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गुरुदेव टैगोर : जिनका नाम तीन देशों के राष्ट्रगान के साथ जुड़ा है

News18Hindi
Updated: August 7, 2018, 5:14 PM IST
गुरुदेव टैगोर : जिनका नाम तीन देशों के राष्ट्रगान के साथ जुड़ा है
दो देशों का राष्ट्रगान टैगोर ने खुद ही लिखा था तो एक देश के राष्ट्रगान को इंस्पायर किया था.

दो देशों का राष्ट्रगान टैगोर ने खुद ही लिखा था तो एक देश के राष्ट्रगान को इंस्पायर किया था.

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  • Last Updated: August 7, 2018, 5:14 PM IST
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भारत के पास दो ऐसे व्यक्तित्व हैं जो कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हमें एक भारतीय के रूप में गर्व करने का अवसर देते हैं. पहले हैं महात्मा गांधी और दूसरे रवींद्रनाथ टैगो. महात्मा गांधी जहां अपने सत्य और अहिंसा के सार्वभौम मूल्यों के जरिए दुनिया के तमाम नेताओं और लोगों को प्रभावित करने में सफल रहे और भारत को आजादी भी दिलाई तो वहीं रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने आधुनिक विचारों, कविताओं और राष्ट्रवाद पर विचारों के जरिए एक नई लीक खींच दी. हालांकि कभी-कभी दोनों के विचार एक-दूसरे के सामने आकर भी खड़े हो जाते थे. लेकिन सही से देखा जाये तो दोनों के विचार एक-दूसरे के पूरक थे. टैगोर के राष्ट्रवाद संबंधी विचारों की तो आज भी धाक है. कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार, निबंधकार, नाटककार और चित्रकार सभी रहे रवींद्रनाथ टैगोर की आज पुण्यतिथि है. उनके बारे में कुछ रोचक तथ्य :

लंदन से कानून पढ़े पर डिग्री नहीं ली
रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म कलकत्ता के जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था. रवींद्रनाथ टैगोर को 'गुरुदेव' भी कहा जाता है. उनके पिता देवेंद्रनाथ टैगोर एक जाने-माने समाज-सुधारक थे. जो चाहते थे कि रवींद्रनाथ बड़े होकर बैरिस्टर बनें. टैगोर की पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल से हुई थी. लंदन में उन्होंने कानून की पढ़ाई की पर बिना डिग्री लिए ही वापस चले आये. वैसे उनके बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर ने 1864 में इंडियन सिविल सर्विस पास की और देश के पहले आईसीएस बने. टैगोर की शादी 1883 में मृणालिनी देवी के साथ हुई थी.

देश के लिये जीता पहला नोबेल पुरस्कार

बचपन में ही उनका रुझान कविता और कहानी लिखने की ओर हो चुका था. उन्होंने अपनी पहली कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी. 1877 में वह 16 साल के थे जब उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई थी. गुरुदेव को उनकी सबसे लोकप्रिय रचना गीतांजलि के लिए 1913 में नोबेल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. टैगोर को 'नाइटहुड' की उपाधि भी मिली हुई थी. जिसे टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) के बाद अपनी लौटा दिया था. 1921 में उन्होंने 'शांति निकेतन' की नींव रखी थी. जिसे 'विश्व भारती' यूनिवर्सिटी के नाम से भी जाना जाता है.

तीन देशों के राष्ट्रगान से जुड़ता है नाम
टैगोर की रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं. भारत का 'जन गण मन' और बांग्लादेश का 'आमार सोनार बांग्ला' उन्हीं की रचनाएं हैं. वहीं श्रीलंका का राष्ट्रगीत 'श्रीलंका मथा' भी टैगोर की कविताओं की प्रेरणा से बना है. इसे लिखने वाले आनंद समरकून शांतिनिकेतन में रवींद्रनाथ टैगोर के पास रहे थे और उन्होंने कहा था कि वे टैगोर स्कूल ऑफ पोएट्री से बेहद प्रभावित थे.
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दुखद यह है कि कुछ साल पहले टैगोर की रचनाओं को बांग्लादेश की स्कूली किताबों से हटाने की बात सामने आई थी. दो साल पहले वहां की सरकार ने स्कूल सिलेबस में बदलाव किया था. कक्षा 6 की किताब से टैगोर की कविता ‘बांग्लादेशर हृदोय’ को हटा दिया गया था जिसमें टैगोर ने अपनी मातृभूमि की खूबसूरती का जिक्र किया है.

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First published: August 7, 2018, 5:02 PM IST
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