सवाल - जवाब : किस तरह भारत में जासूसी करता है पाकिस्तान

सवाल - जवाब : किस तरह भारत में जासूसी करता है पाकिस्तान
नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग का आफिस, जहां के दो अफसर भारत में जासूसी करने के आरोप में पकड़े गए

अभी दो-तीन पहले ही खबर आई कि पाकिस्तान उच्चायोग के दो अफसर दिल्ली में जासूसी के आरोप में पकड़े गए. इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें तुरंत पाकिस्तान लौट जाने का निर्देश दे दिया. माना जाता है कि ये दोनों पाकिस्तान की मिलिट्री इंटैलीजेंस से जुड़े थे. ऐसे में ये सवाल जरूर उठता है कि पाकिस्तान ने भारत में अपने जासूसी के तार किस तरह फैलाए हुए हैं

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भारत ने हाल ही में पाकिस्तान उच्चायोग के दो अफसरों को जासूसी करने के मामले में वापस उनके देश भेज दिया है. ये दोनों अफसर भारत में रहकर पाकिस्तान के लिए जानकारियां देने वाले स्रोत बनाने में लगे थे. लेकिन ऐसा पहला मामला नहीं है जबकि पाकिस्तान ने भारत में जासूसी के लिए कोशिश की हो. कहा जाता है कि पाकिस्तान के मिलिट्री इंटैलीजेंस के साथ मिलकर पाकिस्तान इंटर सर्विसेज इंटैलिजेंस इसी काम में लगी रहती हैं.

वो मुख्य तौर पर भारतीय सेना से जुड़ी जानकारियों के अलावा तमाम संवेदनशील जानकारियां जुटाने की कोशिश करती हैं. इन जानकारियों के आधार पर भारत में आतंकवादी हमलों के साथ कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराई जाती है. कानून-व्यवस्था को खराब करने का काम किया जाता है.

माना जाता है कि पाकिस्तान भारत के हर सैन्य छावनी और सामरिक जगहों के आसपास अपने जासूस और संपर्कों के माध्यम से ये जानकारियां हासिल करता है. वैसे अगर मोटे तौर पर देखें तो पाकिस्तान के मिलिट्री इंटैलीजेंस और आईएसआई ने तो अपने यहां भारत में जासूसी करने और अस्थिरता फैलाने की एक लंबी-चौड़ी विंग ही बना रखी है.



सवाल- किन दो पाकिस्तानी अफसरों को जासूसी का दोषी पाया गया?



- हाल में दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के जिन दो अफसरों को भारत ने वापस भेजा है. उनके नाम ताहिर खान और आबिद हुसैन है. ये वीजा अस्सिटेंट थे. वीजा के लिए आने वाले लोगों को फंसाते थे. उनके जरिए दिल्ली में अपने संपर्क बना रहे थे. उन्होंने कितने संपर्क बनाए और उनके जरिए क्या जानकारियां हासिल कीं. ये तो अंदाज नहीं है.
माना जा रहा है कि ये दोनों पाकिस्तान की मिलिट्री इंटैलिजेंस यानि एमआई के सदस्य हैं. ताहिर 2016 से भारत में था तो आबिद पिछले साल यहां आया था. एमआई का काम दूसरे देशों में जासूसी करना, महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के साथ स्लीपर सेल तैयार करने का है. भारत जैसे देशों में एमआई पाकिस्तान की आईएसआई के साथ मिलकर काम करती है.

सवाल - ये दोनों क्या करते थे?
- आमतौर पर ये दोनों चूंकि वीजा सेक्शन में डील करते थे, लिहाजा वहां वो आसानी ऐसे लोगों की संभावना तलाशते रहते थे जो उनके लिए काम कर सकें. उन्हें पाकिस्तान जाने पर ज्यादा सुविधाएं और वहां पैसा देकर बहलाते फुसलाते थे. अगर उन्हें लगता था कि जिन लोगों के सामने उन्होंने चारा डाला है, वो फंस जाएंगे तो उन लोगों के पाकिस्तान जाने पर वहां उनके विभाग के अन्य लोग उन्हें ट्रैप कर लेते थे.

सवाल - किस तरह भारत में संपर्कों को ट्रैप करते हैं पाकिस्तानी?
- सबसे पहले ये देखा जाता है कि क्या वो भारत में किसी बात को लेकर क्षुब्ध है या फिर पैसे का जरूरतमंद है. ऐसे लोग जब वीजा लेकर पाकिस्तान जाते हैं तो वहां उनका ब्रेन वाश करने का काम किया जाता है. या फिर भारत में ऐसे लोगों की आर्थिक मदद करके उन्हें फांसा जाता है
-सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप करने का काम किया जाता है.
- आमतौर पर पाकिस्तान जाने के लिए आने वाले लोग उनके निशाने पर ज्यादा होते थे.

सवाल - क्या इसके जरिए पाकिस्तान ने भारत में संपर्कों का जाल बिछा रखा है?
- ये संभव हो सकता है. क्योंकि देशभर से लोग वीजा लेकर पाकिस्तान जाते हैं. उसमें कुछ काम के लिए तैयार हो जाते हैं. वहीं पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों में से बहुत से लोग भारत आकर अलग अलग शहरों में अपने परिचितों या संपर्कों के जरिए पाकिस्तान को जानकारी देने वाला नेटवर्क बिछाने की कोशिश करते रहे हैं.
उनमें से कुछ को स्लीपर सेल बनाने की कोशिश की जाती है. कुछ मात्र जानकारियां देने का काम करते हैं. सैन्य छावनियों और संंवेदनशील क्षेत्रों के आसपास इस तरह का जाल बिछाने की कोशिश ज्यादा होती है.

भारत में जासूसी करने का काम पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस सर्विस के साथ आईएसआई भी करती है


सवाल - हालिया जासूसी स्कैंडल कौन सा था जिसमें सेना के लोग भी गिरफ्त में आए हों?
- छिटपुट तौर पर ऐसी घटनाएं कई बार हो चुकी हैं. इसी साल फरवरी में पाकिस्तानी जासूसी रैकेट से संबंधों के आरोप में 11 नौसेना कर्मियों समेत 13 लोगों गिरफ्तार किया गया. इन लोगों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने सोशल मीडिया पर हनी ट्रैप के जरिए अपने जाल में फंसा लिया था. उन्हें मुंबई, कारवाड़ और विशाखापट्टनम समेत देश के कई नौसैनिक अड्डों से पकड़ा. इन लोगों पर फेसबुक समेत अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिये भारतीय नौसेना की संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप है.

सवाल - भारत में पाकिस्तानी जासूसी का सबसे बड़ा मामला क्या रहा है? 
- ये मामला 1979 में हुआ था जबकि कश्मीर में सांबा इंफेंट्री के 50 से अधिक अफसरों, सैनिकों को गिरफ्तार किया गया था. इन लोगों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था. जब ये मामला उस समय देश के सामने आया तो पूरे देश में हलचल मच गई.
दरअसल इस मामले में 24 अगस्त 1978 से लेकर 23 जनवरी 1979 तक 168 इंफेंट्री ब्रिगेड में करने वाले सैन्य अफसरों और कर्मियों को इसमें पाकिस्तान के लिए जासूसी में मददगार रहने का आरोपी पाया गया था. माना गया था कि वो पाकिस्तान की मिलिट्री इंटैलीजेंस को भारत की खुफिया जानकारियां उपलब्ध करा रहे थे. हतप्रभ करने वाली बात ये थी कि इसकी लपेट में ब्रिगेडियर, कर्नल, मेजर कई रैंक के अधिकारी आए थे. बाद में इस पर कई किताबें भी लिखी गईं. हालांकि इस मामले में बाद में कई अफसरों को अदालत से राहत भी मिली.

सवाल - कैसे काम करती है पाकिस्तान मिलिट्री इंटैलिजेंस? 
- बटवारे के बाद 1948 में पाकिस्तान में डायरेक्टरेट फॉर मिलिट्री इंटैलिजेंस का गठन हुआ. आमतौर पर इसको एमआई के नाम से जाना जाता है. ये पाकिस्तानी सेना का एक हिस्सा है. इसका मुख्यालय रावलपिंडी में है. ये पूरी तरह पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और सैनिकों की सेवाएं लेती है.

सवाल - पाकिस्तान की मिलिट्री इंटैलिजेंस का काम क्या है? 
- ये दुश्मन देशों में उनकी सेना, ताकत, साजोसामान और क्षमता की थाह लेती है. साथ ही दुश्मन देशों में अपने संपर्क बनाकर उनसे जानकारियां हासिल करती है. इसमें वो कई बार स्लिपर सेल भी बनाती है. उनके विदेशों में अपने एजेंट होते हैं. लेकिन आमतौर पर ये अपना काम चुपचाप करती है. जिस तरह पाकिस्तान की आईएसआई दुनियाभर में चर्चित रहती है, ये उतने ही खामोश तरीके से काम करती है. ये देश के अंदर भी पाकिस्तान के हितों के लिए काम करती है.

सवाल - क्या पाकिस्तान की मिलिट्री इंटैलिजेंस और आईएसआई एक ही शख्स ने तैयार की है?
- हां, ये सही है पाकिस्तान की इन दोनों जासूसी एजेंसियों का गठन अंग्रेज मेजर जनरल राबर्ट काटम ने किया था. उन्होंने ही 1950 में आईएसआई का गठन किया.

कराची स्थित आईएसआई का मुख्यालय, जिसने भारत में जासूसी करने से लेकर गड़बड़ियां फैलाने तक के लिए दो अलग से खास विंग बना रखी है


सवाल - क्या भारत में एमआई के बदले आईएसआई का जाल ज्यादा है?
- हां, एमआई जहां सीमित तौर पर काम करती है वहीं आईएसआई को अपने काम में ज्यादा आजादी मिली है. वो आतंकवाद फैलाने, अस्थिरता और आतंक समेत कई तरह के काम करती है. एमआई की तुलना में वो पाकिस्तान की कहीं ज्यादा बड़ी और घातक खुफिया एजेंसी है. जो सही-गलत हर तरह के काम करती है. माना जाता है कि भारत में आईएसआई ने अपना कहीं ज्यादा बड़ा जाल फैला रखा है.

सवाल - क्या भारत में एमआई और आईएसआई दोनों मिलकर अपने काम को अंजाम देती हैं?
- अभी तक तो ऐसी जानकारी सामने नहीं आई है कि भारत में दोनों जासूसी एजेंसीज मिलकर काम को अंजाम देती रही हों लेकिन इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि दोनों किसी स्तर पर एक-दूसरे की मदद जरूर करती होंगी.

सवाल - आईएसआई के काम करने का क्या तरीका है?
पाकिस्तान की कुख्यात सीक्रेट एजेंसी इंटर सर्विसेट इंटैलिजेंस यानि आईएसआई के बारे में कहा जाता है कि अगर भारत में कहीं भी आतंकी हमला हुआ है तो उसमें जरूर कहीं ना कहीं से उसका हाथ होगा. अब उसने अपने पैर दक्षिण एशिया के सभी देशों में पुख्ता तरीके से फैला लिए हैं. श्रीलंका में हुए धमाकों में भी उसकी संलिप्तता मानी गई थी.

सवाल - आईएसआई मोटे तौर पर क्या करती है?
- वो भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए आतंकवादी संगठनों को खड़ा करती है. उनकी फंडिंग करती है. इसके अलावा माना जाता है कि उसने भारत में तमाम जगहों पर अपने स्लिपर सेल बना रखे हैं. भारत में हरकत करने वाले आतंकी उसी की ट्रेनिंग और देखरेख में तैयार किए जाते हैं. साथ ही साथ वो जरूरी और संवेदनशील जानकारियां भी इकट्ठी करती है.

सवाल - आईएसआई भारत में किस तरह कुचक्र रचती है ?
- ये बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों को पैसा देकर फुसलाती है. फिर उनसे आतंक से लेकर खुफिया जानकारियां लेने के तमाम काम करती है. भारत में हर आतंकी हमले से पहले आईएसआई आतंकी संगठनों को हर तरह का सहयोग देती है. आतंकी संगठनों को अपने कार्रवाइयों की जानकारी इस एजेंसी को देनी पड़ती है. बगैर इस एजेंसी की मर्जी के आतंकवादी संगठनों का पत्ता भी नहीं खड़कता.

सवाल - क्या आईएसआई खासतौर पर भारत में आपरेशन के लिए भी कोई विंग बना रखी है?
- आईएसआई के तीन विंग हैं- इंटरनल विंग, एक्सटर्नल और फॉरेन रिलेशन. आईएसआई के एक्सटर्नल और फॉरेन रिलेशन विंग सीमापार कश्मीर में आतंकवादियों के संगठन तैयार करने से लेकर उन्हें ट्रेनिंग, पैसा और हथियार देने का काम करते हैं. भारत के किसी भी आतंकवादी हमले में इन दोनों विंग्स की भूमिका खास रहती है.

इन तीनों विंगों को आठ डिविजन में बांटा गया गया है. इसमें ज्वाइंट इंटैलिजेंस नार्थ सीधे सीधे जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान में आतंकवादियों की फसल तैयार करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसआई आतंकवाद संचालन बेल्ट की तरह काम को अंजाम देता रहता है. इन दोनों विंग्स की कोशिश रहती है कि भारत और खासकर कश्मीर में लगातार अस्थिरता बनाकर रखी जाए.

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First published: June 2, 2020, 5:16 PM IST
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