सवाल-जवाबः कौन से हैं वो 05 तरीके जिनसे कई एशियाई देशों ने रोका कोरोना

चीन का पड़ोसी देश ताइवान जनवरी में ही कोरोना की रोकथाम के लिए सक्रिय हो गया था

दुनियाभर में जो भी देश कोरोना वायरस को रोकने में सफल रहे हैं. उन्होंने काफी कारगर ढंग से पांच काम किए हैं, वो पांच तरीके क्या हैं, ये हमें भी जानना चाहिए. इसमें कुछ तरीके तो व्यक्तिगत तौर पर हम घरों में भी कर सकते हैं

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    दुनियाभर में जहां भी कोरोना वायरस को असरदार तरीके से काबू किया जा रहा है, उसके पीछे केवल पांच तरीके हैं, जो बता रहे हैं कि इन्हें अपनाओगे तो कोरोना पर खुद ब खुद रोक लगेगी. इन तरीकों को पूरी दुनिया अपना रही है और हमें भी अपनाना चाहिए.

    किन देशों ने कोरोना के संक्रमण को इन तरीकों से रोका है
    ये देश सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ताइवान, जापान, हांगकांग हैं. ये सभी चीन के पड़ोसी देश हैं. यहां असरदार तरीकों से कोरोना पर रोक लगाने में सफलता मिली है. जापान में कोरोना विस्फोट की आशंका थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

    चीन के पड़ोस में 2.36 करोड़ की आबादी वाले ताइवान में 24 मार्च तक कोरोना वायरस संक्रमण के 215 मामले सामने आए थे जबकि केवल दो मौतों की पुष्टि हुई. उसी तरह 75 लाख की आबादी वाले हांग कांग में 386 मामले सामने आए. दो महीनों के दौरान चार लोगों की मौत हुई. 12 करोड़ की आबादी वाले जापान में 24 मार्च तक 1140 मामले सामने आए. दक्षिण कोरिया में 9037 मामले सामने आए हैं. इन दोनों देशों में हाल के दिनों में संक्रमण और मौत दोनों मामलों में कमी देखने को मिली.

    क्या है इन देशों में इस्तेमाल हुआ पहला तरीका?
    - बड़े पैमाने पर टेस्टिंग. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस महामारी को रोकने के लिए लगातार टेस्टिंग पर जोर दिया है. हालांकि दक्षिण कोरिया को छोड़कर इनमें अन्य देशों ने टेस्टिंग की लेकिन ग्रुप्स की पहचान करके उनमें टेस्टिंग की. दक्षिण कोरिया ने रोज 10,000 लोगों का परीक्षण किया. जो कोई और देश कर ही नहीं पाया. हांगकांग और जापान ने चैन में आए लोगों की त्वरित गति से जांच की. जो पॉजिटिव मिले, उनका इलाज किया गया.

    world can learn from south korea how to tackle with coronavirus spread
    साउथ कोरिया में रोज तकरीबन 10000 लोगों का टेस्ट किया गया


    दूसरा तरीका क्या है?
    संक्रमित मरीज को एकांत में रखना. मरीजों की पहचान के बाद उन्हें एकांत में रखने के मामले में दक्षिण कोरिया और चीन ने बहुत बढ़िया काम किया. इससे महामारी की चेन भी टूटती है और संक्रमण का फैलाव रुकता है. ये तरीका हर जगह इस्तेमाल किया जा सकता है. वैसे सबसे बेहतर तरीका यही है कि हर व्यक्ति खुद को घर में भी एकांत में रखे. इसे क्वारेंटाइन भी कहा जाता है. ताइवान, सिंगापुर और हांगकांग ने संदिग्ध मरीजों को उनके घरों में भी एकांतवास में ही रखा. नियम को तोड़ने वालों पर मोटा जुर्माना लगाया.

    दरअसल सर्दी-जुकाम, खांसी, फ्लू आदि अन्य मामूली बीमारियों के शुरुआती लक्षण भी वैसे ही होते हैं, जिस तरह कोरोना के. लिहाजा शुरुआती लक्षण के बाद खुद को ही एकांत में रखने और साथ डॉक्टर की हिदायत लेने में कोई बुराई नहीं है.

    ताइवान ने जनवरी से ही अपने एयरपोर्ट्स पर वुहान से आने वाले लोगों की थर्मल स्कैनिंग शुरू कर दी थी. ऐसा ही काम जापान, सिंगापुर ने भी किया था


    तीसरे तरीके में त्वरित कार्रवाई पर क्यों जोर है?
    - किसी भी वायरस पर अंकुश लगाने का सबसे असरदार तरीका संक्रमण फैलने से पहले ही त्वरित रफ्तार से अंकुश लगाने के लिए कारगर क़दम उठाना होता है. इस मामले में ताइवान और सिंगापुर जैसे देशों ने तुरंत कार्रवाई की. लोगों को अलग थलग किया. जापान में भी ऐसा ही हुआ. ये काफी सफल रहा.

    सबसे बड़ी बात ये भी है कि ये वो देश हैं, जिन्होंने जनवरी के आखिर तक ही कार्रवाई के लिए कमर कसकर काम शुरू कर दिया था, जबकि बाकी देश मसलन अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली तब तक देख ही रहे थे. ताइवान वर्ष 2003 से इस तरह का सेंटर बनाकर इस पर असरदार तरीके से काम करता रहा है. पूरे यूरोप के देश भी इस मामले में लापरवाह साबित हुए.

    किस तरह जनवरी में सक्रिय हो गए थे ये देश?
    ताइवान ने जनवरी से ही वुहान से आने वाले सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी. यही काम जापान, हांगकांग और सिंगापुर ने किया. इन सभी देशों ने अपने बंदरगाहों को भी ज्वर मापने वाले यंत्र से लैस किया. इन सभी देशों में विदेश से आने वाले हर यात्री को क्वारेंटाइन में रखा गया.

    स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल डिस्‍टेंसिंग से कोरोना वायरस के फैलने की रफ्तार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.


    चौथा तरीका क्या है?
    -चौथा तरीका है सोशल डिस्टेंसिंग. अगर संक्रमण देश में प्रवेश कर गया तब रोकथाम का सबसे कारगर तरीका सोशल डिस्टेंसिंग ही है. हांगकांग और ताइवान ने बखूबी इसको अपनाया. पूरी दुनिया को अब इसे अपनाने की सलाह दी जा रही है. हांगकांग ने जनवरी से ही वर्क फ्रॉम होम शुरू कर दिया. स्कूल बंद कर दिए. बड़े इवेंट्स और सामाजिक आयोजनों पर रोक लगा दी. सिंगापुर ने स्कूल तो नहीं बंद किए लेकिन रोजाना सबकी जांच की. जापान ने भी वही किया जो हांगकांग ने किया था.

    अभी तक कोरोना से बचने के लिए कोई दवाई और वैक्सीन नहीं खोजी जा सकी है लेकिन साबुन सबसे बेहतर उपाय है. साबुन में एमीफिफिल्स जैसे अव्यव मौजूद होते हैं. जो वायरस को खत्म करने का काम करते हैं. साबुन से हाथ धोने से लिपिड लेयर खत्म होती है और वायरस से संक्रमण का खतरा भी कम होता है.
    एशिया के कई देशों में वर्ष 2003 में सार्स संक्रमण के बाद हाथों को धोना एक आदत में शुमार हो चुका है. इसका उन्हें बहुत फायदा मिल रहा है.


    पांचवां तरीका सफाई के महत्व को किस तरह जाहिर करता है?
    - ये बात हमेशा से कही जाती रही है कि सफाई से बड़ी कोई चीज ही नहीं. इससे हम ना जाने कितनी बीमारियों से खुद का बचाव करते हैं. कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने की दिशा में नियमित तौर पर हाथ धोना और स्वच्छता से रहना बेहद ज़रूरी कदम है. जापान, सिंगापुर, हांगकांग, ताइवान जैसे देशों में वर्ष 2003 में आए सार्स के संकट ने हाथ धोने की आदत गहरे तक डाली. यूं भी जापान के कल्चर में सफाई पर बहुत जोर रहता है.

    क्या होते हैं एंटी बैक्ट्रियल जेल
    दरअसल सिंगापुर, हांगकांग और और ताइवान की गलियों तक में एंटी बैक्ट्रियल जेल हैं. जहां जाकर लोग खुद को सेनिटाइज कर लेते हैं. इन सभी देशों में मास्क पहनने का चलन है. जो संक्रमण से बचाव में काम करता है.

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