77 साल पहले गूंजी थी आवाज- हेलो-हेलो...ये कांग्रेस रेडियो की खुफिया सेवा है

भारतीय आजादी (Indian Independence) के आंदोलन में उषा मेहता का बड़ा योगदान है. वो भारत की पहली रेडियो वूमेन (radio women) के नाम से मशहूर हुईं. भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) के दौरान उन्होंने सीक्रेट कांग्रेस रेडियो सर्विस सेवा (secret congress radio service) की शुरुआत की थी...

News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 12:16 PM IST
77 साल पहले गूंजी थी आवाज- हेलो-हेलो...ये कांग्रेस रेडियो की खुफिया सेवा है
सीक्रेट कांग्रेस रेडियो सेवा शुरू करने वाली उषा मेहता
News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 12:16 PM IST
भारतीय आजादी (Indian Independence) के कई दिलचस्प किस्से हैं. त्याग और बलिदान वाले ये किस्से हमें हर वक्त कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं. इन्हीं किस्सों में से है, एक कॉलेज गोइंग लड़की की खुफिया रेडियो स्टेशन (secret radio station) चलाने की कहानी. उस लड़की ने क्रांति की मशाल रेडियो की खुफिया सर्विस शुरू करके जलाई थी. भारत की पहली रेडियो वूमेन (radio women) के नाम से मशहूर उस महिला का नाम है- उषा मेहता.

उषा मेहता आजादी हासिल करने के लिए महात्मा गांधी के अहिंसा के रास्ते से प्रभावित थीं. उन्होंने बापू के बताए रास्ते पर चलकर स्वतंत्रता आंदोलन में खुद को झोंक दिया था. 9 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान से भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई. महात्मा गांधी के साथ कांग्रेस के सारे बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए. उषा मेहता समेत कांग्रेस के कुछ छोटे नेता गिरफ्तार होने से बच गए थे.

ये लोग गोवालिया टैंक मैदान पर तिरंगा फहराकर बापू के भारत छोड़ो आंदोलन की आवाज बने रहे. लेकिन बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी में उनकी आवाज कहां तक सुनी जाती?

कैसे आया खुफिया रेडियो सर्विस चलाने का आयडिया?

9 अगस्त 1942 की शाम कांग्रेस के कुछ युवा समर्थकों ने बॉम्बे में बैठक की. इनलोगों का विचार था कि भारत छोड़ो आंदोलन की आग मद्धिम न पड़ने पाए, इसके लिए कुछ कदम उठाने जरूरी थे. इनलोगों का मानना था कि अखबार निकालकर वो अपनी बात लोगों तक नहीं पहुंचा पाएंगे. क्योंकि ब्रिटिश सरकार के दमन के आगे अखबार की पहुंच सीमित होगी.

इस बैठक में रेडियो की समझ रखने वाले उषा मेहता जैसे युवा भी थे. यहीं से संचार के नए साधन रेडियो के इस्तेमाल के जरिए क्रांति की अलख जगाए रखने का आयडिया आया.

radio women ushma mehta story who started secret congress radio service in 1942 quit india movement
उषा मेहता

Loading...

अंग्रेजों के खिलाफ खुफिया रेडियो सर्विस शुरू करने वालों में उषा मेहता के साथ थे बाबूभाई ठक्कर, विट्ठलदास झवेरी और नरीमन अबराबाद प्रिंटर. प्रिंटर इंग्लैंड से रेडियो की टेकनोलॉजी सीखकर आए थे. उषा मेहता खुफिया रेडियो सर्विस की एनआउंसर बनाई गईं. पुराने ट्रांसमीटर को जोड़ तोड़कर इस्तेमाल में लाए जाने लायक बनाया गया और इस तरह से अंग्रेजों के खिलाफ सीक्रेट रेडियो सर्विस कांग्रेस रेडियो की शुरुआत हुई.

जब 22 साल की लड़की ने शुरू की कांग्रेस की खुफिया रेडियो सेवा

14 अगस्त 1942 को उषा मेहता ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक खुफिया ठिकाने पर कांग्रेस रेडियो की स्थापना की. इस खुफिया रेडियो सर्विस का पहला प्रसारण 27 अगस्त 1942 को हुआ. पहले प्रसारण में उषा मेहता ने धीमी आवाज में रेडियो पर घोषणा की- ये कांग्रेस रेडियो की सेवा है, जो 42.34 मीटर पर भारत के किसी हिस्से से प्रसारित की जा रही है.

उस वक्त उषा मेहता के साथ विट्ठलभाई झवेरी, चंद्रकांत झवेरी, बाबूभाई ठक्कर और ननका मोटवानी साथ थे. ननका मोटवानी शिकागो रेडियो के मालिक थे, इन्होंने ही रेडियो ट्रांसमिशन का कामचलाऊ उपकरण और टेक्निशियन उपलब्ध करवाए थे.

आजादी के आंदोलन को आवाज देने के लिए कांग्रेस रेडियो शुरू हो चुका था. कांग्रेस रेडियो के साथ युवा कांग्रेसियों के नेताओं के साथ डॉ राममनोहर लोहिया, अच्यूतराव पटवर्धन और पुरुषोत्तम जैसे सीनियर नेता भी जुड़ चुके थे. कांग्रेस रेडियो के जरिए महात्मा गांधी और कांग्रेस के दूसरे बड़े नेताओं के भाषण प्रसारित किए जाते.

radio women ushma mehta story who started secret congress radio service in 1942 quit india movement
उषा मेहता ने 22 साल की उम्र में सीक्रेट कांग्रेस रेडियो सेवा शुरू की थी


हर रोज बदले जाते थे कांग्रेस रेडियो सर्विस के स्टेशन

ब्रिटिश हुकूमत की नजरों से बचाने के लिए इस खुफिया रेडियो सेवा के स्टेशन करीब-करीब रोज बदले जाते थे. लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद खुफिया कांग्रेस रेडियो सेवा को ज्यादा दिनों तक नहीं चलाया जा सका. 12 नवंबर 1942 को ब्रिटिश हुकूमत ने उषा मेहता समेत इसे चलाने वाले सारे लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

अंग्रेजों के सीआईडी विभाग ने छह महीने तक खुफिया रेडियो सेवा चलाने के मामले की जांच की. उषा मेहता समेत उनके साथी जेल में डाल दिए गए थे. हाईकोर्ट में इस मामले का मुकदमा चला और उषा मेहता को चार साल कैद की सजा सुनाई गई.

हालांकि सीक्रेट कांग्रेस रेडियो सिर्फ तीन महीने तक चला. लेकिन इस रेडियो सेवा ने आजादी के आंदोलन में तेजी ला दी. रेडियो के जरिए जो सूचनाएं ब्रिटिश सरकार आम जनता से छुपाना चाहती थी उसका प्रसारण किया जाता. कांग्रेस रेडियो के जरिए बड़े-बड़े नेता जनता तक अपनी आवाज पहुंचाते.

radio women ushma mehta story who started secret congress radio service in 1942 quit india movement
उषा मेहता


एक टेक्नीशियन की गद्दारी की वजह से बंद हुई कांग्रेस रेडियो

उषा मेहता उन दिनों को याद करते हुए एक बार बोली थीं कि वो उनकी जिंदगी के सबसे बेहतरीन दिन थे. उन्हें बस एक ही बात का अफसोस रहा कि एक टेक्निशियन की गद्दारी की वजह से सिर्फ 3 महीने में कांग्रेस रेडियो खत्म हो गया.

उषा मेहता का जन्म 25 मार्च 1920 को गुजरात में सूरत के पास सारस नाम के छोटे से गांव मे हुआ था. उषा मेहता के पिता ब्रिटिश हुकूमत में जज के पद पर कार्यरत थे. पिता के रिटायर होने के बाद उषा अपने परिवार के साथ बॉम्बे शिफ्ट हो गईं. बॉम्बे में ही उन्होंने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया. उषा मेहता भारत की रेडियो वूमेन के नाम से मशहूर हुईं. 80 साल की उम्र में 11 अगस्त 2000 को उन्होंने आखिरी सांस ली.

ये भी पढ़ें: 14 अगस्त क्यों है भारतीय इतिहास का सबसे मुश्किल दिन

15 अगस्त को ये देश भी मनाते हैं आजादी का जश्न

जानिए आजादी के दो दिन पहले देश में क्या हो रहा था?

 
First published: August 14, 2019, 12:16 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...