सवाल-जवाब : कितना खतरनाक कोरोना का कम्युनिटी ट्रांसमिशन, क्या मंडराने लगा है ये खतरा

सवाल-जवाब : कितना खतरनाक कोरोना का कम्युनिटी ट्रांसमिशन, क्या मंडराने लगा है ये खतरा
अब डॉक्टर और एक्सपर्ट ये कहने लगे हैं कि भारत पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा मंडराने लगा है

देश में अब जिस तरह से कोरोना (Corona Virus) के मामले रोजाना 40,000 के नंबर के ऊपर पहुंच रहे हैं, उसके बाद आशंका जाहिर की जा रही है कि हम कम्युनिटी ट्रांसमिशन (Community Transmission) की स्टेज में जा सकते हैं. वैसे ये किसी भी महामारी (Pandemic) के फैलने की चौथी स्टेज कही जाती है. जानते हैं इसको सवाल-जवाब के जरिए

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भारत में 20 जुलाई को जो आंकड़े आए, उसमें कहा गया है कि अब देश में रोजाना कोरोना से संक्रमित होने वालों की संख्या 40,000 से ऊपर चली गई है. आईएमसीआर ने आशंका जताई है कि देश में अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ गया है. आइए जानते हैं कि क्या है कम्युनिटी ट्रांसमिशन. कैसे भारत में इसका खतरा अब मंडराने लगा है.

इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने देश में अभी तक कम्युनिटी ट्रांसमिशन की आशंका जाहिर नहीं की थी लेकिन अब उसका कहना है कि ऐसा होने की आशंका बढ़ गई है.

कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी ज्ञात संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना या वायरस से संक्रमित जगह की यात्रा किए बगैर ही इसका शिकार हो जाता है.यह संक्रमण का तीसरा स्तर होता है. इसके बाद बड़े पैमाने पर संक्रमण के फैलने की आशंका रहती है.



सवाल - पहला चरण क्या होता है?
- आईसीएमआर के अनुसार कोरोना वायरस फैलने के चार चरण हैं. पहले चरण में वे लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए जो दूसरे देश से संक्रमित होकर भारत में आए. यह स्टेज भारत पार कर चुका है क्योंकि ऐसे लोगों से भारत में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैल चुका है. यानी शुरू में तो देश में जो लोग बाहर से आए, वो कोरोना पीड़ित थे लेकिन उससे स्थानीय लोगों में संक्रमण शुरू हो गया.

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सवाल - दूसरे चरण में क्या होता है?
- दूसरे चरण में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलता है, ये वे लोग होते हैं जो किसी ना किसी ऐसे संक्रमित शख़्स के संपर्क में आए जो विदेश यात्रा करके लौटे थे. उनसे उन्हें संक्रमण हुआ. वो उनके संपर्क में आए. जिससे संक्रमित हो गए.

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तीसरा चरण कम्युनिटी ट्रांसमिशन का होता है. इसमें ट्रांसमिशन के स्रोत का पता चलना मुश्किल होता है.


सवाल - क्या तीसरा चरण से बढ़ जाता है खतरा?
- तीसरा चरण कम्युनिटी ट्रांसमिशन का होता है. इसमें ट्रांसमिशन के स्रोत का पता चलना मुश्किल होता है. ये कभी भी और कहीं भी हो सकता है. ये तब होता है जबकि एक बड़ी आबादी इसकी चपेट में आ जाती है. चूंकि ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके होते हैं तो इसे नियंत्रित कर पाना मुश्किल हो जाता है.

सवाल - क्या वास्तव में सबसे खतरनाक है चौथा चरण?
- किसी महामारी का चौथा चरण भी होता है, उसी तरह कोरोना का भी चौथा चरण है. जब संक्रमण स्थानीय स्तर पर महामारी का रूप ले लेता है. संक्रमण के मामलों में हैरतअंगेज उछाल आता है. साथ ही मरने वालों की संख्या भी एक साथ बढ़ने लगती है. इस स्टेज में बीमारी उस क्षेत्र या उस देश में पूरी तरह फैली हुई मानी जाती है.

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सवाल - क्या चौथे चरण के बाद महामारी का थमने लगती है
- इसको हर्ड इम्युनिटी भी कहा जाता है. अगर कोई बीमारी आबादी के बड़े हिस्से में फैल जाती है तो ये संभव है कि उसको लेकर लोगों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगे, जिससे संक्रमण रोकने में मदद मिले. ऐसे में लोग खुद ब खुद बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. यानी कहा जा सकता है कि वो उस बीमारी से 'इम्यून' हो जाते हैं. जाहिर है उनमें प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं. उनमें वायरस का मुक़ाबला करने को लेकर सक्षम एंटी-बॉडीज़ तैयार होने लगती है.

कोरोना वायरस के संक्रमण की बड़ी वजह रहे जमाती. (सांकेतिक फोटो)
कोई बीमारी आबादी के बड़े हिस्से में फैल जाती है तो ये संभव है कि उसको लेकर लोगों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने लगे, जिससे संक्रमण रोकने में मदद मिले.


सवाल - इसका मतलब ये है कि क्या एक सीमा के बाद किसी बीमारी का फैलाव रुक सकता है?
- अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन के चीफ़ मेडिकल अफ़सर डॉक्टर एडुआर्डो सांचेज़ ने ब्लॉग में लिखा है, "इंसानों के किसी झुंड (अंग्रेज़ी में हर्ड) के ज़्यादातर लोग अगर वायरस से इम्यून हो जाएं तो फिर वायरस का फैलाव मुश्किल हो जाता है. एक सीमा के बाद इसका फैलाव रुक जाता है. हालांकि इसमें समय लगता है. लेकिन इसमें भी अति संवेदनशील लोगों को चिन्हित करके उनकी सुरक्षा तय कर ली जाती है.''

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सवाल - हर्ड कम्युनिटी कब विकसित होती है?
- किसी समुदाय में कोविड-19 के ख़िलाफ़ 'हर्ड इम्यूनिटी' तभी विकसित हो सकती है, जब तक़रीबन 60 फ़ीसद आबादी को कोरोना वायरस संक्रमित कर चुका हो और वे उससे लड़कर इम्यून हो गए हों. हालांकि इसको लेकर अलग अलग राय है. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक हर्ड इम्यूनिटी के स्तर तक पहुंचने के लिए क़रीब 80 फ़ीसदी आबादी के इम्यून होने की ज़रूरत होती है.

सवाल - कौन सी ऐसी बीमारियां हैं, जिसमें मानव ने हर्ड कम्युनिटी के जरिए जीत हासिल की?
- ख़सरा, गलगंड, पोलियो और चिकन पॉक्स कुछ ऐसी संक्रामक बीमारियां थीं, जो पहले बहुत फैलती थीं. इनसे बहुत लोग मरते थे लेकिन फिर लोग इनसे इम्यून हो गए.
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