खुफिया एजेंसी रॉ के जासूस और संस्थापक अफसरों में थे रघुराम राजन के पिता

रघुराज राजन जब आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ के महासचिव बने थे. वह उन दिनों काफी किताबें पढ़ते थे और कविताएं भी लिखते थे.

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 1:44 PM IST
खुफिया एजेंसी रॉ के जासूस और संस्थापक अफसरों में थे रघुराम राजन के पिता
रघुराम राजन
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Updated: July 22, 2019, 1:44 PM IST
भारतीय रिजर्व बैंक के सबसे चर्चित गवर्नर रहे रघुराम राजन को दुनियाभर में शीर्ष अर्थशास्त्रियों में गिना जाता है. ब्रिटिश मीडिया मान रहा है कि वो इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड के अगले प्रमुख बन सकते हैं. रघुराम ऐसे इकोनॉमिस्ट हैं, जो अपनी बात कहने से कभी गुरेज नहीं करते. उनके पिता भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) में उच्च पद पर थे. उन्हें तब रॉ के उभरते हुए जासूसों में एक माना जाता था.

जब 70 के दशक में रॉ की स्थापना हुई तब रघुराम राजन के पिता आईपीएस थे, लेकिन वो उस नौकरी से त्यागपत्र देकर रॉ पहुंचे. रॉ के प्रमुख रामनाथ काओ के साथ मिलकर वो इस खुफिया एजेंसी के संस्थापकों में थे.

दरअसल, खुफिया एजेंसी रॉ को बनाने में रामनाथ काओ का बड़ा योगदान था. काओ की टीम को दुनिया 'काओबॉयज' के नाम से जानती थी. उसी 'काओबॉयज' टीम में रघुराम राजन के पिता गोविन्द राजन भी थे. 70 और 80 के दशक में गोविंद उभरते हुए स्पाईमास्टर थे. वो तब रॉ के प्रमुख बन सकते थे.

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रघुराम राजन के पेरेंट्स चेन्नई में रहते हैं. रिजर्व बैंक के गर्वनर पद पर तैनाती के दौरान राजन पर बीजेपी के कई नेताओं ने हमले किए और आरोप लगाए, तो उनके माता-पिता काफी नाराज हुए.

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वर्ष 2016 में इंडियन एक्सप्रेस ने उनके पेरेंट्स का एक खास इंटरव्यू लिया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे और परिवार के बारे में कई बातें कहीं. रघुराम राजन की मां का कहना था कि जब तक उनके पति रॉ की नौकरी में रहे, तब तक उनकी पूरी प्राथमिकता उनका जॉब था. परिवार और बच्चे उनके लिए दूसरे नंबर पर आते थे. लिहाजा रघुराम और उनके भाई की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके मां पर थी.
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तब रघुराम जरूर राजनीति में प्रवेश करते
उनकी मां ने इस इंटरव्यू में कहा कि रघुराम पहले स्टीफेंस में जाकर इकोनॉमिक्स पढ़ना चाहते थे, हो सकता है कि तब वो राजनीति में भी प्रवेश कर लेते, लेकिन इसकी बजाए मां की इच्छा से वो आईआईटी गए और वहां जाकर इंजीनियरिंग की. उनकी मां कहती हैं कि अगर वो स्टीफेंस में जाते तो जेएनयू के लोगों की तरह जरूर राजनीति में आते. वैसे रघुराम जब दिल्ली आईआईटी गए तो वहां स्टूडेंट पॉलिटिक्स में इनवॉल्व हुए और छात्रसंघ के महासचिव बने.

अगर वो आईआईटी दिल्ली की बजाए तो सेंट स्टीफेंस कॉलेज में पढ़ते तो यकीनन राजनीति में जरूर प्रवेश करते, वैसे वो आईआईटी दिल्ली में भी स्टूडेंट पॉलिटिक्स में सक्रिय थे


84 के दंगों में कई सिख युवाओं को बचाया
राजन डरने वाले लोगों में नहीं हैं. 1984 के दंगों में उन्होंने कई सिखों की मदद की. जब ये दंगे हो रहे थे तब रघुराम के पिता इंग्लैंड में पोस्टेड थे. उनकी मां भी वहीं थीं, लेकिन रघुराम और उनके छोटे भाई दिल्ली में अकेले रह रहे थे. तब रघुराम ने एक सिख युवक को बचाकर उसे घर तक पहुंचाया. इसके बाद रघुराम ने आईआईटी दिल्ली के अपने कई दोस्तों के साथ मिलकर सिख युवाओं की रक्षा की.

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कभी कविताएं लिखते थे
मां का ये भी कहना है कि वो लगातार किताबें और कविताओं का कोट्स अपने भाषणों में इस्तेमाल करते हैं. युवा दिनों में वो पढने के खासे शौकीन थे. उनकी मां के अनुसार उन दिनों वो कविताएं भी लिखते थे और स्कूल, कॉलेज की लड़कियों के बीच खासे लोकप्रिय थे. रघुराम के पेरेंट्स चेन्नई में रहते हैं, वो बहुत धार्मिक नहीं हैं. शायद ही कभी मंदिर जाते हैं. लेकिन अपने पेरेंट्स को जरूर कई बार मंदिर ले जा चुके हैं.

रघुराम राजन का नाम पिछले कुछ अर्से से लगातार दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों या बैंकों के प्रमुख की दौड़ में लिया जाता रहा है. कभी उन्हें अमेरिकी रिजर्व बैंक के गर्वनर की दौड़ में तो कभी बैंक आफ इंग्लैंड के चेयरमैन के रूप में गिना जाता रहा है. वैसे वो इन दिनों शिकागो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. नोबल पुरस्कार के लिए भी उनके नाम पर विचार किया गया था.

रघुराम राजन की मां ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर रघुराम किसी की बातों से हर्ट हो जाते हैं तो वो उससे बात करना बंद कर देते हैं


चार सितंबर 2016 को रिजर्व बैंक के  गवर्नर पद को अलविदा कहने के बाद रघुराम राजन मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले को लेकर सुर्खियों में आए थे. अपनी किताब ‘आई डू व्हाट आई डू’ में उन्होंने साफ लिखा था कि उन्होंने नोटबंदी के प्रस्ताव का विरोध किया था.

  • राजन ने आईआईटी दिल्‍ली से स्‍नातक और आईआईएम अहमदाबाद से पोस्‍टग्रेजुएट की पढ़ाई की है.

  • 2013 में रुपये के संकट से निपटने के लिए उन्‍हें ब्रिटिश मैगजीन सेंट्रल बैंकिंग्‍स ने सेंट्रल बैंकर ऑफ द ईयर का अवार्ड दिया था.

  • राजन स्‍टॉकहोम स्‍कूल ऑफ इकोनॉमिक्‍स, केलॉग स्‍कूल ऑफ मैनेजमेंट और एमआईटी स्‍लॉअन स्‍कूल ऑफ मैनेजमेंट के भी विजिटिंग प्रोफेसर रहे हैं.


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First published: July 22, 2019, 12:44 PM IST
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