भारत छोड़ो आंदोलन: जब बापू की गिरफ्तारी के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने चलाया था ऑपरेशन जीरो ऑवर

8 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के सम्मेलन में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने आधे घंटे से ज्यादा वक्त तक भाषण दिया. इसी भाषण में उन्होंने करो या मरो का नारा दिया. जिसका सीधा अर्थ था कि भारत की जनता अब देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहे...

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Updated: August 9, 2019, 3:33 PM IST
भारत छोड़ो आंदोलन: जब बापू की गिरफ्तारी के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने चलाया था ऑपरेशन जीरो ऑवर
ब्रिटिश सेना ने चलाया था ऑपरेशन जीरो ऑवर
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Updated: August 9, 2019, 3:33 PM IST
9 अगस्त 1942 का दिन भारतीय इतिहास में एक अहम तारीख के तौर पर दर्ज है. इसी दिन महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) का ऐलान करने पर ब्रिटिश हुकूमत ने गिरफ्तार कर लिया था. आजादी के अंतिम संग्राम के ऐलान के बाद पूरा देश आंदोलन की आग में जल उठा था. ब्रिटिश हुकूमत के हाथ पांव फूल गए थे.

8 अगस्त को मुंबई के गवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति ने एक प्रस्ताव पारित किया था. इसे ही भारत छोड़ो आंदोलन के नाम से जाना गया. कांग्रेस ने आजादी के आंदोलन को नया मोड़ दे दिया था. 9 अगस्त 1942 को बापू के गिरफ्तारी के दिन आंदोलन में पूरा देश शामिल हो गया.

8 अगस्त को कांग्रेस के सम्मेलन में महात्मा गांधी ने आधे घंटे से ज्यादा वक्त तक भाषण दिया. इसी भाषण में उन्होंने करो या मरो का नारा दिया. जिसका सीधा अर्थ था कि भारत की जनता अब देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहे. बापू के इस नारे का लोगों के बीच जादुई असर हुआ. ब्रिटिश हुकूमत हिल गई. आननफानन में ब्रिटिश हुकूमत ने कांग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया.

महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के लिए ऑपरेशन जीरो ऑवर

कांग्रेस के सारे बड़े नेता गिरफ्तार हुए. 9 अगस्त 1942 को बापू को भी गिरफ्तार कर लिया गया. ब्रिटिश सेना ने महात्मा गांधी समेत कांग्रेस के सारे बड़े नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए एक स्पेशल ऑपरेशन चलाया. ब्रिटिश हुकूमत के इस ऑपरेशन को ऑपरेशन जीरो ऑवर का नाम दिया गया था. महात्मा गांधी को गिरफ्तार करने के बाद पूना के आगा खां महल में रखा गया. कांग्रेस के दूसरे बड़े नेताओं को अहमदनगर के दुर्ग में रखा गया.

mahatma gandhi quit india movement when bapu arressted by british army operation zero hour
9 अगस्त 1942 को गिरफ्तार किए गए थे महात्मा गांधी


ब्रिटिश हुकूमत ने कांग्रेस को अवैध संस्था घोषित कर दिया. इसके नेताओं की संपत्ति जब्त कर ली गई. धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. महात्मा गांधी समेत कांग्रेस के सारे बड़े नेता जेल में थे. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल था कि आंदोलन की अगुआई कौन करे. नेताओं की गैरहाजिर में आम जनता ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया. देश की जनता ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए मैदान में उतर आई.
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ब्रिटिश हुकूमत ने आंदोलन को कुचलने के लिए हिंसा का सहारा लिया. आंदोलनकारियों पर लाठी-डंडे और गोलियां बरसाई गईं. ब्रिटिश सरकार की कार्रवाई के खिलाफ जनता भी उग्र हो गई. जनता ने हिंसक रूख अख्तियार कर लिया. आंदोलनकारी पटरियां उखाड़ने लगे. कई रेलवे स्टेशनों को आग के हवाले कर दिया गया. पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन तेजी से फैल गई.

mahatma gandhi quit india movement when bapu arressted by british army operation zero hour
पूरा देश आंदोलन की आग में कूद पड़ा था


ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आंदोलन की आग फैलती ही गई

मुंबई, अहमदाबाद और जमशेदपुर के फैक्ट्री मजदूरों ने हड़ताल कर दी. बलिया, बस्ती, बम्बई के सतारा और बंगाल के मिदनापुर जैसे इलाकों में लोगों ने अस्थायी सरकार बनाने का ऐलान कर दिया.

मुंबई के जिस गवालिया टैंक से आंदोलन की शुरुआत हुई थी, वहां आंदोलनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया. पूरी मुंबई आंदोलन की आग में जलने लगी थी. सिर्फ मुंबई में आंदोलन को कुचलने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने पांच बार गोली चलवाई और पांच बार आंसू गैस के गोले छोड़े गए.

गवालिया टैंक पर फहराए गए झंडे को ब्रिटिश सेना ने उतार दिया. जैसे ही ये खबर फैली की ब्रिटिश सेना ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, आंदोलनकारी और भड़क उठे. कई शहरों में पुलिसवाले लोगों के गुस्से का शिकार बने. इसके बाद जबरदस्त हिंसा हुई.

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आम जनता ने आंदोलन की कमान अपने हाथ में ले ली थी


10 अगस्त तक आंदोलन ने काफी उग्र रूप धारण कर लिया. देश में कई जगहों पर बम विस्फोट हुए. सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया. सरकारी दफ्तरों की बिजली काट दी गई. परिवहन और संचार सेवाओं को ध्वस्त कर दिया गया.

आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने सारे उपाय अपना लिए. सैकड़ों आंदोलनकारियों को मौत के घाट उतार दिया गया. एक लाख से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए. आंदोलन करीब दो साल तक चला. ब्रिटिश सरकार अपनी ताकत के बल पर आंदोलन को दबाने में कामयाब रही.

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First published: August 9, 2019, 10:39 AM IST
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