राफेल के आने से कैसे बढ़ जाएगी पड़ोसियों के बीच भारत की ताकत

राफेल के आने से कैसे बढ़ जाएगी पड़ोसियों के बीच भारत की ताकत
राफेल के आने से भारतीय वायुसेना की ताकत बहुत बढ़ गई है जिससे वह अपने पड़ोसियों से कई मामलों में आगे निकल गया है. .(फाइल फोटो)

राफेल विमान (Rafale Aircrafts) भारत पहुंच चुके हैं. यह कई लिहाज से पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) की हवाई ताकत से भी बेहतर हैं.

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फ्रांस से पांच राफेल (Rafale) लड़ाकू जेट विमान भारतीय वायुसेना (IAF) के अंबाला एयरबेस (Ambala Airbase) पर उतर चुके हैं.  इन विमानों को लेकर देश में बहुत कौतूहल है और देशवासी इसके आने से भारतीय वायुसेना को मिली ताकत से सभी उत्साहित हैं. इन विमानों के आने से भारतीय वायुसेना की ताकत में बहुत इजाफा हुआ है. ऐसे में देखने वाली बात यह है इन विमानों से भारतीय वायुसेना की ताकत अपने पड़ोसियों (Neighbours) की तुलना में कितनी बढ़ी है.

4.5 पीढ़ी का एयरक्राफ्ट
विशेषज्ञों का भी कहना है कि राफेल के आने से दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति में भारत के लिए ये विमान गेमचेंजर साबित हो सकते हैं. राफेल को 4.5 पीढ़ी का एयरक्राफ्ट कहा जाता है जिसमें राडार से पकड़ में न आने की क्षमता के लिए विख्यात है.  वहीं भारतीय वायुसेना में अब तक सबसे उन्नत लड़ाकू विमान मिराज 2000 और सु30एमकेआई तीसरी और चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान माने जाते हैं.

इन खास क्षमताओं से लैस
राफेल में एयर क्राफ्ट कैरियर और तटीय बेस से उड़ान भरने की क्षमता है. इसमें आणविक प्रतिरोध, एंटिशिप स्ट्राइक, निगरानी अवलोकन, हवा में वर्चस्व, हवाई रक्षा, आदि में विविध क्षमताओं के साथ महारत है जो किसी भी लड़ाई के हालाते में अपने लक्ष्य तक पहुंचने और उसे निशाना बनाने में सक्षम है.राफेल जेट्स हमारे हवाई बेड़े की लड़ाई क्षमताओं में वृद्धि करेंगे. इसमें राडार वार्निंग रिसीवर्स, 10 घंटों का फ्लाइट डेटा रिकॉर्ड रखने में सक्षम, इंफ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम, जैमर्स, ठंडक में भी तुरंत इंजन शुरू करने की क्षमता जैसी संवेदनशील खूबियों की भरमार है.



बेहतर क्षमता वाला चीनी विमान अभी सेना में नहीं
इस तरह की वायुक्षमता वाले लड़ाकू विमान चीन को छोड़कर भारत के किसी भी पड़ोसी के पास नहीं हैं. चीन का पास जल्दी  ही J20नाम का पांचवी पीढ़ी का विमान उसकी सेना में शामिल होने वाला है जो उसने खुद विकसित किया है. यह विमान बेशक कई मामलों में राफेल से बेहतर है, लेकिन कुछ मामलों में इसके पास राफेल का भी जवाब नहीं है.

भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) में शामिल होने के लिए फ्रांस से चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट राफेल (Rafale Fighter Jet) का पहला बैच भारत आ चुका है. पहली खेप में 5 जेट 7 हजार से ज्यादा किमी का सफर तय करके भारत पहुंच चुके हैं. आइए जानते हैं था राफेल का सफर और क्या हैं इस फाइटर जेट की खूबियां?
फ्रांस ने राफेल विमानों को भारतीय वायुसेना की जरूरत के हिसाब से मोडिफाई भी किया है.


पाकिस्तान से हर मामले में बेहतर
राफेल के आने से भारतीय वायुसेना पाकिस्तानी वायुसेना से आगे निकल गई है. क्योंकि उसके पास जो सबसे उन्नत विमान है, वह अमेरिका के एफ16 विमान है जिसके पास बेहतरीन राडार और मिसाइल सिस्टम है वहीं चीन का पाकिस्तान को दिया JF-17 विमान भी राफेल का आगे फीका ही है.

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क्या है तीनों में अंतर
जहा राफेल और JF-17 सिंगल सीट और डबल सीट दोनों में उपलब्ध हैं, वहीं CJ20 केवल सिंगल सीट में ही उपलब्ध है. वहीं भारत को जो 36 राफेल विमान मिलने वाले हैं उनमें से केवल 28 सिंगल सीट वाले होंगे जब कि 8 प्रशिक्षण के उद्देश्य से डबल सीट हैं. वजन ले जाने की क्षमता के मामले में चीन का J20 की सबसे आगे है., लेकिन राफेल JF-17 से ज्यादा सक्षम है.

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फ्रांस से भारत के लिए राफेल का पहला बैच संयुक्त अरब अमीरात पहुंच चुका है.


इस मामले राफेल चीनी विमान से आगे
अपने ऑपरेशन बेस से सबसे ज्यादा दूरी के मामले में राफेल JF-17 से बेहतर तो है ही, इस मामले में वह J20 से भी आगे हैं. राफेल जहां 3,700 किमी तक  ऊंचाई से उड़ते हुए जा सकता है और बीच में रीफ्यूलिंग से वह और आगे तक जा सकता है. जबकि JF-17 और J20 2000 किमी और 2,037 किमी तक उड़ान भर सकते हैं.

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समय से पहले डिलिवरी
पिछले महीने ही लद्दाख में भारत-चीन सीमा विवाद के बाद भारत ने फ्रांस से गुजारिश की कि वह राफेल विमानों की डिलिवरी जल्दी कर दे. फ्रांस ने भी भारत की बात मानते हुए. विमानों की उस खेप को भारत को दे दिया जो उसने किसी और ग्राहक के लिए तैयार की थी. इसी का नतीजा रहा कि जो राफेल विमान कुछ महीनों बाद भारत पहुंचने वाले थे वे जुलाई माह खत्म होने से पहले ही भारत पहुंच गए.
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