अब आसान होगा क्वेसार पड़ताल करना, नई तकनीक से हुआ संभव

क्वेसार (Quasar) वे रहस्यमयी पिंड हैं जो हमेशा दिखाई नहीं देते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

क्वेसार (Quasar) वे रहस्यमयी पिंड हैं जो हमेशा दिखाई नहीं देते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

क्वेसार (Quasars) जैसे रहस्यमयी खगोलीय पिंडों (Heavenly Bodies) के बारे में अभी तक हर स्थिति में जानकारी हासिल करना मुमकिन नहीं था. खगोलविदों (Astronomers) ने अब इसे संभव बना लिया है.

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ब्रह्माण्ड (Universe) में बहुत से पिंड ऐसे हैं जो ऐसा बर्ताव करते हैं जिनके बारे में वैज्ञानिक अभी तक हैरान हैं. इन्ही में से एक तरह के पिंड क्वेसार (Quasar) हैं. अभी तक इनका बर्ताव हमारे खगोलविदों और वैज्ञानिकों पूरी तरह से समझ में नहीं आया है. और ये हमेशा दिखाई भी नहीं देते हैं. लेकिन वैज्ञानिकों ने इन विशालकाय पिंडों (Extragalactic obects) के बारे में जानकारी हासिल करने का नया तरीका निकाला है जिससे ब्रह्माण्ड के बड़े रहस्य से पर्दा उठाने में मदद मिलेगी.

बहुत कम दिखाई देते हैं क्वेसार

यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के खगोलभैतिकविदों ने बहुत ही कम पाए जाने वाले इन क्वेसार के बारे में पता लगाने की नई पद्धति विकसित की है. उन्हें उम्मीद है कि है इस तकनीक से बदलने वाले क्वेसार खोजने में आसानी होगी जो हमेशा ही दिखाई देने की स्थिति में नहीं होते हैं. इससे वैज्ञानिकों को यह जानने में भी मदद मिल सकती है कि सुपरमासिव ब्लैकहोल कैसे बढ़ते हैं.

सुपरमासिव ब्लैक होल से संबंध
क्वेसार के बारे में माना जाता है कि वे गैलेक्सी के बीच में स्थिति सुपरमासिव ब्लैक होल के वृद्धि को नियंत्रित करते हैं. एक क्वेसार बहुत ही चमकदार इलाका होता है जो एक गैलेक्सी के केंद्र में होता है जिसे सुपरमासिव ब्लैक होल से शक्ति मिलती है. ये ब्लैकहोल ब्रह्माण्ड के विशालकाय ब्लैक होल होते हैं जिनका भार हमारे सूर्य से करोड़ों खरबों ज्यादा होता है. हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के केंद्र में भी एक सुपरमासिव ब्लैक होल है.

हमेशा नहीं दिखते ये

बदलते हुए दिखने वाले क्वेसार तेजी से अपने चमक बदलते हैं. कभी वे बहुत तेजी से चमकते हैं तो कभी वे इतने कम चमकते हैं कि वैज्ञानिक समझ ही नहीं पाते हैं कि वे अपनी जगह हैं भी या नहीं. जब चमक कम हो जाती है तो क्वासरे गैलेक्सी के पीछे छिपा लगता है. ऐसे में इन क्वेसार को हमेशा नहीं देखा जा सकता है.



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क्वेसार (Quasar) की चमक खोने से उनका हमेशा अध्ययन संभव नहीं हो पा रहा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

इन बातों का भी पता चलेगा

क्वेसार को देखने की नई पद्धति से अब शोधकर्ता चमक में चरम बदलाव होने के बाद भी उसका पता लगा सकेंगे. इससे वे सुपरमासिव ब्लैकहोल के बारे में भी गहराई से पड़ताल कर सकेंगे. अब वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर सकेंगे कि क्वेसार की चमक में इतना तेजी से इतना ज्यादा बदलाव कैसे आ जाता है. इससे उन घटनाओं की कड़ियों के बारे में पता चल सकेगा जिससे गैलेक्सी की वृद्धि होती हैं.

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गैलेक्सी के विकास के बारे में

वैज्ञानिकों का मानना है कि सुपरमासिव ब्लैकहोल से निकलने वाली ऊर्जा गैलेक्सी के भविष्य को प्रभावित करती है. इस शोध में शामिल डॉ कैरोलीन विलफोर्थ कहती हैं कि ये क्वेसार और सुपरमासिव ब्लैक होल की गैलेक्सी के विकास में बहुत अहम भूमिका होती है. जितना ज्यादा हम इनके बारे में जानेंगे उतना ही हमें इनके गैलेक्सी के विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को बारे में पता चलगे.

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क्वेसार (Quasar) की बारे में जानकारी सुपरमासिव ब्लैकहोल और गैलेक्सी की वृद्धि के बारे में बताएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कैसे बनता है क्वेसार

क्वेसार के बारे में माना जाता है कि वे ब्रह्माण्ड में प्रकाश के सबसे ज्यादा चमकदार स्रोत होते हैं. बहुत सी गैलेक्सी में ये क्वेसार होते हैं यह भी माना जाता है कि हमारी गैलेक्सी में भी एक क्वेसार है. उनका निर्माण तब होता है जब गैसीय पदार्थ गुरुत्वाकर्षण बल के कराण सुपरमासिव ब्लैकहोल की ओर खिंचने लगता है. इससे एक्रीशन डिस्क बनती है और ऊर्जा डिस्क में से बहुत ही चमकीली विद्युतचुंबकीय तरंगों के रूप में उत्सर्जित होने लगती है.

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लेकिन क्वेसार की चमक स्थायी नहीं होती. इससे पहले क्वेसार को चमकीली अवस्था में ही देखा जा सकता था जिसके लिए फोटोमैट्रिक वेरिएबिलिटी तकनीक का उपयोग होता था. लेकिन  बाथ शोधकर्ताओं ने स्पेक्ट्रोस्कोपिक आंकड़ों का उपयोग कर बहुत ही कम वेवलेंथ की तरंगों में बदलाव को पकड़ने की क्षमता का प्रयोग किया जिससे वे बहुत ही कम चमक की अवस्था में भी क्वेसार की स्थिति  जान सकेंगे. जो एक ही साल में बदल जाती है.

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