पाकिस्तान: जिन्ना ने तो मशहूर किया था, नए देश का ये नाम गढ़ा किसने था?

जब आज़ादी के लिए भारत (India) की बंटवारे की शर्त रखी गई तो पाकिस्तान (Pakistan) अलग देश के तौर पर वजूद में आया. 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान आज़ाद देश बना. इस नए मुल्क का नाम कैसे रखा गया?

Aditya Prakash | News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 5:27 PM IST
पाकिस्तान: जिन्ना ने तो मशहूर किया था, नए देश का ये नाम गढ़ा किसने था?
'पाकिस्तान' वो नाम जिसे रहमत अली ने गढ़ा और जिन्ना ने मशहूर किया
Aditya Prakash | News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 5:27 PM IST
कैम्ब्रिज (Cambridge) की हम्बरस्टोन रोड पर मौजूद कॉटेज नंबर-03 में कुछ मुस्लिम नौजवान अल्लामा इकबाल (Allama Iqbal) की ‘सेपरेट मुस्लिम नेशन’ थ्योरी पर लगातार काम कर रहे थे. ये सभी ब्रिटिश इंडिया से लंदन पढ़ाई करने आए थे. इनके बीच एक अलग देश बनाने को लेकर चर्चाओं और बहस का दौर चलता रहता था. उन बहस के अहम मुद्दे होते थे कि कैसे 'सेपरेट मुस्लिम नेशन' (Muslim Nation) हासिल किया जाए, उसका नाम क्या होगा, उसकी सीमाएं क्या होंगी, राष्ट्रीय भाषा कौन सी होगी, वगैरह-वगैरह. इन नौजवानों के रात-दिन इन्हीं तमाम मुद्दों पर चर्चा करते हुए बीतते थे.

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आखिरकार वो दिन आ गया और आपसी सहमति से इन नौजवानों ने “Now Or Never” की हेडिंग से एक बुकलेट निकाली. वो तारीख थी 28 जनवरी 1933 की. इतिहास में पहली दफ़े 'पाकिस्तान' शब्द का ज़िक्र इसी बुकलेट में हुआ था. 'पाकिस्तान' शब्द को ईज़ाद करने वाले शख्स थे उस बुकलेट के संपादक चौधरी रहमत अली (Chaudhary Rahmat Ali).

इस चार पन्नों के बुकलेट “Now Or Never” में कहा गया:

“आज भारत की जो स्थिति है उसमें वो न कोई मुल्क है और न ही किसी एक राष्ट्र का नाम, वह ब्रिटिश हुकूमत द्वारा पहली बार बनाया गया राज्यों का एक समूह है. भारत के उत्तर पश्चिमी प्रांतों में मुसलमान अक्सरियत में हैं. इन प्रांतों की लगभग चार करोड़ की कुल आबादी में हम मुसलमानों की आबादी लगभग तीन करोड़ है. उन्हें ब्रिटिश इंडिया से अलग कर एक नई शक्ल दी जाए. पंजाब, कश्मीर, सिंध, सीमांत प्रांत, बलूचिस्तान को मिलाकर एक नया मुल्क बने."

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पाकिस्तान की बुनियाद रखने का श्रेय मोहम्मद अली जिन्ना को दिया जाता है.

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"भारत को संयुक्त रखने की बात हास्यास्पद और फूहड़ है. हमारा मजहब और तहजीब, हमारा इतिहास और हमारी परंपरा, हमारा सोशल बिहेवियर और इकोनॉमिक सिस्टम, लेन-देन, उत्तराधिकार और शादी-विवाह के कानून बाक़ी भारत के ज्यादातर बहुसंख्यक बाशिंदों से बिल्कुल अलग हैं. ये कोई मामूली फर्क नहीं हैं. हम मुसलमानों का रहन-सहन हिंदुओं से काफी जुदा है. हमारे बीच न खानपान है, न शादी-विवाह के संबंध. हमारे रीति रिवाज, यहां तक कि हमारा वेशभूषा भी उनसे काफी अलग है. हिंदू राष्ट्र की सलीब पर हम ख़ुदकुशी नहीं करेंगे”

"पाकिस्तान" टर्म को चौधरी रहमत अली ने इस तरह परिभाषित किया था:
P-Punjab
A-Afghania (North-West Frontier Province)
K-Kashmir
S-Sindh
Tan-BalochisTan

“Now Or Never” में चौधरी रहमत अली ने पाकिस्तान का नक्शा भी छपवाया था. दिलचस्प बात ये है कि इस नक्शे में भारत के अंदर तीन पृथक मुस्लिम देशों को दिखाया गया था. ये देश थे पाकिस्तान, बंगिस्तान (पूर्वी बंगाल, आज का बांग्लादेश) और दक्खिनी उस्मानिस्तान (हैदराबाद, निजाम की रियासत). सबसे खास बात ये है कि रहमत अली के पाकिस्तान और अल्लामा इकबाल के सेपरेट मुस्लिम स्टेट में कहीं भी बंगाल का जिक्र नहीं है. लेकिन पाकिस्तान जब एक मुल्क बना तो पूर्वी बंगाल को भी 'पूर्वी पाकिस्तान' के तौर पर उसमें शामिल किया गया, जो कि बाद में जाकर स्वतंत्र राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ बना.

पाकिस्तान: एक हर्फ़ से एक मुल्क बनने तक का सफ़र
“Now Or Never” बुकलेट अलगाववादी मुस्लिम नेताओं में खूब लोकप्रिय हुई. जिन्ना और इक़बाल जैसे 'मुस्लिम लीग' के आला नेताओं ने रहमत अली की काबिलियत की तारीफ की थी. रहमत अली ने “Now Or Never” से मिली बड़ी कामयाबी के बाद 'पाकिस्तान नेशनल मूवमेंट' की शुरुआत की. और आगे चलकर उन्होंने एक अगस्त 1933 से पाकिस्तान नाम की वीकली मैगजीन की भी नींव रखी. 1940 में हुए मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में अधिकारिक तौर पर अलग मुस्लिम राष्ट्र के लिए "पाकिस्तान" को स्वीकार कर लिया गया. 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान एक आज़ाद मुल्क बना. मुल्क की बुनियाद भी लगभग उसी तरह से रखी गई, जैसा साढ़े चौदह साल पहले चौधरी रहमत अली ने अपने बुकलेट में ज़िक्र किया था. इस तरह रहमत अली का देखा गया ख्वाब पूरा हुआ और 'पाकिस्तान' शब्द हमेशा के लिए वजूद में आ गया.

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First published: August 14, 2019, 4:13 PM IST
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