकाशित इस शोध के दस्तावेजों में धरती और ISS में बनाए गए BCE के गुणों में चौंकाने वाले अंतरों का वर्णन है. जहां पृथ्वी के लैब वातावरण में यह अवस्था कुछ ही मिलीसेकेंड्स में ही खत्म हो जाती है, ISS में यह एक सेंकेंड से ज्यादा देर तक बनी रही. इससे शोधकर्ताओं को इसके गुणों का अध्ययन करने का मौका मिल गया. गुरुत्व बल की गैरमौजूदगी से मैग्नेटिक फील्ड का असर परमाणुओं पर ज्यादा होने लगा. इससे परमाणु तेजी से ठंडे हुए और उन्हें साफ तस्वीरें लेने का मौका मिल गया.

एक बड़ी उपलब्धि है यह
वैज्ञानिकों को मानना है कि ISS जैसी जगह पर पदार्थ की पांचवी अवस्था का निर्माण करना छोटी उपलब्धि नहीं है. इसके लिए पहले बोसोन यानि वे कण जिनमें समान संख्या में प्रोटोन और इलेक्ट्रॉन हों, को परम शून्य तापमान तक ठंडा किया जाता है. इसके लिए उन कणों को सही स्थान पर रखने के लिए लेसर का उपयोग किया जाता है. परमाणु जितनी धीरे हिलते हैं, उतने ही ज्यादा ठंडे होते हैं.

 क्यों ज्यादा देर तक नहीं रह पाती यह अवस्था
जैसे उनकी ऊष्मा  कम होने लगती है एक मैग्नेटिक फील्ड बनाया जाता है जिससे कण हिल न सकें और उनकी तरंग बढ़ न सके. इस तरह से बहुत से बोसोन कणों को एक साथ लाने से उनकी तरंगे एक दूसरे से मिल सी जाती हैं और वे सब इतने छोटे स्तर पर भी, एक ही पदार्थ की तरह बर्ताव करने लगते हैं. इस गुण को क्वांटम डिजनरेसी कहा जाता है. लेकिन मैग्नेटिक फील्ड हटाने से ही यह अवस्था कमजोर होने लगती है क्योंकि इससे कणों को एक दूसरे से दूर जाने का अवसर मिल जाता है.

space
इस प्रयोग के सफल होने से ब्रह्माण्ड के कई रहस्य खुल सकेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


यह अध्ययन दूसरे शोधकर्ताओं के लिए कई संभावनाएं खोलने वाला साबित होगा. इसमें सामान्य सापेक्षता से लेकर डार्क एनर्जी और गुरुत्व तरंगों तक के अध्ययन में मदद मिलेगी.

यह भी पढ़ें:

जानिए कौन सा बड़ा खतरा मंडरा रहा है पाकिस्तान पर, मचेगी बड़ी तबाही

जितना सोचा था, उससे तेजी से दूर जा रहा है शनि का चंद्रमा, क्या बदलेगा इससे

पूरे ब्रह्माण्ड का 3D नक्शा बनाएगा DESI, सुलझ सकेंगे इससे कई रहस्य

Tags: Research, Science, Space

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर