होम /न्यूज /नॉलेज /क्या केवल इतिहास बनकर रह जाएगी अब हैकिंग, इस नए शोध ने जगाई उम्मीद

क्या केवल इतिहास बनकर रह जाएगी अब हैकिंग, इस नए शोध ने जगाई उम्मीद

इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी तकनीकी बाधा (Technical hurdle) बैंडविथ (Bandwidth) मानी जाती है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी तकनीकी बाधा (Technical hurdle) बैंडविथ (Bandwidth) मानी जाती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्वांटम इंटरनेट (Quantum Internet) में हैकिंग (hacking) कर पाना नामुमकिन हो सकता है, लेकिन इसके बड़े और व्यापक स्तर पर ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated :

    इंटरनेट (Internet) पर सुरक्षा (Security) एक अहम मुद्दा है. फिलहाल इंटरनेट पर धोखाधड़ी (Fraud) जैसे मामले सामने आते रहने से यही साबित होता है कि इंटरनेट पर हमारी सुरक्षा बहुत मजबूत नहीं है. हम केवल कुछ सावधानियों से ही इंटरनेट हैकर्स (Hackers) के लिए काम मुश्किल बना सकते हैं लेकिन नामुमकिन नहीं. लेकिन ताजा शोध ने यह बताया कि कैसे क्वांटम इंटरनेट (Quantum Internet) को एक बड़े स्तर पर वर्तमान ढांचे (Existing structure) में बदलाव किए बिना ही लागू किया जा सकता है जिससे हैकिंग केवल एक इतिहास  (history) बन कर रह जाएगी.

    क्या है क्वांटम इंटरनेट
    लेकिन इंटरनेट सुरक्षा को लेकर तमाम चुनौतियों के बीच क्वांटम इंटरनेट (Quantum Internet)  कुछ अलग समाधान है. यह है वैश्विक संजाल या ग्लोबल इंटरनेट के इस संस्करण में डेटा सुरक्षित होगा, कनेक्शन्स निजी हो जाएगें और आपकी  जानकारी को बीच में ही चुराए जाने की चिंताएं इतिहास की बात हो जाएंगी. यह नया शोध साइंस एडवांसेस में प्रकाशित हुआ है.

    क्वांटम इंटरनेट हो सकता है मुमकिन
    अध्ययन संबधी लेख में शोधकर्ताओं ने क्वांटम कम्यूनिकेशन नेटवर्क को लागू करने के तरीके के बारे में बात की है जिसकी सुरक्षा बहुत उच्च स्तर की मानी जाती है. कन्वर्सेशन में इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता सिद्धार्थ कोदुरू जोशी ने अपने लेख में अपने शोध के बारे में बताते हुए कहा है की उनकी यह खोज क्वांटम इंटरनेट को बड़े स्तर पर संभव बना सकती है और वह भी वर्तमान टेलिकम्यूनकेशन की संरचना का ही उपयोग करके.

    अभी कैसे होती है डेटा की सुरक्षा
    फिलहाल इंटरनेट पर ऑनलाइन डेटा को सुरक्षित रखने का तरीका है एनक्रिप्शन (encryption). इसमें आंकड़ों को एक फार्मूला लागू कर दूसरे आंकड़े में बदल दिया जाता है जिसे वापस एक निश्चित कोड से ही हासिल किया जा सकता है जिसे एनक्रिप्शन की (encryption key) या डिजिटल की( Digital Key) भी  कहते हैं. इस चाबी के बिना मूल आंकड़े को हासिल करना बहुत मुश्किल होता है लेकिन यह नामुमकिन नहीं होता.

    Internet, computing, Quantum Internet
    अब तक उपयोग में लाई जा रहे सभी एनक्रिप्शन (Encryption) तोड़े जा सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    सभी एनक्रिप्शन तोड़े जा सकते हैं
    यह एनक्रिप्शन या फार्मूला वास्तव में एक तरह की गणितीय समस्या होती है. एक शक्तिशाली कम्प्यूटर और समय मिल जाए तो इसे हल कर मूल आंकड़े हासिल किए जा सकते हैं. और सच्चाई यह है कि आज के जितने भी तरह के एनक्रिप्शन उपयोग में लाए जा रहे हैं सभी तोड़े जा सकते हैं.

    जानें कैसी है जापानी Flying Car, इसमें कितने लोग बैठ कर कितना कर सकते हैं सफर

    इस तकनीक में कैसे सुरक्षित रहता है डेटा
    वहीं क्वांटम कम्यूनिकेशन दूसरी ओर जो की (Keys) बनाता है वह प्रकाश के कणों यानि फोटोन का उपयोग कर बनाई जाती है, जिनकी कॉपी बनाना क्वांटम फिजिक्स के सिद्धांतों के अनुसार, नामुमकिन है. कॉपी करने का कोई भी प्रयास ऐसी त्रुटियां पैदा करेगा जो आसानी से पकड़ी जा सकती है. इसका मतलब है कि हैकर कितना ही चतुर क्यों न हो या फिर उसके पास सुपरकम्प्यूटर जितना शक्तिशाली कम्प्यूटर ही क्यों न हो. वह क्वांटम चाबी (Key) की नकल नहीं बना सकता और नहीं कूट किए गए संदेश को पढ़ सकता है.

    इसका उपयोग भी हो रहा है लेकिन
    इस अवधारणा का उपयोग पहले ही सैटेलाइट और फाइबर ऑप्टिक्स केबल पर हो चुका है और इसका उपयोग दो अलग-अलग देशों के बीच सुरक्षित संदेशों को भेजने के लिए भी हो चुका है.  लेकिन यह आम नेटवर्क या इंटरनेट के लिए प्रयोग में नहीं लाया जाता क्योंकि इसे बड़े स्तर या बड़े नेटवर्क पर लागू करना बहुत खर्चीला होता है.

    Computing, Hacking,
    इस तकनीक से कम्प्यूटिंग (Computing)की दुनिया में हैकिंग (Hacking) एक तरह से खत्म हो जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    यह थी समस्या
    इससे पहले क्वांटम संचार तकनीक के साथ समस्या ये थी कि वे केवल दो ही उपकरण से सीधे संचार कर सकती थी. यानि 8 कम्प्यूटर के संचार के लिए कुछ 56 कनेक्शन चाहिए होंगे. इस शोध में इसी समस्या का समाधान खोजा गया है. शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे सभी उपकरण एक ही केंद्रीकृत उपकरण के जरिए संचार कर सकें.

    ऐसे काम करते हैं फोटोन
    इस तकनीक में केंद्रीय उपकरण उन यूजर को फोटोन का गुंथा हुआ या एंटैंगल्ड (Entangled Photons) जोड़ा भेजेगा जिसमें एक कण एक यूजर के लिए होगा. दोनों यूजर के उपकरण कुछ गणना कनरे के बाद एक गुप्त क्वांटम कूट आपस में साझा करते हैं और इसी से वे कूट किए हुए संदेश एक दूसरे को भेज सकते हैं.

    भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने नासा के लिए बनाई खास और बेहतर तरह की बैटरियां

    मल्टीप्लेक्सिंग तकनीक से ऐसे बहुत सारे यूजर्स के साथ किया जा सकता है.  ऐसे में वैसा ही संचार होता है जैसे बहुत से लोग एक साथ वीडियो कॉल कर रहे हों जो अन्य कॉलों से सुरक्षित और निजी हों. शोधकर्ताओं ने इसे अभी छोटे स्तर पर किया है, लेकिन वे इसे बड़े पैमाने पर ले जाने के लिए आश्वरस्त हैं. उन्हें विश्वास है कि अगले दस सालों में वे क्वांटम इंटरनेट की शुरुआत देख पाएंगे.

    Tags: Research, Science

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें