सवाल-जवाब : क्यों नेपाल में चीनी महिला राजदूत की वजह से फैलने लगी है नाराजगी

सवाल-जवाब : क्यों नेपाल में चीनी महिला राजदूत की वजह से फैलने लगी है नाराजगी
नेपाल में चाइनीज राजदूत होऊ योंगी, जो ट्विटर पर अपनी तमाम पिक्चर्स के लिए छाई रहती हैं

नेपाल (Nepal) के मीडिया में अब चाइनीज राजदूत होऊ यांगी ( Chinese ambassador in Nepal Hou-Yanqi) की जरूरत से ज्यादा सक्रियता पर सवाल खड़े होने लगे हैं. उन पर नेपाल की अंदरूनी राजनीति में दखल देने और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को मैनेज करने का आरोप लगने लगा है. नेपाल में लोग अब नेपाली महिला राजदूत के कार्यकलापों पर नाराज दिखने लगे हैं.

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नेपाल में अब चीन की महिला राजदूत की जरूरत से ज्यादा सक्रियता वहां के लोगों को नाराज करने लगी है. लंबे समय से ये खबरें आ रही हैं कि नेपाल की सरकार को ये महिला चीनी राजदूत अपने तरीके से चलाने की कोशिश कर रही है. चीन के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ना केवल उससे बहुत ज्यादा मिलते हैं बल्कि उसकी सलाह पर अमल करते हैं.

इससे पहले नेपाल में कभी ऐसा नहीं देखा गया कि कोई राजदूत इस तरह से इतना सक्रिय हुआ हो. यहां तक ये माना जाता है कि नेपाल ने भारत के खिलाफ जो नक्शा बनाया है, उसके पीछे इसी महिला राजदूत की भूमिका बताई जा रही है.

ये भी माना जा रहा है कि इस समय नेपाल का जो भारत विरोधी रवैया है, उसके पीछे इन्हीं मोहतरमा का हाथ है. अब जबकि नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार खतरे में है तब भी माना जा रहा है कि वो फिर से सक्रिय हो गईं हैं. ना केवल बड़े नेताओं बल्कि तमाम अधिकारियों से भी मिल रही हैं. चाइनीज राजदूत की इस हरकत ने ये सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि क्या किसी राजदूत के प्रोटोकॉल में ये शामिल होता है कि वो इस तरह से सरकार के नेताओं और अधिकारियों से मिले. कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि चाइनीज राजदूत एक तरह से नेपाल में एक समानांतर सरकार चला रही हैं. इस पूरे मामले को जानते हैं सवाल और जवाब के जरिए.



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सवाल - नेपाल में वो कौन सी महिला राजदूत हैं, जो इस समय चर्चाओं में हैं और विवादों में भी?

- चीन की इस महिला राजदूत का नाम होऊ यांगी है. वो जब से नेपाल आईं हैं. तब से दूसरे राजदूतों के उलट लगातार नेपाल के प्रधानमंत्री और सरकार के दूसरे मंत्रियों से मिलती हैं. यही नहीं अब पिछले दिनों उन्होंने नेपाल सरकार के सीनियर अफसरों से मुलाकात शुरू की है. वो विवादों में इसलिए हैं कि लोगों को लग रहा है कि वो नेपाल में चाइनीज एजेंडा लागू करा रही हैं. नेपाल सरकार उनकी कठपुतली बनी हुई है. नेपाल की इस राजदूत को लेकर नेपाल में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है. अब नेपाल के अखबार भी उसके खिलाफ लिखने लगे हैं.

अब नेपाल का माीडिया भी नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांगी पर नेपाल के अंदरूनी मामलों में जरूरत से ज्यादा दखल की बातें कहने लगा है


सवाल - क्या किसी देश के राजदूत के प्रोटोकॉल में इस तरह बड़े पैमाने पर सरकार के नेताओं और अफसरों से मिलना जुलना होता है
- बेशक किसी भी देश का राजदूत देश में नेताओं, अधिकारियों से मिल सकता है. सार्वजनिक प्रोग्राम में शिरकत भी कर सकता है. साथ ही कहीं आ जा भी सकता है. लेकिन उसकी एक सीमा होती है. आमतौर पर किसी भी देश के राजदूत ये सारे काम करते हैं लेकिन बहुत सीमित तरीके से. वो कोशिश करते हैं कि अपनी सीमाओं में रहकर काम करें.

फिर हर राजदूत का प्रोटोकॉल ये होता है कि जब भी वो किसी से मुलाकात कर रहा हो तो ये मुलाकात गुप्त नहीं होगी. इससे उस देश की संप्रुभता और कामकाज पर कोई असर नहीं पडे़गा. चूंकि नेपाल में सरकार ओली की है, लिहाजा चाइनीज राजदूत के प्रोटोकाल का उल्लंघन करने के बाद भी वो उन पर कोई कार्रवाई नहीं करते. ना उन्हें ऐसा नहीं करने की सलाह देते हैं. यहां तक कि नेपाल सरकार ने एक बार भी चाइनीज राजदूत से ये नहीं कहा कि उन्हें ऐसी मुलाकातों से पहले सरकार को सूचित भी करना चाहिए.

सवाल - क्या किसी राजदूत को किसी देश की अंदरूनी राजनीति में दखल देना चाहिए
- नहीं, प्रोटोकॉल उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं देता लेकिन अक्सर कई बार कुछ राजदूत ऐसा करते हैं. मसलन भारत में पाकिस्तान उच्चायोग के उच्चायुक्त के हुर्रियत नेताओं के साथ मुलाकात को लेकर भी ऐसे सवाल अतीत में उठते रहे हैं. दूसरे हर ऐसी मीटिंग का रिकॉर्ड होना चाहिए. चाइनीज राजदूत आमतौर पर लोगों से गुप्त तरीके से मिलती हैं. उसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता. उन पर अब आरोप लगने लगे हैं कि वो नेपाल में अंदरूनी राजनीति में दखल दे रही हैं.

वर्ष 2018 में होऊ यांगी नेपाल में चीन की राजदूत बनकर आईं थीं. जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से इतनी अधिक बार मुलाकात की है कि वो भी एक रिकॉर्ड है


सवाल - इस बार चीनी राजदूत की सक्रियता की वजह क्या है
- नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में अंदरूनी कलह के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से उनकी पार्टी के लोगों ने इस्तीफा मांग लिया. स्थिति ये है कि ना तो सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी में उनके साथ लोग हैं और ना ही संसद में पार्टी के नेताओं का बहुमत उनके साथ है. उनकी कुर्सी डगमगा रही है. ऐसे में चीनी राजदूत की सक्रियता की वजह अब ये मानी जा रही है कि वो नेपाल में तमाम नेताओं से मिलकर सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं कि ओली की कुर्सी बची रहे.

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यहां तक उनकी राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से मुलाकात पर भी सवाल होने लगे हैं, क्योंकि ये गु्प्त मुलाकात थी. दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, इसका कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया. ऐसी मुलाकातों के दौरान विदेश विभाग के एक सचिव रैंक के अधिकारी को राष्ट्रपति भवन में नियुक्त किया गया था, जो इस तरह की मुलाकातों में रहे, लेकिन इस अफसर को भी इस मुलाकात से दूर रखा गया. उसे इस मुलाकात की भनक भी नहीं लगने दी गई.

सवाल- चाइनीज राजदूत और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बीच रिश्ते कैसे हैं
- बहुत अच्छे हैं. ये माना जाता है कि ओली पर जब भी संकट के बादल आते हैं तब चीन उन्हें बचाता रहा है. नेपाल के सियासी जगत में अब ये बात गुप्त नहीं रह गई है कि ओली चीन के इशारों पर काम करते हैं. चाइनीज राजदूत से उनकी बहुत ज्यादा मुलाकातें होती हैं. आमतौर पर प्रधानमंत्री और राजदूत के बीच इतनी मुलाकातें नहीं होतीं. ये कहा जाता है कि कई बार तो खुद ओली प्रोटोकॉल तोड़कर उनसे मिलने पहुंचे हैं.

सवाल - चाइनीज राजदूत पिछले एक हफ्ते में किससे-किससे मिल चुकी हैं
- पहले तो राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से मिलीं. फिर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर नेता माधव कुमार नेपाल से मिलीं. चाइनीज राजदूत होऊ जब 03 जुलाई को नेपाल की राष्ट्रपति से मिलीं तो इसे रूटीन मुलाकात बताया गया. नेपाल में राष्ट्रपति से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जब एक डिप्लोमेट राष्ट्रपति से मिलना चाहता है तो उसे इनकार नहीं किया जा सकता. नेपाल के प्रमुख अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा कि अगर चाइनीज राजदूत राष्ट्रपति या पार्टा नेताओं से मिल रही हैं तो इसे विवादों में नहीं घसीटना चाहिए.

होऊ यांगी को काफी स्मार्ट और रणनीतिक दिमाग वाली डिप्लोमेट माना जाता है. वो नेपाल की तमाम साइट्स पर जाकर इस तरह की तस्वीरें खिंचवाती हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नेपाल की जनता के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाना चाहती हैं


सवाल - नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से चाइनीज राजदूत की मुलाकात से क्यों विवाद हो गया
-इससे तमाम सवाल उठ खड़े हुए हैं. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने खुद कहा है कि राष्ट्रपति का ऑफिस लगातार डिप्लोमेट कोड कंडक्ट को तोड़ रहा है. नेपाल के विदेश मंत्रालय का एक अंडर सेक्रट्री खासतौर पर इसीलिए राष्ट्रपति के आफिस में तैनात किया गया है कि वो राष्ट्रपति को विदेशी मेहमानों, राजदूतों के साथ उनकी मीटिंग कराता रहे और इस दौरान मौजूद रहे लेकिन जब चाइनीज राजदूत राष्ट्रपति से मुलाकात करने गईं तो इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय के अंडर सेक्रेट्री को नहीं थी. उसे इस बारे में बताया भी नहीं गया.

सवाल - इस बारे में डिप्लोमेटिक कोड कंडक्ट क्या कहता है
- डिप्लोमेट कोड ऑफ कंडक्ट कहता है कि ऐसी तमाम मीटिंग्स में विदेश मंत्रालय के अधिकारी को मौजूद रहना चाहिए, ताकि इस मुलाकात का आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जा सके.

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सवाल - क्या चाइनीज राजदूत ने अपनी दूसरी मुलाकातों में भी डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल को तोड़ा है
- हां. चीनी राजदूत होऊ यांगी की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता माधव नेपाल से मुलाकात में भी यही हुआ. उसके विवरण भी नेपाल के विदेश विभाग के पास नहीं हैं. यहां भी कहा जा रहा है कि उन्हें इसकी सूचना देनी थी. वो नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सीनियर नेता प्रचंड दहल से भी मिलना चाहती हैं, क्योंकि प्रचंड की अगुआई में ही नेपाल के प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफा मांगा गया है. लेकिन प्रचंड ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया है.

सवाल - क्या चाइनीज राजदूत तमाम नेताओं से मिलकर नेपाल की अंदरूनी हालात के बारे में बात कर रही हैं
कम से कम नेपाल के अखबार तो यही कह रहे हैं. चाइनीज राजदूत होऊ एक और सीनियर नेता झाना नात खनल से भी उनके निवास पर जाकर मिलीं. माना जाता है कि उन्होंने उनसे नेपाल की राजनीतिक हालात पर ही चर्चा की.

सवाल - अंदरूनी सूत्र क्या कहते हैं कि इन मुलाकातों में चाइनीज राजदूत क्या चर्चा कर रही हैं
-नेपाल के अखबार द काठमांडू पोस्ट का कहना है कि नेपाल के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि चीनी राजदूत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मिलकर उन्हें साथ रहने को और ओली का साथ देने को कह रही हैं. वो तर्क दे रही हैं कि चीन चाहता है कि नेपाल में इस समय राजनीतिक स्थिरता बनी रहनी चाहिए.

नेपाल की राजदूत बनने से पहले होऊ यांगी पाकिस्तान में तीन साल तक राजदूत थीं


सवाल - क्या ऐसा काम होई यांगी पहले भी करती रही हैं.
- हां, मई में भी नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर मतभेद उभरे थे. तब भी वो नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कई नेताओं से मिलीं थी, जिसमें ओली, दहल और पार्टी के अन्य नेता शामिल थे. तब भी चाइनीज राजदूत ने उनसे साथ रहने को कहा था. जब मीडिया ने चीनी दूतावास से इन मुलाकातों के बारे में पूछा तो चीनी दूतावास के प्रवक्ता झांग सी ने एक पोस्ट में कहा कि चीन नहीं चाहता कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी किसी भी तरह की दिक्कत में पड़े और इसलिए नेपाल में नेताओं को सलाह देता रहा है कि वो मतभेद सुलझाकर साथ रहें.

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सवाल - नेपाल में इसे लेकर क्या प्रतिक्रिया है
- नेपाल के पूर्व राजदूत लोकराज बराल ने कहा कि नेपाल के नेताओं को अपने अंदरूनी मामलों में किसी बाहरी ताकत को दखलंदाजी करने का मौका नहीं देना चाहिए. जब भारतीय राजदूत ने कभी ऐसा किया तो नेपाल में नेताओं ने तुरंत हल्ला मचाना शुरू कर दिया लेकिन अब चीन जब ऐसा कर रहा है तो सभी नेता शांत हैं और केवल मीडिया इस मामले को उठा रहा है.

सवाल - वैसे सियासी जगत में इसे लेकर क्या कोई प्रतिक्रिया है
- आमतौर पर अब नेपाल का विपक्ष इसको लेकर सक्रिय हो रहा है और ये कह रहा है कि चीन जिस तरह से नेपाल के मामलों में लगातार दखलंदाजी कर रहा है. उसको रोका जाना चाहिए. नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री कमल थापा ने सोशल मीडिया पर कहा, प्रधानमंत्री ओली कह रहे हैं कि भारत उनकी सरकार को गिराने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन की राजदूत हर दरवाजे पर जाकर सरकार को बचाने की कोशिश कर रही हैं.

सवाल - आमतौर पर नेपाल में लोगों को क्या लगने लगा है
- चीन में ये चर्चाएं होने लगी हैं कि चीन पूरी तरह से नेपाल की अंदरूनी राजनीति में दखल दे रहा है जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. विदेशी लोगों को नेपाल की अंदरूनी राजनीति से दूर रहना चाहिए.

सवाल - चाइनीज राजदूत होऊ यांगी कौन हैं, क्या उन्हें चीन ने खास मकसद से नेपाल भेजा है
- चीनी नागरिक होऊ यांगी नेपाल में साल 2018 से चीन की राजदूत हैं. उन्हें दक्षिण एशियाई मामलों का जानकार माना जाता है. इसी लिहाज से यांगी ने मिनिस्ट्री ऑफ फॉरेन अफेयर्स में भी लंबे वक्त तक डिप्टी डायरेक्टर की भूमिका निभाई और कई अहम फैसले लिए, जिनसे चीन का संबंध पड़ोसी देशों से प्रभावित हुआ. यांगी ने चीनी राजदूत के तौर पर पाकिस्तान में भी तीन साल बिताए.
यांगी के कूटनीतिक दिमाग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एकदम अलग संस्कृति वाले देश में मेलजोल बढ़ाने के लिए इस राजदूत ने उर्दू भाषा सीखी और राजनेताओं से मेलजोल के मौके पर फ्लूएंट उर्दू बोला करती थीं ताकि उन्हीं में से एक लगें.
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